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सीएए पर प्रदर्शन / दिल्ली पुलिस से नाराज कोर्ट ने कहा- आप तो ऐसा बर्ताव कर रहे हैं, जैसे जामा मस्जिद पाकिस्तान में हो

Delhi Jama Masjid CAA Protest: Court Hits OUT At Delhi Police Over Bhim Army Chief Chandrashekhar Azad Ravan Arrest, Says Jama Masjid Not In Pakistan
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Delhi Jama Masjid CAA Protest: Court Hits OUT At Delhi Police Over Bhim Army Chief Chandrashekhar Azad Ravan Arrest, Says Jama Masjid Not In Pakistan

  • चंद्रशेखर 20 दिसंबर को जामा मस्जिद पर हुए प्रदर्शन में शामिल हुए, उन्हें 21 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया
  • पुलिस का आरोप- चंद्रशेखर ने भड़काऊ भाषण दिया, भीम आर्मी चीफ ने कहा- इस बात का कोई सबूत नहीं
  • तीस हजारी कोर्ट ने कहा- अगर जामा मस्जिद पाकिस्तान में है तो वहां भी लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2020, 05:42 PM IST

नई दिल्ली. जामा मस्जिद पर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने पुलिस के रवैये पर मंगलवार को नाराजगी जाहिर की। दिल्ली पुलिस ने जब कोर्ट से कहा कि किसी भी प्रदर्शन के लिए इजाजत की जरूरत होती है। इस पर जज कामिनी लाऊ ने कहा, "कैसी इजाजत? आप ऐसे व्यवहार कर रहे हैं, जैसे जामा मस्जिद पाकिस्तान में हो। अगर जामा मस्जिद पाकिस्तान में है, तो भी नागरिक वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सकते हैं। लोग सड़कों पर इसलिए हैं, क्योंकि जो संसद में कहा जाना चाहिए.. वह नहीं कहा जाता।'

सबूत न पेश कर पाने पर कोर्ट दिल्ली पुलिस से नाराज
कोर्ट भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर रावण की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। चंद्रशेखर को 21 दिसंबर 2019 को दरियागंज इलाके से सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का आरोप है कि चंद्रशेखर ने भड़काऊ बयान दिए, जिसके बाद प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई। हालांकि, चंद्रशेखर ने अपनी याचिका में कहा कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं। वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। आरोपों के संदर्भ में कोई सबूत पेश न कर पाने पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से नाराजगी जाहिर की। अदालत बुधवार को इस मामले पर सुनवाई करेगी।

कोर्ट की टिप्पणियां

पाकिस्तान में भी प्रदर्शन कर सकते हैं : कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा- आप इस तरह व्यवहार कर रहे हैं, जैसे जामा मस्जिद पाकिस्तान में हो। अगर ऐसा है, तो आप वहां भी जाकर प्रदर्शन कर सकते हैं। वह अविभाजित भारत का हिस्सा है।

अपने देश को तबाह नहीं कर सकते : जज कामिनी लाऊ ने कहा- संसद के भीतर जो बातें कही जानी चाहिए, वह नहीं कही जाती हैं और इसीलिए लोग सड़कों पर उतरते हैं। हमारे पास अपने विचार जाहिर करने का पूरा अधिकार है, लेकिन हम अपने देश को तबाह नहीं कर सकते हैं। 

सबूत दें चंद्रशेखर ने भड़काऊ भाषण दिया : कोर्ट ने कहा, "दिल्ली पुलिस के जांच अधिकारी हर उस सबूत को रिकॉर्ड में लाएं, जो यह साबित करते हों कि चंद्रशेखर रावण ने जामा मस्जिद पर प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण दिया। यह भी बताएं कि कोई ऐसा कानून है, जो उस जमावड़े को असंवैधानिक साबित करता हो।'

क्या दिल्ली पुलिस इतनी पिछड़ी है : पुलिस ने जब कोर्ट से कहा कि हमने केवल ड्रोन से तस्वीरें ली हैं और कोई रिकॉर्डिंग नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा- क्या आप सोचते हैं कि दिल्ली पुलिस इतनी पिछड़ी है कि उसके पास रिकॉर्डिंग के उपकरण भी नहीं हैं।

क्या आपने संविधान पढ़ा है : जज कामिनी लाऊ ने कहा- मुझे कोई भी ऐसी चीज या ऐसा कानून बताइए, जो इस तरह के जमावड़े को रोकता हो। हिंसा कहां है? कौन कहता है कि आप प्रदर्शन नहीं कर सकते.. क्या आपने संविधान पढ़ा है। प्रदर्शन नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

कोई मुद्दा उठाएं तो रिसर्च करें : कोर्ट ने कहा- आजाद कानून का छात्र है। वह कोर्ट के भीतर भी प्रदर्शन कर सकता है। वह एक अंबेडकरवादी है। अंबेडकर मुस्लिम, सिखों और मूलरूप से समाज के दबे-कुचले वर्ग के करीब थे। अंबेडकर अपनी तरह के विद्रोही थे। हो सकता है कि आजाद क्या कहना चाहता है, इसका एक धुंधला सा विचार उसके पास हो... पर वो सही तरीके से इसे रख न पा रहा हो। अगर आप (चंद्रशेखर) कोई मुद्दा उठाते हैं तो आपको रिसर्च करनी चाहिए और वह यहां नहीं हुई।

संसद के सामने प्रदर्शन करने वाले मंत्री बने: कोर्ट ने कहा- संसद के बाहर विरोध-प्रदर्शन करने वाले लोग बड़े नेता और मंत्री बनते देखे गए हैं। चंद्रशेखर भी उभरते हुए नेता हैं। उन्हें भी प्रदर्शन का हक है। आजाद की सोशल मीडिया पोस्ट में हिंसा जैसी कोई बात नहीं है? उन्होंने हिंसा भड़काई, इसके क्या सबूत हैं।

पुलिस ने जंतर-मंतर तक मार्च की इजाजत नहीं दी थी
20 दिसंबर, 2019 को जामा मस्जिद इलाके में जुमे की नमाज के बाद भीड़ ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इस दौरान भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर रावण भी वहां मौजूद थे। भीम आर्मी जंतर-मंतर तक मार्च निकालना चाहती थी, लेकिन पुलिस ने उसे इसकी इजाजत नहीं दी। दिनभर शांतिपूर्ण ढंग से हुआ प्रदर्शन शाम होते-होते उग्र हो गया। पुलिस ने 21 दिसंबर, 2019 की सुबह चंद्रशेखर आजाद को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के समय आजाद ने कहा था, ‘‘हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। हमारे लोग हिंसा में शामिल नहीं हैं।''

(नोट: हमने गलती से सेशन कोर्ट की टिप्पणी को हाईकोर्ट की टिप्पणी बता दिया था। इसे अब सुधार दिया गया है। इस गलती के लिए पाठकों से माफी।)

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