दिल्ली में 1000 लो फ्लोर बसों की खरीदी में घोटाला:LG ने CBI जांच की मंजूरी दी; AAP ने कहा- हमें पढ़े-लिखे उपराज्यपाल की जरूरत

नई दिल्ली3 महीने पहले

शराब घोटाले की जांच झेल रही दिल्ली सरकार पर अब लो फ्लाेर बसों की खरीदी में भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। LG वीके सक्सेना ने रविवार को मामले की CBI जांच की मंजूरी दे दी है। शिकायत दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने 9 जून को दर्ज कराई थी।

शिकायत में दिल्ली के परिवहन मंत्री पर टेंडर, खरीद और दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी-मॉडल ट्रांजिट सिस्टम (DIMTS) समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था। हालांकि पिछले साल शिकायत के बाद बस खरीद का टेंडर रद्द कर दिया गया था।

CBI जांच पर भड़की आम आदमी पार्टी
आम आदमी पार्टी (AAP) ने CBI जांच के जवाब में कहा, 'LG खुद भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। ध्यान हटाने के लिए, वे ऐसे काम कर रहे हैं। अब तक CM, डिप्टी CM और स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ हुई जांचों का कोई नतीजा नहीं निकला है। उन्होंने अब चौथे मंत्री के खिलाफ शिकायत की है। उन्हें पहले अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब देना चाहिए।'

AAP ने यह भी कहा कि ये बसें कभी नहीं खरीदी गईं और टेंडर रद्द कर दिए गए। दिल्ली को और ज्यादा पढ़े-लिखे LG की जरूरत है। इस आदमी को पता नहीं है कि वह किस पर साइन कर रहा है।

2019 में शुरू हुई थी बसों की खरीद
भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया था कि जुलाई 2019 में दिल्ली सरकार ने 1,000 लो-फ्लोर बसों की खरीद और उनके रखरखाव में पांच हजार करोड़ रुपए का घोटाला किया है। मेंटेनेंस का ठेका भी बस सप्लाई करने वाली कंपनी को ही दे दिया गया है जो गलत है। बसों के सड़कों पर उतरते ही मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट भी लागू हो जाएगा जबकि बसों की तीन साल की वारंटी होनी चाहिए।

इस दौरान गड़बड़ियां आने पर मेंटेनेंस के लिए एक भी पैसे नहीं देने होते हैं। तत्कालीन उपराज्यपाल अनिल बैजल के निर्देश पर तीन सदस्यीय समिति ने एक रिपोर्ट पेश की थी। समिति ने एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (AMC) में खामियां पाई थीं और इसे खत्म करने की सिफारिश की थी।

19 अगस्त से दिल्ली में AAP और BJP के बीच तकरार
दिल्ली में आप और भाजपा के बीच 19 अगस्त से तकरार चल रही है। दरअसल, आबकारी नीति को लेकर दिल्ली में पहली बार 19 अगस्त को मनीष सिसोदिया के घर पर CBI ने छापेमारी की थी। यह छापेमारी करीब 14 घंटे तक चली थी, जिसके बाद CBI ने इस मामले में PMLA कानून के तहत केस दर्ज कर लिया था। भाजपा का आरोप है कि यह शराब घोटाला 2,000 करोड़ रुपए का है।

हालांकि घोटाले को लेकर CBI ने बड़े दावे किए। जांच एजेंसी के मुताबिक, इसकी पटकथा दिल्ली नहीं, मुंबई में लिखी गई थी। इसे तैयार करने में मुंबई की इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के पूर्व CEO का नाम सामने आया है।

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