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इलेक्टोरल बॉन्‍ड की बिक्री पर रोक नहीं:5 राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार को राहत; सुप्रीम कोर्ट ने बॉन्ड पर रोक लगाने संबंधी याचिका खारिज की

नई दिल्ली4 महीने पहले
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) नाम के एक NGO ने सुप्रीम कोर्ट से एक अप्रैल से इलेक्टोरल बॉन्ड की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने शुक्रवार को इलेक्टोरल बॉन्ड की बिक्री पर रोक लगाने संबंधी याचिका खारिज कर दी। याचिका के जरिए कोर्ट से एक अप्रैल से इन बॉन्ड्स की ब्रिक्री पर रोक लगाने की गुहार लगाई गई थी। इससे पहले कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए बॉन्‍ड के दुरुपयोग को लेकर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था।

दुरुपयोग रोकने के लिए पर्याप्त उपाय मौजूद
कोर्ट ने कहा कि 2018 से इलेक्ट्रोल बॉन्ड की स्कीम लागू है। इसके बाद 2018, 2019 और 2020 में भी इसकी बिक्री होती रही। फिलहाल इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय मौजूद हैं, इसलिए इस पर रोक लगाने का कोई औचित्य नजर नहीं आता।

चुनाव आयोग को बॉन्ड से आपत्ति नहीं
इससे पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वह चुनावी बॉन्ड योजना का समर्थन करता है क्योंकि अगर ये नहीं होगा तो राजनीतिक पार्टियों को चंदा कैश में मिलेगा। हालांकि वह चुनावी बॉन्ड योजना में और पारदर्शिता चाहता है।

एक NGO ने लगाई थी याचिका
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इलेक्टोरल बॉन्ड की ब्रिक्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने याचिका दायर की थी। बॉन्ड को लेकर कोर्ट में आवेदन दिया गया था। इस पर 1 अप्रैल से जारी होने वाले इलेक्टोरल बॉन्ड पर तत्काल प्रभाव से रोक की मांग की गई थी।

ADR की तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि यह बॉन्ड का गलत उपयोग है। इसका उपयोग शेल कंपनियां कालेधन को सफेद बनाने में कर रही हैं। बॉन्ड कौन खरीद रहा है, इसकी जानकारी सिर्फ सरकार को होती है। चुनाव आयोग तक इससे जुड़ी कोई जानकारी नहीं ले सकता है। उन्होंने कहा कि यह एक तरह की करेंसी है। इसे करीबन 7 हजार से ज्यादा खरीदा जा चुका है। ये राजनीतिक दल को रिश्वत देने का एक तरीका है।

इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा था कि हमेशा ये रिश्वत का चंदा सत्ताधारी दल को ही नहीं, बल्कि उस दल को भी मिलता है, जिसके अगली बार सत्ता में आने के आसार प्रबल रहते हैं।

इलेक्टोरल बॉन्ड क्या है?
2017 के बजट में उस वक्त के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को पेश किया था। 29 जनवरी 2018 को केंद्र सरकार ने इसे नोटिफाई किया। ये एक तरह का प्रोमिसरी नोट होता है। जिसे बैंक नोट भी कहते हैं। इसे कोई भी भारतीय नागरिक या कंपनी खरीद सकती है। अगर आप इसे खरीदना चाहते हैं तो आपको ये स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चुनी हुई ब्रांच में मिल जाएगा। इसे खरीदने वाला इस बॉन्ड को अपनी पसंद की पार्टी को डोनेट कर सकता है। बस वो पार्टी इसके लिए एलिजिबल होनी चाहिए।

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