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12 PHOTOS में दिल्ली की राख हुई बिल्डिंग:दीवारों से खौलता पानी रिस रहा, परिजन बिलख रहे; 27 मृतकों में से सिर्फ 7 की हुई पहचान

नई दिल्ली14 दिन पहले

दिल्ली में शुक्रवार को मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास तीन मंजिला कॉमर्शियल बिल्डिंग में आग लग गई। हादसे में 27 लोगों की जलकर मौत हो गई। इनमें से सिर्फ 7 लोगों की पहचान हो पाई है। बाकी 20 मृतकों की पहचान DNA टेस्ट से होगी।

इमारत में आग अभी भी धधक रही है। पहली मंजिल पर धुएं से दम घुट रहा है, दीवारों से खौलता पानी रिस रहा है और लोहे के दरवाजे चूल्हे पर चढ़े तवे से भी ज्यादा गर्म हैं। फ्लोर पर फैली तपिश शरीर के अंदर तक महसूस हो रही है। चारों तरफ राख के ढेर हैं और ढेर से धुआं उठ रहा है। फ्लोर के कोने में अभी भी आग सुलग रही है।’

PHOTOS में देखें वहां का भयानक मंजर........

फायर बिग्रेड का स्टाफ तपिश की वजह से करीब 5 घंटे के बाद अंदर जा पाया। हर जगह आग और धुंआ था।
फायर बिग्रेड का स्टाफ तपिश की वजह से करीब 5 घंटे के बाद अंदर जा पाया। हर जगह आग और धुंआ था।
रेस्क्यू टीम को जले सामानों को हटाकर लापता जिंदगियां को खोजने को बहुत मशक्कत करनी पड़ी।
रेस्क्यू टीम को जले सामानों को हटाकर लापता जिंदगियां को खोजने को बहुत मशक्कत करनी पड़ी।
ये महिला आग से बच तो गई, लेकिन हाथ बुरी तरह झुलस गए।
ये महिला आग से बच तो गई, लेकिन हाथ बुरी तरह झुलस गए।
कई महिलाओं को सीढ़ी से रेस्क्यू किया गया। इनमें से कई को चोटें लगी हैं।
कई महिलाओं को सीढ़ी से रेस्क्यू किया गया। इनमें से कई को चोटें लगी हैं।
एक महिला तो तार के सहारे नीचे कूद गई।
एक महिला तो तार के सहारे नीचे कूद गई।
अभी भी 29 लोग लापता हैं। उनके परिजन बिल्डिंग के बाहर इंतजार कर रहे हैं। कुछ का रो-रोकर बुरा हाल है।
अभी भी 29 लोग लापता हैं। उनके परिजन बिल्डिंग के बाहर इंतजार कर रहे हैं। कुछ का रो-रोकर बुरा हाल है।

अब पढ़िए, ग्राउंड रिपोर्ट......

13 मई को शाम करीब 4.30 बजे बिल्डिंग में आग लगना शुरू हुई और जल्द ही आग ने पूरी इमारत को गिरफ्त में ले लिया। रात 10 बजे के बाद ही आग पर काबू पाया जा सकता है। दैनिक भास्कर की टीम रात 3.30 बजे उसी चार मंजिला इमारत में दाखिल हुई।

मेन गेट इतना संकरा कि एक ही व्यक्ति निकल पाए
बिल्डिंग का मुख्य दरवाजा दाईं ओर की गली से होकर जाता है। मेन गेट की एंट्री इतनी संकरी है कि एक बार में एक ही व्यक्ति या तो अंदर जा सकता है या बाहर आ सकता है। जब हम बिल्डिंग में अंदर दाखिल हो रहे थे तो चारों तरफ कांच ही कांच बिखरा पड़ा था। मेन गेट के अंदर घुसते हुए ही दाईं तरफ लिफ्ट थी और सामने सीढ़ियां जो ऊपर के फ्लोर की तरफ जा रही थीं। सीढ़ियों की चौड़ाई करीब 3 फुट ही है।

तीन मंजिला इस बिल्डिंग का मेन गेट इतना संकरा है कि एक बार में एक ही आदमी निकल सकता है।
तीन मंजिला इस बिल्डिंग का मेन गेट इतना संकरा है कि एक बार में एक ही आदमी निकल सकता है।
इमारत के अंदर फायर ब्रिगेड से छिड़का हुआ पानी था, लेकिन आग की गर्मी से वह भी उबल रहा था।
इमारत के अंदर फायर ब्रिगेड से छिड़का हुआ पानी था, लेकिन आग की गर्मी से वह भी उबल रहा था।

फायर सेफ्टी का इमारत में नहीं दिखा कोई इंतजाम
पूरी इमारत में हमने दरवाजों के आसपास और सीलिंग पर फायर फाइटिंग उपकरणों को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन ना ही कोई फायर एस्टिंगुशर मिला, ना ही कोई हाइड्रेंड मिला। सीलिंग पर कोई लाल रंग के पाइप नहीं थे, जिससे आपातकालीन स्थिति में आग बुझाई जा सके।

आग बुझाए जाने के बाद इमारत का केवल ढांचा रह गया, अंदर का सारा सामान जलकर राख हो चुका था।
आग बुझाए जाने के बाद इमारत का केवल ढांचा रह गया, अंदर का सारा सामान जलकर राख हो चुका था।

जैसे-जैसे हम इमारत में ऊपर की तरफ बढ़ रहे थे तपिश बढ़ती जा रही थी। फायर टेंडर ने जो पानी की बौछारें इमारत पर बरसाई थीं, वो पानी गर्म होकर जगह-जगह से टपक रहा था। बिल्डिंग में सिर्फ मेन स्ट्रक्टर के पिलर ही दिख रहे थे और बाकी का सारा सामान टेबल, कुर्सियां, काजगात सब कुछ राख हो चुका था। राख में से तब भी धुआं उठ रहा था।

बिल्डिंग का सारा सामान टेबल, कुर्सियां, काजगात सब कुछ राख हो चुका है।
बिल्डिंग का सारा सामान टेबल, कुर्सियां, काजगात सब कुछ राख हो चुका है।

जिस बिल्डिंग में आग लगी, वहां कई कंपनियों के ऑफिस थे। यहां से करीब 150 लोगों को रेस्क्यू किया गया। 100 लोगों की टीम इसके लिए तैनात की गई। दिल्ली पुलिस ने घटनास्थल से संजय गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया, ताकि घायलों को तेजी से अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।

यह तीन मंजिला कॉमर्शियल बिल्डिंग थी। यहां कई कंपनियों के ऑफिस थे।
यह तीन मंजिला कॉमर्शियल बिल्डिंग थी। यहां कई कंपनियों के ऑफिस थे।

दिल्ली पुलिस के एडिशनल CP वेस्ट समीर शर्मा ने भास्कर को बताया कि ‘अब तक इस मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी की गई है। हमने बिल्डिंग ऑपरेट करने वालों से डॉक्यूमेंट की मांग की है, हमें पता चला है कि इस बिल्डिंग में 80-100 लोग काम किया करते हैं। हमारी जांच जारी है और हम जल्द ही और गिरफ्तारियां करेंगे।’

शॉट सर्किट माना जा रहा आग का कारण
इमारत की पहली मंजिल पर CCTV की फैक्ट्री और गोदाम है। यहां शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने भीषण रूप धारण कर लिया था और पूरी बिल्डिंग आग की चपेट में आ गई। फैक्ट्री में काफी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे, जिसमें बड़ी तादाद में महिलाएं थीं। इमारत में प्रवेश और निकास एक ही होने से बचाव कार्य जल्द शुरू नहीं हो सका। जगह काफी कंजस्टेड होने से रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी परेशानी आई।