पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • National
  • Rahat Indori Death News Update | Bollywood Lyricist And Urdu Language Poet Rahat Indori Passes Away In Madhya Pradesh Indore

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

रूह को राहत देने वाला शायर रुखसत हुआ:मशहूर शायर राहत इंदौरी नहीं रहे, उन्हें निमोनिया के बाद कोरोना भी हुआ था; कार्डिएक अरेस्ट आने के बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका

इंदौर4 महीने पहले
  • मध्य प्रदेश के इंदौर में 1 जनवरी 1950 को राहत इंदौरी का जन्म हुआ था
  • मंगलवार को ही उन्होंने अपने कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी ट्वीट की थी

दिल में हिंदुस्तान और शायरी में इंसानियत लिए राहत इंदौरी आज रुख़सत हो गए। आज सुबह ही उन्होंने खुद को कोरोना होने की खबर ट्विटर पर दी थी। 70 साल की उम्र में यह संक्रमण गंभीर मसला था। पर, राहत के किरदार से वाकिफ शायरों की बिरादरी को यकीन था कि इस बार कोरोना गलत आदमी से भिड़ गया है। लेकिन, होना कुछ और ही था। राहत को निमोनिया भी हो गया था और लगातार तीन हार्ट अटैक भी आए। इसके बाद शाम 5 बजे खबर आई कि रूह को राहत देने वाला ये शायर दुनिया से चला गया है।

राहत साहब के जनाजे के साथ 15 लोग कब्रिस्तान में पीपीई किट पहनकर पहुंचे।
राहत साहब के जनाजे के साथ 15 लोग कब्रिस्तान में पीपीई किट पहनकर पहुंचे।

डॉ. राहत इंदौरी का पार्थिव देह अस्पताल से कब्रिस्तान ले जाया गया। 20 लोगों को जनाजे की नमाज की अनुमति मिली थी। रेहान हाजी ने नमाज अदा करवाई। राहत साहब को सुपुर्दे खाक किया गया।

मुफलिसी में गुजरा बचपन, परिवार को बेघर होना पड़ा था
1 जनवरी 1950.. वह दिन रविवार का था, जब रिफअत उल्लाह साहब के घर राहत साहब की पैदाइश हुई। इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक, ये 1369 हिजरी थी और तारीख 12 रबी उल अव्वल थी। राहत साहब के वालिद रिफअत उल्लाह 1942 में सोनकछ देवास जिले से इंदौर आए थे। राहत साहब का बचपन का नाम कामिल था। बाद में इनका नाम बदलकर राहत उल्लाह कर दिया गया।

राहत साहब का बचपन मुफलिसी में गुजरा। वालिद ने इंदौर आने के बाद ऑटो चलाया। मिल में काम किया। लेकिन उन दिनों आर्थिक मंदी का दौर चल रहा था। 1939 से 1945 तक दूसरे विश्वयुद्ध का भारत पर भी असर पड़ा। मिलें बंद हो गईं या वहां छंटनी करनी पड़ी। राहत साहब के वालिद की नौकरी भी चली गई। हालात इतने खराब हो गए कि राहत साहब के परिवार को बेघर होना पड़ गया था।

राजनाथ ने कहा- उर्दू अदब की कद्दावर शख्सियत थे राहत

रक्षा मंत्री राजनाथ ने ट्वीट किया कि राहत उर्दू अदब की कद्दावर शख्सियत थे। उनके जाने पर दुख हुआ है। मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज ने राहत को उन्हीं के अंदाज में आखिरी विदाई दी। लिखा- एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तों, दोस्ताना जिंदगी से मौत से यारी रखो।

4-5 दिन से बेचैन थे राहत, जांच में निमोनिया और कोरोना निकला
राहत इंदौरी के बेटे और युवा शायर सतलज राहत ने बताया था कि पिता चार महीने से सिर्फ नियमित जांच के लिए ही घर से बाहर निकलते थे। उन्हें चार-पांच दिन से बेचैनी हो रही थी। डॉक्टरों की सलाह पर एक्सरे कराया गया तो निमोनिया की पुष्टि हुई थी। इसके बाद सैंपल जांच के लिए भेजे गए, जिसमें वे कोरोना संक्रमित पाए गए। राहत को दिल की बीमारी और डायबिटीज थी। सांस लेने में तकलीफ के चलते आईसीयू में रखा गया था।
अरविंदो अस्पताल के डायरेक्टर विनोद भंडारी ने बताया कि मंगलवार शाम को उन्हें दिल का दौरा पड़ा और सिवियर अटैक आया। उसके बाद एक बार एक बार राहत ने वापसी भी की, पर फिर संभल नहीं पाए।

जब इंदौर में कोरोना वॉरियर्स पर हमला हुआ था, तो राहत साहब ने भास्कर में यह संदेश लिखा था...
‘कल रात 12 बजे तक मैं दोस्तों से फोन पर पूछता रहा कि वह घर किसका है जहां डॉक्टरों पर थूका गया है, ताकि मैं उनके पैर पकड़कर, माथा रगड़कर उनसे कहूं कि खुद पर, अपनी बिरादरी, अपने मुल्क और इंसानियत पर रहम खाएं। यह सियासी झगड़ा नहीं, बल्कि आसमानी कहर है, जिसका मुकाबला हम मिलकर नहीं करेंगे तो हार जाएंगे।’

‘ज्यादा अफसोस मुझे इसलिए हो रहा है कि रानीपुरा मेरा अजीज मोहल्ला है। ‘अलिफ’ से ‘ये’ तक मैंने वहीं सीखा है। उस्ताद के साथ मेरी बैठकें वहीं हुईं। मैं बुज़ुर्गों ही नहीं, बच्चों के आगे भी दामन फैलाकर भीख मांग रहा हूं कि दुनिया पर रहम करें। डॉक्टरों का सहयोग करें। इस आसमानी बला को हिंद-मुस्लिम फसाद का नाम न दें। इंसानी बिरादरी खत्म हो जाएगी। जिंदगी अल्लाह की दी हुई सबसे कीमती नेमत है। इस तरह कुल्लियों में, गालियों में, मवालियों की तरह इसे गुजारेंगे तो तारीख और खासकर इंदौर की तारीख, जहां सिर्फ मोहब्बतों की फसलें उपजी हैं, वह तुम्हें कभी माफ नहीं करेगी।’

मुन्नाभाई एमबीबीएस और मर्डर जैसी फिल्मों में गीत लिखे
राहत ने बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी से उर्दू में एमए किया था। भोज यूनिवर्सिटी ने उन्हें उर्दू साहित्य में पीएचडी से नवाजा था। राहत ने मुन्ना भाई एमबीबीएस, मीनाक्षी, खुद्दार, नाराज, मर्डर, मिशन कश्मीर, करीब, बेगम जान, घातक, इश्क, जानम, सर, आशियां और मैं तेरा आशिक जैसी फिल्मों में गीत लिखे।

राहत साहब से जुड़ी ये खबरें भी आप पढ़ सकते हैं...

1. जब राहत इंदौरी ने भास्कर से कहा था:मैंने अब तक वो शेर नहीं लिखा, जो 100 साल बाद भी मुझे ज़िंदा रखे

2. 1993 में पहली बार 'सर' में सुनाई दिया था राहत इंदौरी का लिखा गाना, आखिरी बार 2017 में बेगम जान के लिए लिखा था

3. कुमार विश्वास ने लिखा- काव्य-जीवन के ठहाकेदार किस्सों का एक बेहद जिंदादिल हमसफर हाथ छुड़ा कर चला गया

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आज भविष्य को लेकर कुछ योजनाएं क्रियान्वित होंगी। ईश्वर के आशीर्वाद से आप उपलब्धियां भी हासिल कर लेंगे। अभी का किया हुआ परिश्रम आगे चलकर लाभ देगा। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लोगों के ल...

और पढ़ें