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विवेकानंद जयंती विशेष / 90% युवाओं की पसंद अरेंज मैरिज, 78% युवा धार्मिक

Dainik Bhaskar

Jan 12, 2019, 12:45 PM IST


Even today 90% likes Arrange Marriage, 78% Religious
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Even today 90% likes Arrange Marriage, 78% Religious

  • स्वामी विवेकानंद की जयंती पर आज भास्कर ने  सरकारी आंकड़ों और कई सर्वे की स्टडी की
  • 49% टीवी पर धार्मिक सीरियल देखते हैं। 46% नियमित उपवास रखते हैं
  • 31% करते हैं नियमित व्यायाम, 36% के मोबाइल में फिटनेस एप

नई दिल्ली. देश की आबादी के करीब 35% लोग युवा हैं। इसलिए युवा दिवस के रूप में मनाई जाने वाली स्वामी विवेकानंद की जयंती पर आज भास्कर ने तमाम सरकारी आंकड़ों और कई सर्वे की स्टडी की। हमने जाना कि आखिर देश का युवा क्या पाना चाहता है और कितना खुश है।

 

हमने पाया 80% युवाओं की प्राथमिकता संपत्ति पाना है। जबकि 90% आज भी अरेंज मैरिज कर रहे हैं। दूसरी तरफ वह धार्मिक और जीवन मूल्यों की कद्र करने वाला युवा भी है। 30% युवाओं के लिए ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण है। 25% अपनी मेहनत से सबकुछ हासिल करना चाहते हैं।

प्राथमिकताएं : संपत्ति, प्रसिद्धि, सेहत सबसे जरूरी

  1. सीएसडीएस के सर्वे के अनुसार 66% युवा रिलेशनशिप और प्रसिद्धि को जीवन का दूसरा बड़ा लक्ष्य मानते हैं। जबकि 65 फीसदी ने स्वास्थ्य को तीसरा बड़ा लक्ष्य माना है। 63 प्रतिशत युवाअों नेे पर्सनल ग्रोथ को जीवन का चौथा सबसे बड़ा लक्ष्य माना है। 60 फीसदी युवाओं ने इमेज काे अपना पांचवां लक्ष्य माना है।

     

    • हेल्थ: आज 36 प्रतिशत युवाओं के मोबाइल में फिटनेस एप हैं। 2006 के सर्वेक्षण में 15 फीसदी युवा एेसे मिले थे, जो स्पोर्ट्स एक्टिविटी में शामिल होते थे पर 2016 में हुए सर्वेक्षण में एेसे युवाओं की संख्या 35 फीसदी सामने आई है। 31 फीसदी युवा नियमित रूप से व्यायाम भी करते हैं।
    • प्रोफेशन: देश के 65% युवा सरकारी नौकरी करना चाहते हैं। सिर्फ 19% व्यवसाय और 7% ही प्राइवेट नौकरी को सरकारी से बेहतर मानते हैं। 33% मानते हैं कि उन्हें स्थायी नौकरी चाहिए, भले ही वेतन थोड़ा कम क्यों न हो। देश के 18% युवा खेती-किसानी से जुड़े हैं। आश्चर्य की बात है कि 2006 में यह आंकड़ा 4% प्रतिशत कम यानी 14 प्रतिशत था। हालांकि इनमें हर पांच में से दो दूसरे के खेतों में मजदूरी कर रहे हैं।
    • फूड/ फैशन: देश का 58% युवा नॉन वेजीटेरियन है। 30% युवा जो नियमित रूप से रेस्तरां, होटल या कैफे जाते हैं। युवा अपनी इंक्रिमेंटल इनकम यानी उसकी आय में जो भी बढ़ोतरी होती है उसका सबसे बड़ा 32.7% हिस्सा बाहर जाकर खाने और एंटरटेनमेंट पर खर्च कर रहा है। 21.4% हिस्सा कपड़ों और ऐसेसरीज़ में लगा देता है, सिर्फ 10% हिस्सा ही वह सेविंग में लगा रहा है। 61 फीसदी युवाआें में स्टाइलिश कपड़ों के प्रति दीवानगी है। 58 फीसदी स्टाइलिश जूते पहनना पसंद करते हैं। 18 से 21 साल के युवा स्टाइल पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

  2. व्यस्तताएं : टीवी देखने में सबसे आगे हैं युवा

    28% नियमित रूप से शॉपिंग माॅल जाते हैं। 33% युवा हर हफ्ते या कम से कम हर महीने फिल्म देखने सिनेमाहाॅल जाते हैैं। 23% युवा रोज करीब आठ घंटे का समय स्मार्ट फोन को देते हैं। भारतीय युवा मीडिया यूज़ेस के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल 25% तक कर रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह मनोरंजन के परंपरागत साधन टीवी से दूर हो गया है। टीवी देखने वालों में सबसे ज्यादा 33% हिस्सेदारी 15 से 30 साल आयु वर्ग के युवा की है। 32% हिस्सेदारी 31 से 55 वर्ष के आयुवर्ग और 20 फीसदी हिस्सेदारी बच्चों की है।

     

    देश में डिजिटल ऑडियंस : मार्च 2018 में ओटीटी जैसे प्लेटफॉर्म पर 27.33 करोड़ यूनिक विजिटर्स आए। इसमें से 92% ने मोबाइल से इन प्लेटफॉर्म को एक्सेस किया। 15 से 24 साल के आयु वर्ग के यूनिक विजिटर्स की संख्या 10.56 करोड़ थी। 25 से 34 साल आयु वर्ग के यूनिक विजिटर्स की संख्या 8.461 करोड़ थी।

     

    • स्मार्टफोन यूज़: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और इंडियन काउंसिल फाॅर सोशल साइंस रिसर्च की 20 ज्यादा सेंट्रल यूनिवर्सिटिज में  की एक स्टडी में 63 फीसदी छात्रों ने कहा कि वे रोज 4 से 7 घंटे स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रहे हैं। 23 प्रतिशत ने कहा कि रोज करीब 8 घंटे स्मार्टफोन को दे रहे हैं। सिर्फ 14 प्रतिशत ने कहा कि 3 या इससे कम घंटे स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हुए जा रहे हैं।
    • सेविंग्स: 91% युवा अपने आर्थिक व वित्तीय फैसले खुद कर रहे हंै। 56% युवा म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना पसंद कर रहे हैं। 57% फिक्स डिपॉजिट में लगा रहे हैं। 36% ने कहा कि वे प्रोविडेंट फंड और पब्लिक प्रॉविडेंट फंड में पैसा लगा रहे हैं।

  3. सोच-समझ : 90% अरेंज मैरिज कर रहे हैं

    90% युवा देश में आज भी अरेंज मैरिज कर रहा है।लोक फाउंडेशन-ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सर्वे के अनुसार 3% युवा ही लव मैरिज कर रहे हैं। 41% युवाओं का यह भी मानना है कि शादी के बाद पत्नी का नौकरी करना उचित नहीं है। हर तीन में एक युवती भी इस बात के पक्ष में है। सुप्रीम कोर्ट ने भले ही देश में समलैंगिकता को मान्यता दे दी हो, लेकिन देश के 61% युवा इसे गलत मानते हैं। 14% एेसे हैं, जिन्हें एेसे रिश्तों पर जरा भी एेतराज नहीं है। 36% एेसे भी हैं जो अब भी अंतरजातीय विवाह को गलत मानते हैं। 

    • 67% युवा बिना शादी साथ रहने यानी लिव इन रिलेशनशिप का भी विरोध करते हैं।
    • 53% शादी से पहले डेटिंग और 40 फीसदी वेलेंनटाइन्स-डे का विरोध करते हैं।
    • 51%युवाओं का कहना है कि पत्नी को पति की बात माननी ही चाहिए।

     

    शादी जरूरी है यह मानने वाले युवाओं की संख्या 10 साल में काफी हद तक घटी है। 2007 में हुए सर्वेक्षण में 80% ने इंसान के लिए विवाह जरूरी माना था। 2016 के सर्वे में एेसा मानने वाले 52% थे। एक दशक में शादीशुदा वयस्कों की संख्या 8% तक घट गई है।

     

    • राजनीति: 46% यानी युवाओं की लगभग आधी आबादी को देश की राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है। एेसे में सिर्फ 7% ही हैं, जो राजनीति पर पैनी नजर रखते हैं। हैरानी की बात यह है कि मैट्रो सिटीज और बड़े शहरों में युवा राजनीति से ज्यादा कटे हुए हैं। यहां 53% नहीं जानना चाहते देश के नेता क्या कर रहे हैं। 
    • जीवन मूल्य: 25% हनत से अपने लिए सब कुछ हासिल करना चाहते हैं देश के 30 प्रतिशत युवा ईमानदारी काे सबसे बड़ा जीवन मूल्य मानते हैं। 28 फीसदी परिवार की मदद करना चाहते हैं। जबकि 5 प्रतिशत युवा अपने दायरे से बाहर निकलकर दुनिया देखना चाहते हैं।
    • धर्म: यह धारणा सही नहीं है कि अाधुनिकता बढ़ने के साथ-साथ युवाओं की धार्मिक प्रवृत्ति घट रही है। अध्ययन बताता है कि देश के 78% युवा रोजाना या कुछ दिनों के अंतराल में पूजा-पाठ करते हैं। 68% कहते हैं कि वे अक्सर पूजा स्थल पर जाते हैं। 49% टीवी पर भी धार्मिक सीरियल देखते हैं। 46 फीसदी युवा एेसे भी हैं, जो नियमित रूप से या किसी खास अवसर पर उपवास रखते हैं। 39% ने कहते हैं कि कि वे कभी-कभी धार्मिक किताबें पढ़ते हैं।  

    • खुशी: ग्लोबल सिटीजनशिप सर्वे के अनुसार देश के युवाओं में कुल 80% युवा खुश हैं। इसमें से 29% बहुत खुश हैं। इसके उलट दुनिया के 68% युवा ही खुश हैं। सबसे कम खुश युवा जापान में हैं। यहां सिर्फ 45% ही खुश हैं।

     

    भारत में सिर्फ 8 प्रतिशत युवा खुश नहीं है। इसमें से 5%ने कहा कि वे नाखुश हैं जबकि 3% ने कहा कि वे बहुत नाखुश हैं। जबकि दुनियाभर में औसत 9% युवा खुश नहीं है। भारत में युवाओं की सबसे बड़ी चिंता पैसों की कमी है। देश के 46 फीसदी युवाओं ने कहा कि वे इसे लेकर बहुत परेशान हैं। जबकि दुनियाभर के 51 फीसदी युवा धन को लेकर चिंतित हैं।

     

    देश के 49% युवा मानते हैं कि दुनिया बेहतर हो रही है। सिर्फ 18% मानते हैं कि दुनिया में हालात और खराब हो रहे हैं।

    (कंटेंट स्रोत: सीएसडीएस, लोक फाउंडेशन-ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी सर्वे। बैंक बाजार एस्पिरेशन इंडेक्स 2018 डिकोडिंग इंडियन मिलेनियल्स। ग्लोबल सिटिजन शिप सर्वे, वारकी फाउंडेशन की रिपोर्ट। इप्सॉस सर्वे। गेलप सर्वे। ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल की रिपोर्ट। अलीगढ़ मुस्लिम विवि का सर्वे। फिटनेस एप जिमपिक की स्टडी।)

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