पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • National
  • Life Insurance Policy: Do Not Hide Illnesses While Buying Life Insurance Policy

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला:लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते वक्त बीमारी से जुड़ी जानकारी नहीं छिपा सकते, खारिज हो सकता है क्लेम

नई दिल्लीएक महीने पहले

अगर आप लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ले रहे हैं तो यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप बीमा कंपनी को अपनी बीमारी से जुड़ी सभी और सही जानकारियां दें। ऐसा न करने पर बीमा कंपनी की ओर से दावा खारिज किया जा सकता है। ऐसे ही एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसला सुनाया।

जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़, इंदु मल्होत्रा और इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि बीमा का अनुबंध भरोसे पर आधारित होता है। कोई व्यक्ति जीवन बीमा लेना चाहता है तो उसका यह दायित्व है कि वह सभी तथ्यों का खुलासा करे, ताकि बीमा कंपनी सभी जोखिमों पर विचार कर सके।

कोर्ट ने कहा- फॉर्म से बीमा कंपनी जोखिम का अंदाजा लगाती है

कोर्ट ने कहा कि बीमा के लिए भरे जाने वाले फॉर्म में किसी पुरानी बीमारी के बारे में बताने का कॉलम होता है। इससे बीमा कंपनी उस व्यक्ति के बारे में वास्तविक जोखिम का अंदाजा लगाती है। यह टिप्‍पणी करते हुए कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) का एक फैसला खारिज कर दिया।

एनसीडीआरसी ने इस साल मार्च में बीमा कंपनी को मृतक की मां को डेथ क्लेम की पूरी रकम ब्याज सहित देने का आदेश सुनाया था। बीमा कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि कार्यवाही लंबित रहने के दौरान उनकी ओर से क्लेम की पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया है। जजों ने पाया कि मृतक की मां की उम्र 70 साल है और वह मृतक पर ही आश्रित थी। इसलिए उन्होंने आदेश दिया कि बीमा कंपनी इस रकम की रिकवरी नहीं करेगी।

शीर्ष अदालत ने एनसीडीआरसी की आलोचना करते हुए कहा कि जांच के दौरान मिली मेडिकल रिपोर्ट में यह साफ पाया गया कि बीमा कराने वाला पहले से ही गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। इस बारे में बीमा कंपनी को नहीं बताया गया था। जांच के दौरान पता चला था कि उसे हेपेटाइटिस-सी की बीमारी थी।

बीमा कंपनी के पॉलिसी के प्रोपोजल फॉर्म में कॉलम नंबर 22 में पहले से मौजूद बीमारी, इलाज, अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी देनी होती है। बीमा कराने वाले ने जान-बूझकर यह बात छिपाई। इस तथ्य को छुपाने के आधार पर बीमा कंपनी ने मई 2015 में क्लेम रद्द कर दिया था।

इसके बाद नॉमिनी ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम में शिकायत दी थी। इस पर फोरम ने बीमा कंपनी को ब्याज के साथ बीमा राशि चुकाने का आदेश दिया था।

2014 में कराया था बीमा

संबंधित व्यक्ति ने पॉलिसी के लिए अगस्त, 2014 में बीमा कंपनी से संपर्क किया था। इसके फॉर्म में स्वास्थ्य और मेडिकल हिस्ट्री से जुडे़ सवाल थे। इसमें मौजूदा बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने या इलाज के बारे में जानकारी देनी थी। उन्होंने इन सवालों के जवाब नहीं में दिए। इन जवाबों के आधार पर बीमा पॉलिसी जारी कर दी गई। सितंबर, 2014 में, उस व्यक्ति की मौत हो गई। इसके बाद मेडिकल क्लेम के लिए दावा किया गया था।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- रचनात्मक तथा धार्मिक क्रियाकलापों के प्रति रुझान रहेगा। किसी मित्र की मुसीबत के समय में आप उसका सहयोग करेंगे, जिससे आपको आत्मिक खुशी प्राप्त होगी। चुनौतियों को स्वीकार करना आपके लिए उन्नति के...

और पढ़ें