विशेष ग्राउंड रिपोर्ट / उम्मीदवारों के अहंकार पर भारी पड़ सकती है किसानों की नाराजगी

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 10:00 AM IST



Farmers' displeasure may be overwhelming on ego
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Farmers' displeasure may be overwhelming on ego
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  •  शिवपाल यादव के सामने रामगोपाल के बेटे सांसद अक्षय, उन्हें कोई समस्या बताए तो कहते हैं- पापा से पूछो
  • 40 डिग्री तापमान में लोग हेमामालिनी के करीब आते हैं तो वह नाक सिकोड़ लेती हैं

स्मिता प्रकाश. इस चुनाव में खड़े नेताओं के बेटे, बेटी, दामाद और बहुएं अपने भाषणों में अक्सर अपने पिता या ससुर का उल्लेख करते हैं, ताकि जो मतदाता उन्हें या उनके काम के बारे में नहीं जानता है, उसे उनकी पहचान हो सके। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में प्रदेश के सबसे शक्तिशाली यादव परिवार के चाचा-भतीजा आमने-सामने हैं। यह परिवार राज्य में गांधी-नेहरू परिवार से भी ज्यादा प्रभावशाली है। यहां पर समाजवादी पार्टी से अलग हुए अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव का मुकाबला अखिलेश के दूसरे चाचा रामगोपाल यादव के बेटे मौजूदा सांसद अक्षय यादव से है। लोगों का कहना है कि वे जब भी अक्षय के पास किसी समस्या को लेकर जाते हैं तो उनका पसंदीदा जवाब होता है कि ‘पापा को पूछो’ या ‘पापा कहते हैं’।

 

पास की मथुरा सीट पर अपनी सीट को बनाए रखने के लिए अभिनेत्री से नेत्री बनीं हेमामलिनी को कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। बनारसी से चंदेरी और जरीदार जार्जेट की रोज नई साड़ी पहन कर दिखने वाली हेमामालिनी पर नजर तो टिकती है, लेकिन उनके तेवरों का लोग मजाक भी उड़ाते हैं। लोगों का कहना है कि 40 डिग्री सेल्सियस में उनका इंतजार कर रहे लोग जब उनके करीब जाने की कोशिश करते हैं ताे वह नाक सिकोड़ लेती हैं।

 

हेमा के पास जाना आसान नहीं है। वह यदा-कदा जब भी यहां आती हैं तो एक बंगले में रहती हैं, जिसे वह अपना बताती हैं। वह बाहरी होने की बात को खरिज कर देती हैं पर पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को नहीं पहचानतीं। भाजपा कार्यकताओं समेत सभी लोगों का कहना है कि वह उपलब्ध नहीं रहतीं। वह मीडिया को इंटरव्यू देना पसंद नहीं करती हैं। फिल्मी दिनों में भी शायद ही कोई उनके करीब पहुंच पाता था। अगर पहुंच गया तो उनका एक ही जवाब होता था ‘अम्मा से पूछो’ और कोई भी उनकी मां जया चक्रवर्ती से तो नहीं मिलना चाहता था। वैसे भी वह पत्रकारों के प्रति काफी कठोर समझी जाती थीं।


अहंकार के मामले में भाजपा की हेमामालिनी सपा के अक्षय यादव के ही समान हैं। अक्षय को उनकी ताकत और दंभ अखिलेश से उनकी नजदीकी की वजह से मिला है। उन्हें लगता है कि अखिलेश की वजह से वोटर उनके प्रति नाराजगी को भूल जाएंगे। मोदी लहर पर सवार होकर 2014 में जीतने वाली हेमा को भरोसा है कि उनका काम बोलेगा। वह कहती हैं कि उन्होंने पहले चुनाव न लड़ने का फैसला किया था, लेकिन उनके परिवार ने उनको समझाया कि टीम मोदी को उनकी जरूरत है।

 

उनके सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने वाले उनके भाई भी उनके साथ रहते हैं। वह सुनिश्चित करते हैं कि उनका हर कार्यक्रम तय समय पर हो, अन्यथा हेमा बहुत नाराज हो जाती हैं। उनकी बेटियां तो इस बार प्रचार में नहीं आई हैं, लेकिन धर्मेन्द्र उनके लिए प्रचार कर चुके हैं। उनको देखने के लिए भीड़ तो आती है पर क्या कोई बता सकता है कि यह वोट में भी बदलेगी?


मथुरा नगरी में लोग बंदरों की समस्या से परेशान हैं। सांसद द्वारा यमुना को साफ न करा पाने से भी नाराज हैं। पब्लिक टायलेट की कमी और गंदगी कष्टकारी है। ग्रामीण इलाकों में आलू किसान नाराज हैं और ब्रज क्षेत्र में यह सबसे बड़ा मुद्दा है। पड़ोसी आगरा और फतेहपुर सीकरी में भी आलू किसानों की नाराजगी दिख रही है। लगातार तीसरे साल आलू का उचित दाम न मिलने से किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। 


फतेहपुर सीकरी में कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहे राज बब्बर को भरोसा है कि लोगों के बीच उनकी छवि और राहुल-प्रियंका द्वारा उनका प्रचार करने से उन्हें ही वोटरों का समर्थन मिलेगा। राज बब्बर अपनी पाटियों में नजरअंदाज हो रहे कुछ अन्य दलों के पूर्व विधायकों का भी समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। ये जमीन से जुड़े नेता अपनी जाति के कुछ वोटों को उन्हें दिलाने की कोशिश में हैं। राजबब्बर को राजनीति में करीब दो दशकों का अनुभव हो गया है। वह लोगों के गले मिलते है, उनके साथ सेल्फी लेते हैं और जब कोई उनके पांव छूने की कोशिश करता है तो उसे रोकते हैं। 


आगरा से भाजपा ने एसपी सिंह बघेल को मैदान में उतारा है। बघेल 2017 में सपा छोड़कर भाजपा मंे आए थे। उनके भाषणों में सपा-बसपा गठबंधन की आलोचना के साथ ही बालाकोट और मजबूत सरकार का जिक्र होता है। ठाकुर बहुल आंवलाखेड़ा और खेरागढ़ में गृहमंत्री राजनाथ सिंह उनके प्रचार के लिए आए तो बघेल ने उनका परिचय शेरे हिन्द कह कर दिया। भीड़ काफी जुटी पर उतनी नहीं, जितनी भाजपा पसंद करती है। यहां पर जाति बड़ा फैक्टर है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में बढ़ती गर्मी, फसली समय और दावों के प्रति उदासीनता है।


गठबंधन ने यहां से ब्राह्मण वोटों की उम्मीद में बाहुबली गुड्‌डू पंडित को मैदान में उतारा है। लेकिन उनका दंभ और अपशब्द कहने का स्वभाव उनके लिए मुश्किल कर सकता है। कांग्रेस ने बहुत ही कमजोर प्रत्याशी पूर्व प्रशासक प्रीता हरित को टिकट दिया है। वे करीब आने पर लोगों से उलझ जाती हैं, उन्हें गर्मी भी सहन नहीं होती है। अगर ज्यादा देर धूप में खड़ा होना पड़े तो वह बेहोश हो जाती हैं। एक रैली में जब वह प्रियंका के साथ थीं तो उनके चेहरे पर ऐसी मुस्कराहट थी, जिससे शायद ही कुछ हासिल हो। ज्योतिरादित्य के रोड शो का भी कोई असर नहीं रहा। कांग्रेस की नजर 2022 के विधानसभा चुनावों पर है। वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तीसरे स्थान की उम्मीद कर सकती है।

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