• Hindi News
  • National
  • Digital map of the country is being created for the first time with the help of drones

दिल्ली / ड्रोन से पहली बार देश का डिजिटल नक्शा बन रहा, सभी घरों की जियो मैपिंग होगी

प्रतीकात्मक। प्रतीकात्मक।
X
प्रतीकात्मक।प्रतीकात्मक।

  • सर्वे ऑफ इंडिया ने तीन राज्यों से प्रोजेक्ट शुरू किया
  • दो साल में पूरे देश का नक्शा होगा तैयार, 10 सेमी तक की सटीक पहचान मिलेगी

दैनिक भास्कर

Sep 16, 2019, 10:02 AM IST

नई दिल्ली. सर्वे ऑफ इंडिया (एसओआई) पहली बार ड्रोन की मदद से देश का डिजिटल नक्शा बनाने जा रहा है। विज्ञान और तकनीकी विभाग के सहयोग से नक्शा बनाने का काम दो साल में पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए तीन डिजिटल केंद्र बनाए गए हैं, जहां से पूरे देश का भौगोलिक डिजिटल डेटा बनाया जाएगा। सैटेलाइट से नियंत्रित होने वाले जीपीएस सिस्टम की अपेक्षा यह डिजिटल नक्शा ज्यादा सटीक और स्पष्ट होगा।

 

हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसे स्थानों की मैपिंग नहीं की जाएगी, जाे संवेदनशील हैं। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक से हो गई है। इससे जमीन संबंधी जानकारियां और ठिकाने की पतासाजी आसानी से की जा सकेगी। सर्वे ऑफ इंडिया का कहना है कि यह नक्शा 10 सेंटीमीटर तक की सटीक पहचान प्रदान करेगा। अभी हमारे पास 2500 से ज्यादा ग्राउंड कंट्रोल पॉइंट्स हैं। इसी आधार पर मैपिंग की जाती रही है।

 

तत्काल थ्री-डी जानकारी मिलना आसान होगा

यह ग्राउंड कंट्रोल पाॅइंट्स देश के हर 30 से 40 किमी के दायरे में समान रूप से बांटे गए हैं। हालांकि, नई मैंपिंग के लिए हम वर्चुअल सीओआरएस सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। सीओआरएस यानी सतत संचालन संदर्भ स्टेशन। इसके नेटवर्क का उपयोग करते हुए अब जो नक्शे बनाए जा रहे हैं उनसे तत्काल थ्री-डी जानकारी हासिल की जा सकती है। नई तकनीक की मदद से विभाग निर्धारित स्केल पर ही डिजिटल नक्शा उपलब्ध कराएगा।

 

जॉर्ज एवरेस्ट ने 1830 में देश का पहला सटीक नक्शा बनाया था
अभी जो नक्शा मौजूद है उसे ब्रिटिश सर्वेयर कर्नल सर जॉर्ज एवरेस्ट ने 1 मई 1830 को बनाया था। 189 साल पुराने इस सटीक नक्शे के प्रकाशन के बाद इसे नए सिरे से बनाने के लिए सरकार ने कई प्रोजेक्ट शुरू किए थे। 2017 में डाक विभाग ने मैपमायइंडिया के साथ जुड़कर एक पायलट डिजिटल प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसका नाम ई-लोकेशन्स था। इस डिजिटल मैपिंग प्रोग्राम का उद्देश्य लोगों के पते की डिजिटल मैपिंग करना था, जिससे भारत की डाक सेवा ज्यादा सटीक हो और रियल एस्टेट के बारे में पारदर्शिता आए।

 

ये फायदे होंगे: बाढ़ के बाद भी खाली प्लॉट की मैपिंग आसान हो जाएगी
नए ड्रोन मैपिंग सर्वे में सभी घरों की जियो मैपिंग होगी। वास्तविक स्थान को नक्शे पर चिह्नित किया जाएगा। इससे संपत्तियों के टैक्स में सामने आने वाली त्रुटियां खत्म होंगी। टैक्स वसूली बढ़ने से नगर निगम और पालिकाओं को आर्थिक मजबूती मिलेगी। बाढ़ के बाद भी खाली प्लॉट की आसानी के साथ मैपिंग की जा सकेगी। इससे लोगों को राहत मिलेगी।

DBApp

 

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना