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कोवैक्सिन है सबसे असरदार:ICMR का दावा- डबल म्यूटेंट वैरिएंट कोरोनावायरस को भी खत्म कर देती है कोवैक्सिन, सभी वैरिएंट पर कारगर

नई दिल्ली25 दिन पहले
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इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने मंगलवार को अच्छी खबर दी है। ICMR ने कहा कि कोवैक्सिन डबल म्यूटेंट कोरोना वैरिएंट के खिलाफ भी प्रोटेक्शन देती है। अपनी स्टडी के आधार पर ICMR ने कहा कि ब्राजील वैरिएंट, UK वैरिएंट और दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट पर भी ये वैक्सीन असरदार है और उनके खिलाफ भी यह प्रोटेक्शन देती है।

देश में चल रही सेकंड वेव के लिए इन वैरिएंट्स को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। दरअसल, भारत के 10 राज्यों में सामने आया डबल म्यूटेंट कोरोना वैरिएंट सबसे घातक है। यह न केवल तेजी से ट्रांसमिट होता है, बल्कि बहुत कम समय में बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। वहीं, UK, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट्स भी भारत में बढ़ रहे री-इन्फेक्शन के केसेस में सामने आए हैं।

थर्ड फेज के क्लिनिकल ट्रायल में कोवैक्सिन 78% तक प्रभावी
कोरोना वैक्सीन बनाने वाली हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कोवैक्सिन के तीसरे फेज की अंतरिम क्लिनिकल ट्रायल रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट में भारत में निर्मित कोवैक्सिन को क्लिनिकली 78% और कोरोना से गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों पर 100% तक प्रभावी बताया गया है। कंपनी ने अपने दूसरे विश्लेषण में कोरोना के 87 सिंप्टम्स पर रिसर्च किया था।

बाद में बढ़ते संक्रमण के बाद कंपनी ने तीसरे फेज के लिए 127 लक्षणों पर विश्लेषण किया। इसमें कोवैक्सिन की एफिकेसी 78% तक पाई गई। कंपनी वैक्सीन के अंतिम रिपोर्ट जून में जारी करेगी। तीसरे फेज की स्टडी में 18-98 साल के बीच के 25,800 लोगों को शामिल किया गया, जिसमें 10% 60 साल से अधिक उम्र के लोग शामिल हुए।

क्या हैं इसके मायने?
भारत बायोटेक ने कोवैक्सिन को ट्रेडिशनल प्लेटफॉर्म पर बनाया है। इसमें इनएक्टिवेटेड वायरस को शरीर में इंजेक्ट किया जाता है, जो शरीर में बढ़ता नहीं है पर लड़ने के लिए एंटीबॉडी जरूर तैयार कर देता है। अच्छी बात यह है कि यह पूरे वायरस को निशाना बनाता है, जिससे उसमें होने वाले बदलावों पर भी यह कारगर है। सबसे अच्छी बात यह है कि कोवैक्सिन दुनिया का पहली ऐसी वैक्सीन है, जिसमें सभी वैरिएंट्स से लड़ने की शक्ति है।

महाराष्ट्र- दिल्ली में ट्रिपल म्यूटेंट वैरिएंट बना परेशानी
कोवैक्सिन के बारे में ICMR ने राहत पहुंचाने वाली खबर दी है, तो अब कोरोना का नया वैरिएंट परेशानी बन गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, देश में अब कोरोना का ट्रिपल म्यूटेंट वैरिएंट फैल रहा है। कोरोना के तीन अलग-अलग स्ट्रेन से ये नया वैरिएंट बना है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली, बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में लोग इसी वैरिएंट का शिकार हो रहे हैं।

ट्रायल के नतीजे काफी बेहतर आए थे

स्वदेशी कोवैक्सिन के ट्रायल का नतीजा काफी बेहतर निकला है। फेज-3 के क्लिनिकल ट्रायल्स के आखिरी नतीजे के अनुसार यह वैक्सीन 81% तक असरदार साबित हुई है। सरकार ने जनवरी के पहले हफ्ते में वैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल दिया था। सरकार का यह फैसला विशेषज्ञों के निशाने पर था क्योंकि वे फेज-3 के नतीजे देखे बिना इमरजेंसी अप्रूवल के खिलाफ थे।

हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के साथ मिलकर यह वैक्सीन डेवलप की है। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई मंत्रियों ने हाल ही में कोवैक्सिन के ही डोज लिए हैं। ICMR के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि 8 महीने से भी कम समय में प्रभावी कोरोना वैक्सीन-कोवैक्सिन विकसित की है और यह आत्मनिर्भर भारत की सही तस्वीर पेश करती है।

कोरोना के सभी वैरिएंट्स के खिलाफ कोवैक्सिन कारगर

भारत बायोटेक के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. कृष्णा एल्ला का कहना है कि क्लिनिकल ट्रायल्स के तीनों फेज में 27 हजार वॉलंटियर्स पर वैक्सीन का प्रयोग किया है। फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल्स के नतीजों के साथ यह साबित हो गया है कि कोवैक्सिन कोरोनावायरस के खिलाफ असरदार है। यह वैक्सीन तेजी से सामने आ रहे कोरोनावायरस के अन्य वैरिएंट्स के खिलाफ भी कारगर है।

कोवैक्सिन का वेस्टेज भी कम

कोवैक्सिन या BBV152 एक व्होल वायरॉन इनएक्टिवेटेड SARS-CoV-2 वैक्सीन है। इसे वेरो सेल्स से बनाया गया है। यह 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर स्टेबल रहती है और रेडी-टु-यूज लिक्विड फॉर्मेशन में ट्रांसपोर्ट की जा रही है। मौजूदा वैक्सीन सप्लाई चेन चैनल्स के लिए यह उपयुक्त है। BBV152 के साथ 28 दिन की ओपन वायल पॉलिसी भी है, जो वैक्सीन के वेस्टेज को 10-30% तक कम करती है।

नेजल वैक्सीन भी तैयार कर रहा है भारत बायोटेक

  • भारत में कोवैक्सिन बना रही भारत बायोटेक ने अपनी नेजल वैक्सीन कोरोफ्लू के ट्रायल्स जनवरी में शुरू किए थे। भारत बायोटेक के फाउंडर डॉ. कृष्णा एल्ला के मुताबिक, नेजल वैक्सीन को एक ही बार देना होगा। अब तक हुई रिसर्च में यह बेहतर विकल्प साबित हुई है। इसके लिए कंपनी ने वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के साथ करार किया है।
  • क्लिनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री के मुताबिक चार शहरों में 175 लोगों को यह नेजल वैक्सीन दी गई है। कुछ ही दिनों में इसके फेज-1 ट्रायल्स के नतीजे सामने आने की उम्मीद है। अच्छी बात यह है कि यह नाक में स्प्रे के जरिए दी जाएगी और वायरस के एंट्री पॉइंट्स को ही ब्लॉक कर देगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि नाक के जरिए कोरोना शरीर में एंट्री करता है और हालत बिगाड़ता है, इसलिए नेजल स्प्रे असरदार साबित हो सकती है।

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