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सबसे बड़े अखबार ने लिखा- कश्मीर मसले पर दुनिया की चुप्पी हमारी कूटनीतिक नाकामी

एक वर्ष पहले
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कश्मीर मसले पर पाकिस्तान मीडिया सरकार को नाकाम करार दे रहा है। (फाइल)
  • ‘द डॉन’ पाकिस्तान का सबसे बड़ा अखबार है, उसके संपादकीय में सरकार की कूटनीति पर सवाल उठाए गए
  • मोदी को यूएई का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने से तिलमिलाए मुल्क को इस्लामी देशों से भी समर्थन नहीं

नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके मंत्री घटिया आरोपों के साथ धमकियां दे रहे हैं। लेकिन, वहां का मीडिया अपनी ही सरकार पर सवालिया निशान लगा रहा है। पाकिस्तान के सबसे बड़े अखबार ‘द डॉन’ ने संपादकीय के जरिए सरकार की कूटनीतिक नाकामी को उजागर कर दिया। इसे मशहूर पत्रकार और लेखक जाहिद हुसैन ने लिखा है। अंग्रेजी में प्रकाशित इस संपादकीय का हिंदी अनुवाद हम यहां दे रहे हैं। 
 

इमरान की अपील में कुछ भी नया नहीं
कश्मीर मसले पर इमरान खान अवाम की मदद मांग रहे हैं। वो कहते हैं- आप घर, ऑफिस या फिर जहां कहीं भी हों। हर शुक्रवार को आधे घंटे के लिए सड़कों पर उतरें। इससे हर हफ्ते जनता का आधा घंटा ही खराब होगा। पीएम खुद को कश्मीर का एम्बेसेडर बता रहे हैं। कहते हैं कि वो हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसे उठाएंगे। लेकिन ये बयानबाजी से ज्यादा कुछ नहीं है। यह नई बात या पहल भी नहीं है क्योंकि इसमें नीति का अभाव है और गंभीरता नदारद है। उम्मीद थी कि सरकार कूटनीतिक और राजनीतिक मंचों पर तैयारी से मुद्दा उठाएगी। उसके पास विकल्प भी तो नहीं हैं। हम दुनिया को यह बताने में भी नाकाम रहे कि यह मसला परमाणु युद्ध की तरफ भी जा सकता है।  
 

मुस्लिम देश भी साथ नहीं
कश्मीर मसले पर सबसे बड़ी हैरानी दुनिया की चुप्पी है। आठ करोड़ लोगों की आवाज उठाने के लिए कोई तैयार नहीं है। हम मुस्लिम दुनिया का दम भरते हैं लेकिन कोई भी इस्लामिक देश हमारे साथ नहीं आया। मोदी की निंदा छोड़िए, यूएई ने तो इसी दौरान अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान कर दिया। रोचक यह कि ईरान ने कश्मीर पर बयान जारी किया। 
 

भारत बड़ी आर्थिक शक्ति
भारत दुनिया में आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर है। यही वजह है कि खाड़ी देशों में उसका प्रभाव बहुत ज्यादा है। एक वक्त जो अरब देश पाकिस्तान के समर्थक थे, वो चुप हैं। बयान तक जारी नहीं करना चाहते। ओआईसी ने सिर्फ रस्म अदायगी के लिए बयान जारी किया। इस बात से खुश हो सकते हैं कि यूएन ने 50 साल बाद ही सही, एक मीटिंग की। दरअसल, दुनिया भारत पर दबाव नहीं डाल सकती और न इसके संकेत हैं। फोन पर विदेशी नेताओं से बात कर लेना कोई मायने नहीं रखता।  
 

गंभीर मुद्दा है विदेश नीति
विदेश नीति बेहद गंभीर विषय है। इसमें पाकिस्तान की जहालत साफ नजर आती है। विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी पैरोडी कर रहे हैं। टीवी पर नजर आ रहे हैं, हर मिनट ट्वीट कर रहे हैं। गंभीर मुद्दे को उन्होंने मजाक बना रखा है। मोदी-डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाकात के बाद कुरैशी ने झूठा बयान दिया। कहा- अमेरिका ने फिर मध्यस्थता की पेशकश की है। जबकि, वहां मोदी ने दो टूक कह दिया था कि इसमें किसी तीसरे देश को कष्ट देने की जरूरत नहीं है। इस मुद्दे पर अमेरिका से हमें सतर्क रहने की जरूरत है। एक-दो बयान आने का मतलब ये नहीं है कि वो हमारे साथ है। बाकी देश भी यही कर रहे हैं। चीन ने जरूर साथ दिया है। सच्चाई ये है कि पाकिस्तान के पास विकल्प बहुत सीमित हैं। देश में अस्थिरता है। यह कूटनीतिक दिक्कतों को बढ़ाएगी।

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