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कांग्रेस / अध्यक्ष की दौड़ में भारी पड़े अनुभवी बुजुर्ग, युवा चेहरे को कमान सौंपे जाने की कोशिशें नाकाम



Efforts to make the young leader Congress President in the CVC meeting could not succeed
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Efforts to make the young leader Congress President in the CVC meeting could not succeed

  • ज्योतिरादित्य सिंधिया या सचिन पायलट में से किसी एक को पार्टी की कमान देने के लिए युवाओं ने की थी कोशिश, पर नाकाम हुए
  • सीवीसी की बैठक में सीनियर्स ने सोनिया गांधी को पार्टी का नया अध्यक्ष चुन लिया
  • कांग्रेस के भीतर ही माना जा रहा है कि बुजुर्गों की रणनीति सफल रही, वहीं युवा पूरी तरह मात खा गए

Dainik Bhaskar

Aug 11, 2019, 01:38 PM IST

जयपुर/दिल्ली. कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में अध्यक्ष पद की दौड़ में शनिवार मैराथन बैठकों के बाद युवा नेताओं पर अनुभवी बुजुर्ग भारी पड़े। युवा नेताओं में दो-तीन के नाम पर खासी लॉबिंग भी हुई। नाम भी आगे बढ़े। दूसरी तरफ सीनियर नेताओं में मुकुल वासनिक, मल्लिकार्जुन खड़गे, अशोक गहलोत, सुशील कुमार शिंदे जैसे कई नाम भी अध्यक्ष के लिए आगे बढ़ा दिए गए। लेकिन लंबी मंत्रणा के बाद भी गांधी परिवार के बाहर किसी युवा या बुजुर्ग पर सहमति ही नहीं बन पाई। ऐसे में सीनियर्स ने फिर से सोनिया गांधी का नाम आगे कर दिया।

 

इसे सीधे तौर पर कांग्रेस के भीतर ही यह माना जा रहा है कि इससे बुजुर्गों की रणनीति जहां सफल रही, वहीं युवा पूरी तरह मात खा गए। सबसे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने किसी युवा नेता को पार्टी काा अध्यक्ष बनाए जाने की पैरवी की थी। उसके बाद महाराष्ट्र के मिलिंद देवड़ा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया या सचिन पायलट में से किसी एक को पार्टी का अध्यक्ष बनाने के लिए बयान दिया था।

 

सीनियर नेताओं ने गांधी परिवार से ही अध्यक्ष बनने की वकालत की

दीपेंद्र सिंह हुड्डा, आरपीएन सिंह जैसे नेता भी युवाओं को अध्यक्ष बनाने की पैरवी की, लेकिन पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेताओं को राहुल गांधी के अलावा कोई दूसरा युवा नेता स्वीकार नहीं था। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, गुलाम नबी आजाद सहित तमाम सीनियर नेता गांधी परिवार में से ही किसी को अध्यक्ष बनाने की वकालत कर रहे थे, जिससे पार्टी पर नियंत्रण बना रहे।

 

गांधी परिवार से बाहर पर नहीं बनी एकराय

हालांकि सीनियर नेताओं में मुकुल वासनिक अध्यक्ष की दौड़ में सबसे आगे चल रहे थे। खड़गे और शिंदे के नामों पर भी विचार हुआ, लेकिन पांच सब ग्रुपों की मैराथन बैठकों के बावजूद किसी गांधी परिवार से बाहर के नाम पर एकराय नहीं बनी। लिहाजा कांग्रेस के सीनियर नेताओं ने फिर से सोनिया गांधी पर भरोसा जता पार्टी की कमान उनको सौंपने का प्रस्ताव रख दिया। जिसे सभी ने हाथोहाथ स्वीकार भी कर लिया। इससे माना जा रहा है कि युवाओं की रणनीति अनुभव के आगे टिक ही नहीं पाई।
 
अध्यक्ष के लिए राजस्थान से दो नाम सुर्खियों में रहे 
राहुल गांधी के इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए राजस्थान से दो नाम सबसे अधिक सुर्खियों में रहे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का नाम अध्यक्ष पद के लिए प्रमुखता से लिया गया, लेकिन अलग-अलग कारणों से प्रदेश के दोनों ही अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हो गए। ऐसे में अब आने वाले समय में दोनों ही नेता राष्ट्रीय के बजाय प्रदेश स्तर पर ही अपनी सेवाएं देंगे।

 

कांग्रेस ने कहा- सोनिया के नेतृत्व पर विश्वास 
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा- सोनिया गांधी के नेतृत्व पर मुझे पूरा विश्वास है। सभी कांग्रेसी सोनिया गांधी के नेतृत्व में समर्पण के साथ काम करेंगे। राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा- पार्टी की ओर से सोनिया गांधी को फिर से कमान देने का स्वागत करता हूं। हम पार्टी को एक बार फिर नई बुलंदियों तक पहुंचाएंगे।

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