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लद्दाख में कैसे पीछे हट रहा है चीन:पैंगॉन्ग लेक इलाके में डिसएंगेजमेंट शुरू हुआ, इस समझौते से देश ने कुछ नहीं खोया: राजनाथ

नई दिल्ली4 महीने पहले
  • गलवान में भारत के 20 जवानों की शहादत के 8 महीने बाद चीन से करार
  • बुधवार से लद्दाख सरहद से भारत और चीन की सेना पीछे हटने लगी है

पिछले साल जून में गलवान घाटी में भारत के 20 जवानों की शहादत के 8 महीने बाद चीन के साथ समझौता हो गया है। लद्दाख की पैंगॉन्ग लेक के उत्तरी इलाके से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटना शुरू हो गई हैं। खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में गुरुवार सुबह 10.30 बजे यह जानकारी दी। साथ ही यह दावा भी किया कि इस समझौते से भारत ने कुछ नहीं खोया है और कहा कि हम किसी भी देश को अपनी एक इंच जमीन भी नहीं लेने देंगे।

इसके बाद शाम 5 बजे रक्षा मंत्री ने लोकसभा में भी चीन से हुए समझौते की जानकारी दी। साथ ही कहा कि दोनों सेनाओं की बख्तरबंद गाड़ियां अपने-अपने परमानेंट बेस पर लौट चुकी हैं।

पेंगॉन्ग लेक के किनारे भारत और चीन के सैन्य अफसरों में डिसइंगेजमेंट पर बातचीत हुई।
पेंगॉन्ग लेक के किनारे भारत और चीन के सैन्य अफसरों में डिसइंगेजमेंट पर बातचीत हुई।
दोनों सेनाओं के बीच बख्तरबंद गाड़ियां वापस ले जाने पर सहमति बनी।
दोनों सेनाओं के बीच बख्तरबंद गाड़ियां वापस ले जाने पर सहमति बनी।
पहले चीनी सेना ने अपने टैंक परमानेंट बेस पर वापस भेजे।
पहले चीनी सेना ने अपने टैंक परमानेंट बेस पर वापस भेजे।
चीन के बाद भारतीय सेना के टैंक अपने परमानेंट बेस की ओर रवाना हुए।
चीन के बाद भारतीय सेना के टैंक अपने परमानेंट बेस की ओर रवाना हुए।
चीन की सेना ने अगले चरण में अपने बची हुई बख्तरबंद गाड़ियां और टैंक वापस भेजे।
चीन की सेना ने अगले चरण में अपने बची हुई बख्तरबंद गाड़ियां और टैंक वापस भेजे।

आर्मी ने डिसएंगेजमेंट का वीडियो जारी किया

भारत-चीन के बीच पिछले साल मई से तनाव था। जून से यह चरम पर जा पहुंचा, जब भारतीय इलाके में घुसी चीनी सेना को रोकने की कोशिश में गलवान घाटी में हिंसक संघर्ष हो गया। यही नहीं, अगस्त-सितंबर में 45 साल बाद भारत-चीन सीमा पर गोलियां चलीं।

हालांकि, सितंबर से ही भारत ने चीन के साथ डिप्लोमैटिक और मिलिट्री लेवल की बातचीत जारी रखी। 9 दौर की बातचीत के दौरान डिसएंगेजमेंट को लेकर खबरें आती रहीं, लेकिन पहली बार रक्षा मंत्री ने संसद में इस बारे में खुलकर बताया।

समझते हैं कि ये डिसएंगेजमेंट कहां होगा और कैसे होगा...

लद्दाख में सबसे विवादित इलाका है पैंगॉन्ग लेक
डिसएंगेजमेंट के बारे में जानने से पहले ये समझते हैं कि विवाद कहां है। भारत-चीन के बीच बॉर्डर इलाकों की साफ तौर पर पहचान नहीं है। इसी वजह से सीमा पर तनाव रहता है। ऐसा ही एक इलाका है पूर्वी लद्दाख का पैंगॉन्ग लेक एरिया। दरअसल, यह कोई छोटी झील नहीं है। 14 हजार 270 फीट की ऊंचाई पर मौजूद इस झील का इलाका लद्दाख से लेकर तिब्बत तक फैला हुआ है। झील 134 किलोमीटर लंबी है। कहीं-कहीं 5 किलोमीटर तक चौड़ी भी है। दोनों देशों की सेना यहां नावों से पेट्रोलिंग करती है।

इस झील के बीच से भारत-चीन की लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी LAC गुजरती है। झील के दो-तिहाई हिस्से पर चीन का नियंत्रण है। बाकी भारत के हिस्से आता है। इसी वजह से यहां अक्सर तनाव पैदा होते रहते हैं। झील किनारे की दुर्गम पहाड़ियां आगे की ओर निकली हुईं हैं, जिन्हें फिंगर एरिया कहा जाता है। ऐसे 8 फिंगर एरिया हैं, जहां भारत-चीन सेना की तैनाती है। गलवान की झड़प के बाद चीन ने बड़ी तादाद में इन इलाकों में जवानों की तैनाती कर ली। भारत ने भी जवाबी तैनाती की।

डिसएंगेजमेंट के समझौते की 7 बड़ी बातें
भारत-चीन मिलिट्री डिसएंगेजमेंट के लिए राजी हुए हैं। मिलिट्री डिसएंगेजमेंट यानी अब तक आमने-सामने रहीं दो देशों की सेनाओं का किसी तय इलाके से पीछे हटना। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मुताबिक, डिसएंगेजमेंट के लिए ये 7 फैसले हुए हैं…

1. दोनों देश फाॅरवर्ड डिप्लॉयमेंट हटाएंगे। यानी दोनों देशों की जो टुकड़ियां, अब तक एक-दूसरे के बेहद करीब तैनात थीं, वहां से पीछे हटेंगी।
2. चीन अपनी टुकड़ियों को पैंगॉन्ग लेक के नॉर्थ बैंक में फिंगर-8 के पूर्व की तरफ रखेगा।
3. भारत अपनी टुकड़ियों को फिंगर-3 के पास परमनेंट थनसिंह थापा पोस्ट पर रखेगा।
4. पैंगॉन्ग लेक से डिसएंगेजमेंट के 48 घंटे के अंदर सीनियर कमांडर स्तर की बातचीत होगी और बचे हुए मुद्दों पर भी हल निकाला जाएगा। (डिसएंगेजमेंट बुधवार से शुरू हुआ है।)
5. लेक के नॉर्थ बैंक की तरह साउथ बैंक में भी डिसएंगेजमेंट होगा। (कब से होगा ये अभी नहीं बताया गया है।)
6. अप्रैल 2020 से दोनों देशों ने पैंगॉन्ग लेक के नॉर्थ और साउथ बैंक पर जो भी कंस्ट्रक्शन किए हैं, उन्हें हटाया जाएगा और पहले की स्थिति कायम की जाएगी।
7. दोनों देश नॉर्थ बैंक पर पेट्रोलिंग को फिलहाल रोक देंगे। पेट्रोलिंग जैसी मिलिट्री गतिविधियां तभी शुरू होंगी, जब बातचीत से कोई समझौता बन जाएगा।

चीन का भारत की 43 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा
राजनाथ सिंह ने बताया कि चीन ने 1962 से लद्दाख के अंदर 38 हजार वर्ग किमी इलाके पर कब्जा कर रखा है। इसके अलावा पाकिस्तान ने PoK में 5,180 वर्ग किमी जमीन अवैध रूप से चीन को दे दी है। इस तरह चीन का भारत की करीब 43 हजार वर्ग किमी जमीन पर कब्जा है। उधर, चीन अरुणाचल प्रदेश की भी 9 हजार वर्ग किमी जमीन को अपना बताता है। भारत इन दावों को नहीं मानता।

चीन ने शांति बिगाड़ी, पर भारत की बढ़त कायम
राजनाथ ने बताया कि पिछले साल चीन ने जो कदम उठाए, उससे शांति पर असर पड़ा। चीन ने पिछले साल अप्रैल-मई के दौरान ईस्टर्न लद्दाख की सीमा पर बड़ी संख्या में सेना और भारी मात्रा में गोला-बारूद इकट्ठा कर लिया था। LAC के पास उसने कई बार घुसपैठ की कोशिश की, जिसका सेना ने जवाब दिया।
सामरिक रूप से अहम इलाकों की पहचान कर हमारी सेनाएं वहां मौजूद हैं। इसी वजह से हमारे पास बढ़त बनी हुई है।

चीन से 3 शर्त के साथ बात हो रही
रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले साल से चीन के साथ हमारा मिलिट्री और डिप्लोमैटिक रिश्ता बना हुआ है। बातचीत के दौरान हमने चीन को बताया कि 3 सिद्धांतों के आधार पर हम समस्या का समाधान चाहते हैं...
1. दोनों देश LAC को मानें और उसका आदर करें।
2. कोई भी देश मौजूदा हालात बदलने की एकतरफा कोशिश न करे।
3. दोनों देश सभी समझौतों को पूरी तरह मानें।

चीन ने भी कहा था- LAC पर टकराव खत्म
रक्षा मंत्री के बयान से एक दिन पहले, यानी बुधवार को चीनी सरकार ने भी दावा किया था कि लद्दाख में LAC पर भारत के साथ 9 महीने से चल रहा टकराव खत्म हो गया है। दोनों ओर से फ्रंटलाइन पर तैनात सैनिकों की एक साथ वापसी शुरू हो गई।

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