• Hindi News
  • National
  • Defence Minister Rajnath Singh inaugurate strategic bridge in Ladakh, visit forward areas

कूटनीति / राजनाथ सिंह ने लद्दाख में रिनचेन ब्रिज का उद्घाटन किया, सीमा से सटे इलाकों का दौरा भी किया

X

  • ब्रिज का नाम दो बार महावीर चक्र से सम्मानित कर्नल चेवांग रिनचेन के नाम पर, उन्होंने भारत के लिए तीन जंग लड़ी थीं
  • सेना के मुताबिक, श्योक नदी पर 14,650 फीट की ऊंचाई पर बना यह पुल लद्दाख से चीनी सीमा की दूरी कम करेगा

दैनिक भास्कर

Oct 21, 2019, 08:55 PM IST

लद्दाख. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को लद्दाख में दुरबुक और दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) के बीच बने रिनचेन ब्रिज का उद्घाटन किया। इस दौरान आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत और चिनार कॉर्प्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों भी मौजूद थे। भारत के लिए कूटनीतिक अहमियत रखने वाला यह पुल चीन सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से 40 किमी पहले पूर्व में स्थित है। यह पुल श्योक नदी पर 14,650 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, दौलत बेग ओल्डी दुनिया का सबसे ऊंचा एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड (एयरबेस) है।

 

लद्दाख रवाना होने से पहले राजनाथ ने ट्वीट में कहा, “नई दिल्ली से लद्दाख रवाना हो रहा हूं। सेना प्रमुख जनरल रावत के साथ लद्दाख के फॉरवर्ड एरिया का दौरा होगा। श्योक नदी के ऊपर भारत के लिए कूटनीतिक रूप से अहम ब्रिज के उद्घाटन समारोह में भी हिस्सा लूंगा।”

 

चीन सीमा तक पहुंचने में सैनिकों को कम समय लगेगा
इस पुल का निर्माण सीमा सड़क संगठन ने किया है। यह काराकोरम पास से बेहद नजदीक है। यहां से 8 किमी की दूरी पर एलएसी है। यह ब्रिज 1400 फीट लंबा और 13000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसके शुरू हो जाने से 14 घंटे की यात्रा साढ़े 6 घंटे में ही पूरी होने लगेगी। यानी 7.5 घंटे कम लगेंगे। साथ ही चीन सीमा पर सैनिकों के पहुंचने में भी काफी कम समय लगेगा। जम्मू-कश्मीर की चीन के साथ लगी 1597 किमी लंबी सीमा को एलएसी के नाम से जाना जाता है।


ब्रिज का नाम कर्नल चेवांग रिनचेन के नाम पर रखा
लद्दाख के इस ब्रिज का नाम कर्नल चेवांग रिनचेन रखा गया है। चेवांग ने पाकिस्तान के खिलाफ 1948 व 1971 और चीन के खिलाफ 1962 की जंग लड़ी थी। इस जंग में अदम्य साहस और नेतृत्व क्षमता दिखाने के लिए उन्हें 2 बार महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। चेवांग ने 1948 में पाकिस्तान के खिलाफ नुब्रा घाटी की लड़ाई लड़ी थी। 1971 में उन्होंने लद्दाख में पाकिस्तान सेना के चालुनका और तुरतुक के सामरिक चौकी पर कब्जा कर लिया था।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना