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भारत का स्पेस बजट अमेरिका से 13 गुना कम, चार साल में डाटा 99% सस्ता हुआ

6 महीने पहले
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चंद्रयान, मंगलयान और गगनयान भेजने वाले भारत का अंतरिक्ष खर्च अमेरिका, चीन और रूस से कई गुना कम है।
  • अर्थशास्त्री के. सुब्रमण्यन ने फिल्म 'बैंड, बाजा, बारात' का उदाहरण देकर देश में व्यवसाय के मौके गिनाए
  • आर्थिक सर्वेक्षण में अंतरिक्ष कार्यक्रम, डाटा दरों, बैंकों की क्षमता और शिपिंग बेड़े के आंकड़े सामने रखे गए
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नई दिल्ली. चंद्रयान, मंगलयान और गगनयान जैसे बड़े प्रोजेक्ट पर काम करने वाले भारत का रक्षा खर्च अमेरिका के मुकाबले 13 गुना कम है। वहीं, पिछले चार साल में मोबाइल डाटा दरों में 99% की कमी आई है। ये आंकड़े शुक्रवार को संसद में पेश हुए 2019-20 के आर्थिक सर्वेक्षण में सामने आए, जो अर्थशास्त्री कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने पेश किया। सर्वे के मुताबिक, 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए बैंकों की क्षमता में सुधार जरूरी है।


सुब्रमण्यन ने कहा- देश में माल ढुलाई करने वाले जहाजों का बेड़ा बूढ़ा हो रहा है। कुल 1,419 जहाजों के बेड़े में 42% जहाज 21 साल या इससे ज्यादा पुराने हैं। विकासशील देशों में सबसे बड़ा मर्चेंट शिपिंग बेड़ा होने के बाद भी दुनिया की कुल माल ढुलाई में 0.9% हिस्सा होना चिंता की बात है। 

स्पेस प्रोग्राम पर अमेरिका से 13 गुना कम खर्च
उन्होंने कहा- फिल्म 'बैंड, बाजा, बारात' का उदाहरण देते हुए कहा कि देश भर में व्यवसाय के मौके उपलब्ध हैं। केवल नई सोच के साथ शुरुआत करने की जरूरत है। सर्वे में एक तथ्य यह भी सामने आया कि गांव के छात्र किताबों, स्टेशनरी और यूनिफॉर्म पर शहरी छात्रों की तुलना में 10% ज्यादा खर्च करते हैं। उन्होंने बताया कि 2018 में सरकार ने अंतरिक्ष कार्यक्रम पर 10708 करोड़ रुपए (1.5 बिलियन डॉलर) खर्च किए। ये 2018 में अमेरिका के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर किए गए खर्च से 13 गुना कम है। अमेरिका ने इस दौरान 1,42,066 करोड़ रुपए खर्च किए।

भारत दुनिया में सबसे सस्ता डाटा उपलब्ध कराने वाला देश बना
पिछले 4 साल में देश में डाटा दरें 99% कम हुई हैं। 2016 से 2019 के बीच दरों में लगातार कमी से भारत दुनिया में सबसे सस्ता डाटा उपलब्ध कराने वाला देश बना है। सर्वे के मुताबिक, डाटा दरें 2016 में 200 रुपए प्रति गीगाबाइट (जीबी) से घटकर 2019 में 7.7 रुपए प्रति जीबी पर आईं। 2016 में जियो की लॉन्चिंग के बाद टेलीकॉम ऑपरेटरों के बीच प्रतिस्पर्धा के चलते इस सेक्टर पर दबाव बढ़ा है। कुछ ऑपरेटरों ने दिवालिया प्रक्रिया के लिए आवेदन किया तो कुछ ने अस्तित्व बचाए रखने के लिए आपस में विलय किया।

अर्थव्यवस्था के सामने बैंकें बौनीं
आर्थिक सर्वे में कहा गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार के सामने बैंकों की स्थिति बौनी है। सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों को ज्यादा सक्षम बनना चाहिए। 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए बैंकों को कर्ज देने में सख्ती बरतने के बजाय आर्थिक विकास में मददगार बनना चाहिए। आर्थिक सर्वेक्षण में सार्वजनिक क्षेत्रों की बैंकों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उनके आर्थिक विकास में सहयोगी बनने पर जोर दिया गया।

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