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कोरोना के खिलाफ युद्धरत हमारी सेना:रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बताया- किस तरह देशवासियों की जान बचा रहे आर्मी-नेवी और एयरफोर्स

नई दिल्लीएक महीने पहले
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आर्मी ने आधा दर्जन से ज्यादा शहरों में इस तरह से कोविड केयर सेंटर बनाए हैं, जहां 24 घंटे कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है। - Dainik Bhaskar
आर्मी ने आधा दर्जन से ज्यादा शहरों में इस तरह से कोविड केयर सेंटर बनाए हैं, जहां 24 घंटे कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है।

देशभर में कोरोना संक्रमण से हालात काफी खराब होते जा रहे हैं। ऐसे में देश के दुश्मनों से लोगों रक्षा करने वाली हमारी सेनाओं ने अब कोरोना वायरस के खिलाफ भी युद्ध छेड़ दिया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को बताया कि आर्मी-नेवी और एयरफोर्स किस तरह से देशवासियों की जान बचाने में लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस वायरस से निपटने के लिए सेना को आर्थिक निर्णय लेने की पूरी छूट दी गई है। उन्हें क्वारैंटाइन सेंटर से लेकर अस्पताल बनाने तक कोई भी सामान खरीदने के लिए किसी की इजाजत लेने की जरूरत नहीं है।

राजनाथ ने बताया कि जरूरत के हिसाब से बड़े शहरों में फोर्स से जुड़े अस्पतालों की व्यवस्थाएं बढ़ाई जा रही हैं। दिल्ली, लखनऊ, बेंगलुरु और पटना से से शुरूआत की गई है। राज्य सरकारों के अनुरोध पर और जगह भी शुरुआत की जाएगी। सेना अब तक देशभर में 4 हजार बेड और 585 आईसीयू यूनिट तैयार कर चुकी है। दिल्ली के आर्मी बेस अस्पताल को पूरी तरह कोविड अस्पताल में बदल दिया गया है। इसकी कैपेसिटी 400 बेड्स से बढ़ाकर 1000 बेड कर दी गई है।

आर्मी ने MP, UP और झारखंड में बनाया कोविड सेंटर
महामारी के इस दौर में आर्मी ने अपनी मेडिकल सुवधाएं आमजन के लिए समर्पित कर दी हैं। आर्मी ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और लखनऊ में 100 बेड के बिस्तर तैयार किए हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश के सागर में भी आर्मी ने 40 बेड का आइसोलेशन सेंटर शुरू किया है। इसमें एंबुलेंस की सुविधा भी है। भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में भी 40-40 बेड की व्यवस्था की गई है। झारखंड के नामकुम में 50 बेड की व्यवस्था की गई है। महाराष्ट्र के काम्ती में 60 बेड का आईसीयू बेड शुरू किया गया है। इसके अलावा राजस्थान के बाड़मेर में 100 बेड की व्यवस्था की गई है। आर्मी के 200 ड्राइवर भी स्टैंडबाय मोड पर हैं, जिन पर ऑक्सीजन पहुंचाने की जिम्मेदारी है।

एयर फोर्स दुनियाभर से ला रही ऑक्सीजन
हवाई सफर के जरिए जल्द से जल्द ऑक्सीजन पहुंचाने की जिम्मेदारी एयर फोर्स ने ली हुई है। देश ही नहीं विदेशों से ऑक्सीजन लाने का काम भी वायुसेना कर रही है। अब तक सेना 61 ऑक्सीजन कंटेनर विदेशों से ला चुकी है। इनमें 1142 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की कैपेसिटी है। एयरफोर्स देश के अंदर 230 टेंकर सप्लाई कर चुकी है। इनकी कैपेसिटी 4527 मीट्रिक टन की कैपेसिटी है।

एयरफोर्स विदेशों से ऑक्सीजन ला रही है। देशभर में जल्द से जल्द ऑक्सीजन पहुंचाने का जिम्मा भी वायुसेना पर है।
एयरफोर्स विदेशों से ऑक्सीजन ला रही है। देशभर में जल्द से जल्द ऑक्सीजन पहुंचाने का जिम्मा भी वायुसेना पर है।

AFMS ने रिटायर्ड डॉक्टरों को वापस बुलाया
आर्म्ड फोर्स मेडिकल सर्विस (AFMS) की तरफ से कई अस्पतालों में डॉक्टरों, स्पेशलिस्ट और पैरामेडिकल्स की तैनाती की गई है। इस संस्था में शॉर्ट सर्विस कमिशन पर काम कर रहे 238 डॉक्टरों को 31 दिसंबर 2021 तक एक्सटेंशन दे दिया गया है। हाल ही में AFMS से रिटायर हुए हेल्श प्रोफेशनल्स को फिर से ड्यूटी पर बुला लिया गया है।

नेवी ने संभाला कंसाइनमेंट पहुंचाने का जिम्मा
नेवी ने अपनी कई शिप्स ऑक्सीजन पहुंचाने में लगा रखी हैं। नेवी ने ऑक्सीजन का पहला कंसाइनमेंट INS तलवार के जरिए बहरीन से कर्नाटक के मंगलौर पहुंचाया था। इसके अलवा नेवी के INS जलस्व और INS ऐरावत के जरिए कोलकाता और कोच्चि में ऑक्सीजन टेंक भेजे गए। नेवी दो सिविलियन प्लांट की मरम्मत भी कर चुकी है। इनसे 1800 ऑक्सीजन सिलेंडर प्रतिदिन ऑक्सीजन मिल रही है।

दिल्ली से बनारस तक DRDO बना रहा कोविड सेंटर
DRDO ने दिल्ली और लखनऊ में 500 बेड और अहमदाबाद में 900 बेड का कोविड केयर सेंटर सेट अप किया है। इतना ही पटना में ESIC के अस्पताल को कोविड सेंटर में तब्दील कर 500 बेड की व्यवस्था की गई है। जल्द ही मुजफ्फरपुर और वाराणसी (बनारस) में भी अस्पताल तैयार किए जा रहे हैं। इन अस्पतालों को टेक्निकल सपोर्ट देने का काम भी DRDO कर रहा है।

500 मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट लगाए
DRDO अब तक पीएम केयर फंड से 500 मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट लगा चुका है। इनमें से 332 की व्यवस्था टाटा एडवांस सिस्टम लिमिटेड और 48 की व्यवस्था ट्राइंडेट न्यूमेटिक्स प्राइवेट लिमिटेड संभाल रही है। इसके अलावा 120 प्लांट का संचालन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम की मदद से किया जा रहा है। 2 प्लांट दिल्ली के एम्स और RML अस्पताल में लगाए गए हैं।

नेवी ने समुद्री रास्ते से ऑक्सीजन टेंकर पहुंचाने की जिम्मेदारी ली है।
नेवी ने समुद्री रास्ते से ऑक्सीजन टेंकर पहुंचाने की जिम्मेदारी ली है।

डिफेंस सेंक्टर की कंपनियां भी पीछे नहीं
डिफेंस के क्षेत्र में काम करने वाले पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) की मदद से भी बहुत से काम किए गए हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड भी कोविड सर्विस प्रोवाइड कर रहे हैं। HAL ने बेंगलुरु में 180 बेड का कोविड केयर सेंटर तैयार किया है, जिसमें ICU और ऑक्सीजन की व्यवस्था भी है। एक दूसरे डिफेंस PSU ने बेंगलुरु में 250 बेड की व्यवस्था कर उसे मुंसिपल कॉर्पोरेशन के हवाले कर दिया है।

कैंटोनमेंट बोर्ड के अस्पताल जनता को समर्पित
देश में 30 कैंटोनमेंट बोर्ड 40 जनरल अस्पतालों का संचालन कर रहे हैं। इनमें 1240 बेड्स की व्यवस्था है। इनमें से 37 में ऑक्सीजन बेड की भी व्यवस्था है। कोरोनाकाल में NCC के अधिकारी भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इन्हें कई राज्यों में राज्य सरकार के सहयोग के लिए लगाया गया है।

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