ग्राउंड रिपोर्ट / ओडिशा: किसान सहायता, बालाकोट और चिटफंड में डूबा पैसा बड़ा मुद्दा

आशुतोष मिश्रा

आशुतोष मिश्रा

Apr 17, 2019, 02:56 AM IST



Farmers' aid, balakot and chit fund scam big issue in odisa
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Farmers' aid, balakot and chit fund scam big issue in odisa
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  • पटनायक ने अस्का सीट से 1997 में उपचुनाव से अपना राजनीतिक कैरियर शुरू किया था
  • गांवों में पीने के पानी के संकट के बावजूद लोगों को बीजद पर भरोसा है

अस्का में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। बीजू जनता दल (बीजद) ने सेल्फ हेल्प ग्रुप (एसएचजी) की नेता 68 वर्षीय प्रमिला बिसोई को उतारा है। पटनायक ने इसी सीट से 1997 में उपचुनाव से अपना राजनीतिक कैरियर शुरू किया था।


महिला सशक्तिकरण के नाम पर चुनी गईं प्रमिला के बारे में कहा जा रहा था कि वे घर-घर में जानी जाती हैं, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। प्रमिला को लोग जानते हों या नहीं इसके बावजूद बीजद का चुनाव चिन्ह शंख लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। गांवों में पीने के पानी के संकट के बावजूद लोगों को बीजद पर भरोसा है। 


खल्लीकोट बाजार में बिपिन नायक कहते हैं कि सरकार ने चिटफंड कंपनियों में डूबे छोटे निवेशकों के धन की वसूली के लिए कुछ नहीं किया। बंटाई पर खेती करने वाले नायक को सरकार की कृषक सहायता योजना से मिलने वाली राशि का भी इंतजार है।


कांग्रेस समर्थित सीपीआई उम्मीदवार रामकृष्ण पांडा इस मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लोगों के लिए मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा बड़ा सवाल है। खल्लीकोट के व्यापारी कान्हू साहू कहते हैं कि हमारी सीट मुख्यमंत्री के गृह जिले गंजम का हिस्सा है और वह तीन बार सांसद भी रहे हैं, इसलिए हमें बीजद की यहां से जीत सुनिश्चित करनी ही होगी। भाजपा यहां पर सत्ताधारी दल की नाकामियों को जोर-शोर से उठा रही है। पूर्व मंत्री रामकृष्ण पटनायक की पुत्री और भाजपा उम्मीदवार अनीता प्रियदर्शिनी नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियाें को गिना रही हैं।


बोलनगीर में बीजद के कलिकेश सिंह देव व भाजपा प्रत्याशी संगीता सिंह देव के बीच रोचक मुकाबला है। दोनों ही पटनागढ़ रियासत के वारिस हैं। कलिकेश 2009 व 2014 में सांसद रहे, जबकि संगीता तीन बार सीट पर जीत हासिल कर चुकी हैं। कांग्रेस ने पूर्व मंत्री नरसिंह मिश्रा के पुत्र समरेन्द्र मिश्रा को उतारा है। समरेन्द्र इस समर में कुछ पिछड़ते दिख रहे हैं।


भाजपा और बीजद विकास के मुद्दे पर लड़ रहे हैं। लेागों का कहना है कि सिंचाई की समस्या, लोगों का पलायन और हाईकोर्ट की बेंच जैसे मुद्दे गायब हैं। सूखा पीड़ित क्षेत्र से हर साल करीब तीस हजार लोग पलायन कर जाते हैं।
कंधमाल में बीजद आदिवासियों से समर्थन की उम्मीद कर रही है। 70 फीसदी जनसंख्या जनजातीय है। यहां से अच्युत सामंत को प्रत्याशी बनाया है। अच्युत भुवनेश्वर के कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस के संस्थापक हैं। दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी और पूर्व सांसद खरवेला स्वैन कंधमाल दंगों के बाद हिंदू और ईसाई आदिवासियों के बीच पैदा हुए बंटवारे का लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। बालासोर से यहां आए स्वैन बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद प्रधानमंत्री मोदी के पक्ष में चल रही लहर से भी फायदा लेना चाहते हैं। कांग्रेस ने मनोज आचार्य को उतारा है।


ओडिशा का चावल का कटोरा कहे जाने वाले बारगढ़ में कर्ज की वजह से आत्महत्या के कम से कम 10 मामले सामने आए हैं। लोन न चुका पाने से चिंतित किसान अखिल महापात्रा कहते हैं कि सरकार ने उनके लिए कुछ नहीं किया। भाजपा प्रत्याशी सुरेश पुजारी इस मामले के जोर-शोर से उठा रहे हैं, जबकि बीजद के प्रसन्ना आचार्य को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री की लोकप्रियता के सहारे नैया पार हो जाएगी। कांग्रेस के युवा चेहरे प्रदीप देबता अभियान को भाजपा व बीजद के मुकाबले पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।


केंद्रीय मंत्री जुएल आेरांव सुंदरगढ़ में कांग्रेस नेता जॉर्ज टिर्की और पूर्व मुख्यमंत्री हेमानंद बिस्वाल की पुत्री और बीजद प्रत्याशी सुनीता बिस्वाल से तिकोने मुकाबले में फंसे हुए हैं। हालांकि सुनीता के बीजद से लड़ने पर उनके पिता असहज हैं। सुनीता को मुख्यमंत्री का वरदहस्त है, जिसे वह अपनी ताकत मानती हैं।


ओरांव औद्योगिक शहर में प्रधानमंत्री की लोकप्रियता के भरोसे हैं। पत्रकार सतीश शर्मा स्वीकार करते हैं कि प्रधानमंत्री के पक्ष में लहर दिख रही है। उन्हें एक मजबूत नेता के तौर पर देखा जा रहा है। ओरांव नाराज राउरकेला के पूर्व विधायक दिलीप रे को मनाने में भी सफल रहे हैं।

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