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गणेश चतुर्थी विशेष /गणेश अनादि हैं, वे दुनियाभर में 5000 साल पहले से ही पूजे जा रहे हैं



Ganesh Chaturthi Special 2019: Ganesh Anadi Hai! Oldest Lord Ganesha Idol In China, Afghanistan, Iran, and Mexico
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Ganesh Chaturthi Special 2019: Ganesh Anadi Hai! Oldest Lord Ganesha Idol In China, Afghanistan, Iran, and Mexico
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  • प्रथम पूज्य गणपति की सदियों पुरानी प्रतिमा ईरान, अफगानिस्तान, इंडोनेशिया में भी मिली हैं...
  • अंतरराष्ट्रीय आदि देव हैं गणेश, सिंधु घाटी से लेकर माया संस्कृति तक में गणेश पूजा के प्रमाण

Dainik Bhaskar

Sep 02, 2019, 02:46 PM IST

नई दिल्ली/भोपाल. गणेश अनादि हैं। इतिहास में भी इसके साक्ष्य हैं। उनकी पूजा के प्रमाण आज से 5000 साल पहले से मिलने लगते हैं। वे अलग-अलग रूपों में विभिन्न संस्कृतियों में हैं। जापान में उन्हें कांगीतेन कहा जाता है। चीन, अफगानिस्तान, ईरान, और मैक्सिको की माया संस्कृति तक में उनकी मूर्तियां मिली हैं।

  • ईरान में 3200 साल पुरानी गणेश प्रतिमा मिली

    ईरान में 3200 साल पुरानी गणेश प्रतिमा मिली

    माइथोलॉजी और सिम्बॉलिज्म के विशेषज्ञ लायर्ड स्क्रैन्टन की किताब 'प्वाइंट ऑफ ओरिजनः गोओबलकी टिपे एंड स्पिरिचुयल मैट्रिक्स फॉर द वर्ल्ड कॉस्मोलॉजी' के अनुसार ईसा पूर्व 3000 में गणेश पूजा का उल्लेख मिलने लगता है। सिंधु घाटी और हड़प्पा सभ्यता में भी गणेश प्रतिमा मिली थी। वहीं ईरान के लोरिस्तान में 1200 साल ईसा पूर्व की गणेश प्रतिमा मिली है। 

  • अफगान में भी गणेशजी प्रतिमा स्थापित की गई थी

    अफगान में भी गणेशजी प्रतिमा स्थापित की गई थी

    राबर्ट ब्राउन की किताब 'गणेशः स्टडीज ऑफ एन एशियन गॉड' के मुताबिक अफगानिस्तान के उत्तरी काबुल में गणेश की एक प्रतिमा चौथी सदी की मिली है। वहीं, पख्तिया प्रांत के गार्देज शहर में एक प्रतिमा 5वीं सदी की पाई गई। संगमरमर की इस मूर्ति पर दर्ज है- 'ये मनमोहक प्रतिमा महाविनायक की है, जिसे शाही राजा खिंगाल ने स्थापित कराया था।' 

  • चीन और जापान में गणेश पेंटिंग मिलीं

    चीन और जापान में गणेश पेंटिंग मिलीं

    चीन के मोगाओ गुफा में भी गणेश की छठी शताब्दी की पेटिंग मिलती है। यह बौद्ध गुफा है। इसमें बौद्ध धर्म से संबंधित हजारों चित्र हैं। इस गुफा के 25 किमी के दायरे में 492 मंदिर हैं। माना जाता है कि बौद्ध धर्म ने ही यहां गणेश पूजा शुरू की। चीन से ही गणपति जापान भी पहुंचे। यही वजह है कि जापान में 1200 साल पुरानी गणेश प्रतिमा और चित्र मिले हैं। 

  • गणेश के आठ अवतार

    गणेश के आठ अवतार

    गणेश पुराण में गणेश के आठ अवतार बताए गए हैं। ये अवतार प्रतीकात्मक हैं, जिनमें वे मानव मन की मोह, ममता, क्रोध जैसी आठ कमियों पर विजय पाने की प्रेरणा देते हैं। इनमें गणेशजी के मूषक के अलावा शेर, माेर और शेषनाग सहित चार वाहन बताए गए हैं। यानी जमीन, आकाश और पानी तीनों में चलने वाले वाहन।

  • गणेशजी के वाहनों में चलने, उड़ने और तैरने वाले तीनों साधन

    गणेशजी के वाहनों में चलने, उड़ने और तैरने वाले तीनों साधन

    मूषक और शेर चलने वाले वाहन : पांच अवतारों में गणेशजी का वाहन मूषक है। गजाननावतार में वे लोभासुर, स्कंदावतार में मदासुर, महोदरावतार में मोहासुर, लंबोदरावतार में क्रोधासुर और धूम्रवर्णावतार में वे अभिमान असुर का वध करते हैं। वक्रतुंडावतार में वाहन शेर हैं। वे मत्सरासुर का वध करते हैं।

  • उड़ने वाला मयूर वाहन

    उड़ने वाला मयूर वाहन

    विकटावतार में गणेशजी का वाहन मयूर पक्षी है। इस अवतार में वे कामासुर नाम के राक्षस का वध करते हैं।

  • तैरने वाला शेषनाग वाहन

    तैरने वाला शेषनाग वाहन

    गणपति के विघ्नराज अवतार में वाहन शेषनाग है। इस अवतार में गणपति ममतासुर राक्षस का वध करते हैं।

  • तमिल में गणेश पिल्लै हैं, तेलुगु में विनायाकुडू

    • तमिल में गणेशजी को विनायागार और पिल्लै भी कहा जाता है। तेलुगु में उनका नाम विनायाकुडू है। 
    • बरमा में उन्हें पाली महा विनायक, थाइलैंड में फरा फिकानेत कहते हैं। 
    • गणेशजी की पूजा बौद्ध धर्म में भी होती है। गणेश पुराण के अनुसार इंसान के शरीर का मूलाधार चक्र गणेश कहलाता है। 
    • शिव महापुराण के अनुसार गणेशजी का रंग हरा और लाल है।

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