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दिल्ली / द्वारका और जनकपुरी दुष्कर्म पीड़िताओं के परिवार ने कहा- 10 लाख की मदद नहीं मिली, न्याय ही मिल जाए



db original: struggle of the fathers of Dwarka and Janakpuri rape victims continues
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db original: struggle of the fathers of Dwarka and Janakpuri rape victims continues

  • सीएम और राज्य महिला आयोग अध्यक्ष ने की थी 10-10 लाख रु. देने की घोषणा, अब तक वादा पूरा नहीं
  • द्वारका दुष्कर्म पीड़िता के पिता ने कहा- एक महीने से काम पर नहीं जा पाया, बच्ची के जूस तक के लिए पैसे नहीं 
  • जनकपुरी दुष्कर्म पीड़िता के पिता ने कहा- 20 हजार रुपए ब्याज पर ले चुका हूं

Dainik Bhaskar

Aug 09, 2019, 07:57 AM IST

नई दिल्ली (धर्मेंद्र डागर).  द्वारका सेक्टर-23 में 2 जुलाई और जनकपुरी में 14 जुलाई को दो बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया गया था। दोनों घटनाओं में आरोपियों ने बर्बरता की हदें पार कर दी थीं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल बच्चियों को देखने अस्पताल गए थे। वहां उन्होंने दोनों बच्चियों के परिजन के लिए 10-10 लाख रुपए मुआवजे की घोषणा की थी।

 

द्वारका की घटना को 1 महीना हो चुका है और जनकपुरी वारदात को करीब 1 महीन होने वाला है। इतने समय बाद भी दोनों परिवारों को कोई सरकारी आर्थिक मदद नहीं दी गई और मुआवजे की घोषणा महज एक सरकारी रवायत बन कर रह गई। दोनों परिवारों में गरीबी का आलम यह है कि भूखे मरने तक की नौबत आ गई है। पीड़िताओं के पिता का कहना है कि मदद के 10 लाख तो उन्हें नहीं मिले, कम से कम न्याय ही मिल जाता। उन्हें अब केवल उस वक्त का इंतजार है जब आरोपी को फांसी की सजा सुनाई जाएगी। इसके बाद चैन से भूखे ही मर जाएंगे।

 

द्वारका दुष्कर्म का मामला  

द्वारका के सेक्टर-23 में पीड़िता बच्ची के पड़ोस में रहने वाला एक शख्स बच्ची को फ्रूटी दिलाने का लालच देकर सुनसान जगह ले गया था। वहां उसने झाड़ियों में बर्बरता के साथ बच्ची से दुष्कर्म किया। आरोपी गिरफ्तार किया जा चुका है और उसने अपराध कबूल भी कर लिया है।

 

एक महीने से काम पर नहीं जा पाया

द्वारका दुष्कर्म पीड़िता के पिता ने बताया, "मैं परिवार में अकेला कमाने वाला हूं। पिछले एक महीने से काम पर नहीं गया हूं। घर में खाने को कुछ नहीं है। बच्ची के लिए जूस लाने के लिए भी पड़ोसी, रिश्तेदारों से मिन्नतें कर पैसे लाते है। जब सीएम और मालीवाल अस्पताल में बच्ची को देखने आए थे, तो उन्होंने 10 लाख की आर्थिक मदद देने को कहा था। आज तक एक रुपया नहीं मिला है। इस बाबत जब दिल्ली महिला आयोग से बात की तो उन्होंने कहा कि खाने-पीने का सामान चाहिए तो दे देंगे, रुपए नहीं है। जब पुलिस से बात की तो कहा पहले बैंक अकाउंट खुलवाओ। बच्ची के 2 ऑपरेशन होने के बाद एक और सर्जरी होनी बाकी है।" 

 

"डॉक्टरों ने बताया है कि बच्ची के गुप्तांग अधिक फट जाने के कारण मल त्याग के लिए पेट के सहारे नली डालकर अलग रास्ता बनाया था। बच्ची की हालत में सुधार होने पर उसे अपनी जगह पर लाने लिए एक और ऑपरेशन किया जाएगा। बच्ची की स्थित को देखते हुए अभी ऑपरेशन करने में 2 से 3 महीने लग सकते है। बच्ची अभी कुछ भी खाती है, तो उल्टी कर देती है। वह अभी ना तो सही तरह बैठ पाती है, ना खड़ी हो पाती है। डॉक्टरों के अनुसार जब वह सही ढंग से खाना शुरू करेगी तब ऑपरेशन किया जाएगा। इससे पहले ऑपरेशन घातक साबित हो सकता है। " 

 

पुलिस- चार्जशीट पर काम चल रहा है

द्वारका के डीसीपी एंटो अल्फोंस ने कहा, "द्वारका दुष्कर्म मामले में आरोपी के खिलाफ चार्जशीट अंतिम चरण में है। 60 दिनों से पहले चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी जाएगी। वहीं जनकपुरी इलाके की मासूम पीड़िता मामले में चार्जशीट को लेकर काम जारी है।"

 

जनकपु़री दुष्कर्म का मामला
जनकपु़री इलाके में रहने वाली 6 साल की मासूम बच्ची को एक रिक्शा चालक सोते हुए उसके माता-पिता के बीच से उठा ले गया था। करीब 50 मीटर दूर ले जाकर दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है।

 

बच्ची को अस्पताल से छुट्‌टी मिली तो घर ले जाने तक के रुपए नहीं थे

 

जनकपु़री दुष्कर्म पीड़िता के पिता ने बताया, "बच्ची जब अस्पताल में भर्ती हुई थी तो सीएम केजरीवाल और महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल वहां आए थे। उन्हों 10 लाख रुपए मुआवजे की घोषणा की थी लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची के पेट में आरोपी ने लात मारी थी। उसे गंभीर अंदरूनी चोट है। पेट में जख्म अधिक होने के कारण बच्ची अभी जूस व फल के कुछ टुकड़े, कभी-कभी एक या दो बिस्किट खा लेती है। इसके अलावा वह कुछ नहीं खा पाती। शुरू में बच्ची के इलाज का खर्च प्रशासन ने उठाया लेकिन बाद में सारा खर्च खुद उठाना पड़ा। 25 दिन बाद बच्ची को गुरुवार को अस्पताल से छुटटी दे दी है।"

 

"इन 25 दिनों में हमारे करीब 20 हजार रुपए तक खर्च हो चुके हैं। यह रकम हमने ब्याज पर ली। इसके अलावा रिश्तेदारों और कुछ जानने वालों से भी रुपए लिए। बच्ची के अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उसे घर तक ले जाने तक के पैसे नहीं थे। करीब डेढ़ घंटे विचार करने के बाद जिस व्यक्ति ने बच्ची को ढूंढने में मदद की थी, उसको फोन किया। एक बार फिर उससे मदद की गुहार लगाई तो उसने कुछ रुपए दिए, तब जाकर बच्ची को घर लेकर आए। डॉक्टरों ने अभी बच्ची को सप्ताह में 2 बार अस्पताल लाने के लिए कहा है। पुलिस और अस्पताल प्रशासन से मुआवजे को लेकर पूछा था तो उन्होंने बताया कि अभी कोई पैसा नहीं आया। " 

 

सरकार- अंतिम चरण में है प्रक्रिया

दिल्ली सरकार के प्रवक्ता ने कहा, दोनों मामलों में वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में हैं। जल्द ही पीड़ितों को मुआवजा राशि उपलब्ध करा दिया जाएगा।

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