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डेमोक्रेसी पर IDEA की रिपोर्ट:भारत में सरकार की आलोचना करने वालों को दबाया जाता है, दुनिया में भी कमजोर हो रही डेमोक्रेसी

नई दिल्ली8 दिन पहले
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डेमोक्रेटिक वैल्यू पर काम करने वाली संस्था इंटरनेशनल इंस्टिट्यूटन फॉर डेमोक्रेसी ऐंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (IDEA) के मुताबिक, दुनिया में ऐसे देशों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जहां डेमोक्रेसी कमजोर हो रही है। इन देशों में भारत का नाम भी शामिल है। भारत के बारे में कहा गया है कि यहां सरकारी नीतियों की आलोचना करने वालों को दबाया जाता है।

ब्राजील और अमेरिका का भी जिक्र
रिपोर्ट में ब्राजील, भारत और अमेरिका जैसे देशों को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसके मुताबिक- ब्राजील और अमेरिका के राष्ट्रपतियों ने ही देश में चुनावी नतीजों पर सवाल उठाए, जबकि भारत में सरकार की नीतियों की आलोचना करने वालों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

भारत सरकार की नीतियों की आलोचना करने वालों को प्रताड़ित किया जा रहा है।
भारत सरकार की नीतियों की आलोचना करने वालों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

रिपोर्ट में सरकार और न्यायपालिका की आजादी के अलावा मानवाधिकार व मीडिया की आजादी जैसे मूल्यों को भी ध्यान में रखा गया है। 2021 में सबसे ज्यादा नाटकीय बदलाव अफगानिस्तान में देखा गया। यहां पश्चिमी सेनाओं के वापसी से पहले ही तालिबान ने सत्ता पर कब्जा कर लिया। वहीं, म्यांमार में 1 फरवरी 2020 को हुए तख्तापलट ने भी डेमोक्रेसी को नुकसान पहुंचाया।

फेक न्यूज और खराब राजनीति से पहुंचा नुकसान
रिपोर्ट में कहा गया है कि लोक-लुभावन राजनीति और समाज को बांटने के लिए फेक न्यूज के चलन की वजह से भी लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा। IDEA ने यह रिपोर्ट 1975 से 2021 तक के आंकड़ों के आधार पर तैयार की है।

यूरोप के हंगरी, पोलैंड, स्लोवेनिया और सर्बिया में डेमोक्रेसी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। तुर्की ने 2010 से 2020 के बीच डेमोक्रेटिक वैल्यू में सबसे ज्यादा गिरावट दिखी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 70% आबादी ऐसे मुल्कों में रहती है जहां या तो डेमोक्रेसी है ही नहीं या फिर नाटकीय रूप से घट रही है।

अफ्रीकी देशों में हुए सैन्य तख्तापलट

सूडान, गिनी, माली, जिम्बाब्वे और बुरकीना फासो जैसे अफ्रीकी देशों में सरकार को कई बार तख्तापलट का सामना करना पड़ा। वहीं, ट्यूनीशिया में राष्ट्रपति ने संसद भंग कर दिया था

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