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बंगाल / भाजपा प्रदेशाध्यक्ष दिलीप घोष बोले- हमसे मुकाबले के लिए ममता तृणमूल में पूर्व नक्सलियों को शामिल कर रही

पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष। -फाइल फोटो पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष। -फाइल फोटो
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पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष। -फाइल फोटोपश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष। -फाइल फोटो

  • नक्सली समर्थित पीपुल्स कमेटी अगेंस्ट पुलिस एट्रोसिटीज के पूर्व नेता छत्रधर महतो के तृणमूल में शामिल होने की चर्चा
  • भाजपा नेता दिलीप घोष ने कहा- ममता बनर्जी राज्य में भाजपा के बढ़ते जनाधार से डरने लगी हैं

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2020, 12:39 PM IST

सिलीगुड़ी. पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि जंगलमहल इलाके में तृणमूल का जनाधार खिसक रहा है। इसलिए वह पूर्व नक्सलियों की नियुक्ति करके इसे पाने की कोशिश कर रही है। छत्रधर महतो नक्सली समर्थित पीपुल्स कमेटी अगेंस्ट पुलिस एट्रोसिटीज (पीसीएपीए) के पूर्व नेता हैं। वे आदिवासी बहुल जंगलमहल इलाके में लालगढ़ आंदोलन के दौरान सुर्खियों में छाए हुए थे।

घोष ने जलपाईगुड़ी जिले में नागरिकता कानून (सीएए) के समर्थन में रैली को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य में भाजपा के बढ़ते जनाधार से डरने लगी हैं। वे पहले कहा करती थीं कि जंगलमहल मुस्कुरा रहा है। लोकसभा चुनाव में हारने के बाद उन्होंने ऐसा कहना बंद कर दिया।

इस महीने की शुरुआत में छत्रधर महतो रिहा हुए

घोष ने कहा, ‘‘भाजपा की बढ़ती मौजूदगी का मुकाबला करने के लिए तृणमूल पूर्व नक्सली नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी में शामिल कर रही है। मैं एक बात स्पष्ट कर दूं, न तो नक्सली और न ही तृणमूल भाजपा को राज्य में रोक पाएगी।’’ छत्रधर महतो को इस महीने की शुरुआत में ही उनके अच्छे आचरण के बाद बंगाल सरकार ने रिहा किया है। पिछले कुछ महीनों से अटकलें लगाई जा रही थीं कि महतो के रिहा होने के बाद उन्हें तृणमूल में शामिल होने की संभावना है।

महतो पार्टी में शामिल होते हैं तो खुशी होगी: तृणमूल महासचिव

तृणमूल महासचिव पार्थ चटर्जी ने मंगलवार को कहा था- अगर महतो पार्टी में शामिल होते हैं तो उन्हें खुशी होगी। महतो ने इस पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया था। तृणमूल में शामिल होने से पश्चिम बंगाल के आदिवासी जंगलमहल क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण बदल सकता है। इसमें झारग्राम, पश्चिम मिदनापुर, बांकुरा और पुरुलिया आदिवासी जिले शामिल हैं। भाजपा ने पिछले दो सालों में वहां गहरी पकड़ बनाई है। लोकसभा चुनावों में सभी सात सीटें हासिल जीती थीं।

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