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प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त:क्या दिल्ली में कंस्ट्रक्शन बैन के बावजूद सेंट्रल विस्टा पर काम जारी? निर्देश लागू नहीं हुए तो टास्क फोर्स बनाएंगे

नई दिल्ली6 महीने पहले

दिल्ली-NCR में हवा की खराब गुणवत्ता के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने बढ़ते हवा प्रदूषण को लेकर चिंता जाहिर की। अदालत ने कहा कि प्रदूषण के साथ ही अब कोरोना का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि क्या दिल्ली में कंस्ट्रक्शन बैन के बावजूद सेंट्रल विस्टा पर काम चल रहा है? वह केंद्र से पूछेगा कि क्या सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में निर्माण कार्य जारी रखने से धूल प्रदूषण बढ़ रहा है। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह बताने के लिए कहा कि दिल्ली में प्रोजेक्ट के कारण वायु प्रदूषण को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए।

'वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए राज्यों ने क्या कदम उठाए?'
कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकारें वायु प्रदूषण पर केंद्र और आयोग की ओर से जारी निर्देशों का पालन नहीं करती हैं, तो वह प्रदूषण को कम करने के कदम उठाने के लिए टास्क फोर्स का गठन करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और UP सरकारों से वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी। इसे लेकर दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ओर से गाइडलाइन जारी की गई थी।

'दिल्ली में पौधे लगाने की योजना 12 हफ्ते में पेश करें'
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को राजधानी में पेड़-पौधे लगाने के लिए योजना तैयार करने का निर्देश दिया और कहा कि यह योजना 12 हफ्ते के भीतर कोर्ट के सामने पेश की जाए। वहीं, SC ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) को फेज-IV मेट्रो विस्तार परियोजना को लेकर पेड़ों को काटने के लिए मुख्य वन संरक्षक की इजाजत लेने का निर्देश दिया। SC में अब इस मामले की सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।

सेंट्रल विस्टा क्या है?

  • नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक के 3.2 किमी लंबे एरिया को सेंट्रल विस्टा कहते हैं। इसकी कहानी 1911 से शुरू होती है। ये वो दौर था जब भारत में अंग्रेजों का शासन था। कलकत्ता उनकी राजधानी थी, लेकिन बंगाल में बढ़ते विरोध के बीच दिसंबर 1911 में किंग जॉर्ज पंचम ने भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली शिफ्ट करने का ऐलान किया। दिल्ली में अहम इमारतें बनाने का जिम्मा मिला एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर को। इन दोनों ने ही सेंट्रल विस्टा को डिजाइन किया। ये प्रोजेक्ट वॉशिंगटन के कैपिटल कॉम्प्लेक्स और पेरिस के शान्स एलिजे से प्रेरित था। ये तीनों प्रोजेक्ट नेशन-बिल्डिंग प्रोग्राम का हिस्सा थे।
  • लुटियंस और बेकर ने उस वक्त गवर्नमेंट हाउस (जो अब राष्ट्रपति भवन है), इंडिया गेट, काउंसिल हाउस (जो अब संसद है), नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और किंग जॉर्ज स्टैचू (जिसे बाद में वॉर मेमोरियल बनाया गया) का निर्माण किया।
  • इस प्रोजेक्ट की शुरुआत में ही राजपथ के दोनों ओर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसेस बनाने का प्लान था, लेकिन ये आजादी के वक्त तक नहीं बन सके थे। यानी, जब देश आजाद हुआ तो सेंट्रल विस्टा का अधूरा मॉडल मिला। आजादी के बाद सेंट्रल विस्टा के दोनों ओर कई नई इमारतें बनीं। रेल भवन, वायु भवन, उद्योग भवन, कृषि भवन जैसी इमारतें 1962 तक यहां बन चुकी थीं। इसी तरह अलग-अलग मंत्रालयों ने अलग-अलग इमारतें बनाईं।
  • इस वक्त सेंट्रल विस्टा के अंदर राष्ट्रपति भवन, संसद, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, रेल भवन, वायु भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन, शास्त्री भवन, निर्माण भवन, नेशनल आर्काइव्ज, जवाहर भवन, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स (IGNCA), उपराष्ट्रपति का घर, नेशनल म्यूजियम, विज्ञान भवन, रक्षा भवन, वाणिज्य भवन, हैदराबाद हाउस, जामनगर हाउस, इंडिया गेट, नेशनल वॉर मेमोरियल, बीकानेर हाउस आते हैं।