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एक्शन पर आंसू:राकेश टिकैत ने गाजीपुर बॉर्डर पर अनशन शुरू किया, रोते हुए बोले- कानून वापस लो नहीं तो खुदकुशी कर लूंगा

नई दिल्ली5 महीने पहले
दिल्ली के बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत रोते हुए बोले कि किसानों पर अत्याचार किया जा रहा है। उन्हें मारने की साजिश रची जा रही है।

दिल्ली में 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के दो दिन बाद प्रशासन ने किसानों से गाजीपुर बॉर्डर का इलाका खाली करने को कहा। पुलिस की चेतावनी के बाद धरने पर बैठे कई किसान वहां से चले गए। शाम होते-होते बड़ी तादाद में दिल्ली और यूपी की पुलिस गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंच गई। ये देखकर, कुछ देर पहले धमकी देने वाले भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत के आंसू निकल आए। उन्होंने रोते हुए कहा, 'किसानों पर अत्याचार किया जा रहा है। उन्हें मारने की साजिश हो रही है। अगर सरकार ने कानून वापस नहीं लिए तो मैं आत्महत्या कर लूंगा। मैं इस देश के किसानों को बर्बाद नहीं होने दूंगा।'

टिकैत ने कहा, 'इतनी बड़ी साजिश होगी, मुझे पता नहीं था। मैंने सब लोगों के खिलाफ जाकर BJP को वोट दिया था। मेरी वाइफ ने किसी और को वोट दिया था, लेकिन मैंने BJP को वोट दिया। उन्हें वोट देकर मैंने गद्दारी की थी। ये सरकार किसान बिरादरी को पूरे देश में बदनाम करने की कोशिश कर रही है।'

पल-पल पलटते रहे दोनों टिकैत भाई
इधर, आंदोलन को लेकर BKU के दो बड़े नेताओं के बयान पलटने वाले रहे। गाजीपुर बॉर्डर पर राकेश टिकैत ने गुरुवार दोपहर को कहा था, 'न तो मैं सरेंडर करूंगा, न ही धरना खत्म करूंगा। अगर गोली चलनी है तो यहीं चलेगी।' इसके घंटे भर बाद वे रोते नजर आए। इधर, BKU के अध्यक्ष और राकेश टिकैत के भाई ने दोपहर में धरना खत्म करने की बात कही थी। शाम होते-होते उन्होंने मुजफ्फरनगर में किसान पंचायत बुलाकर आंदोलन को जारी रखने की बात कही। यह महापंचायत शुक्रवार सुबह 11 बजे से फिर लगेगी।

44 किसान नेताओं के खिलाफ लुकआउट नोटिस
दिल्ली में 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड में हिंसा के बाद पुलिस लगातार एक्शन में है। उपद्रव में शामिल रहे 44 किसान नेताओं के खिलाफ गुरुवार को लुकआउट नोटिस जारी किए गए। अब उनके पासपोर्ट भी जब्त किए जाएंगे, ताकि वे बिना इजाजत विदेश न जा सकें। पुलिस ने हिंसा के मामले में अब तक 33 FIR दर्ज की हैं।

लाल किले में हिंसा करने वालों पर राजद्रोह का केस
खबर ये भी है कि लाल किले में हिंसा करने वालों पर पुलिस ने राजद्रोह का केस दर्ज किया है। इससे पहले, पुलिस ने 20 किसान नेताओं को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों न आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, 3 दिन में इसका जवाब दें। इनमें से 6 के नाम अभी तक सामने आए हैं। ये नेता हैं राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव, दर्शन पाल, बलदेव सिंह सिरसा, बलबीर सिंह राजेवाल और जगतार सिंह बाजवा।

कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का आज 64वां दिन है। टीकरी बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन जारी है। दूसरी तरफ सुरक्षाबल भी तैनात हैं।
कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का आज 64वां दिन है। टीकरी बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन जारी है। दूसरी तरफ सुरक्षाबल भी तैनात हैं।

पुलिस ने टिकैत के टेंट पर नोटिस चस्पा किया
हिंसा मामले में टिकैत और जगतार सिंह बाजवा को नोटिस देने पुलिस गुरुवार दोपहर 12.30 बजे गाजीपुर बॉर्डर पहुंची थी। लेकिन, दोनों नेता सामने नहीं आए। इसके बाद पुलिस ने उनके टेंट पर नोटिस चिपका दिया। इधर, गाजीपुर बॉर्डर पर बिजली काटने से नाराज टिकैत बोले, 'सरकार दहशत फैलाने का काम कर रही है। गांवों में दिक्कत हुई तो किसान लोकल पुलिस थानों पर जाएंगे। वहां जो भी होगा, उसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।'

पुलिस ने लाल किला परिसर से डेढ़ घंटे में प्रदर्शनकारियों को बाहर निकाल दिया था, लेकिन एहतियात के तौर पर तीसरे दिन भी बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं।
पुलिस ने लाल किला परिसर से डेढ़ घंटे में प्रदर्शनकारियों को बाहर निकाल दिया था, लेकिन एहतियात के तौर पर तीसरे दिन भी बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं।

सिंघु बॉर्डर पर किसानों के खिलाफ प्रदर्शन
दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर दो महीने से आंदोलन कर रहे किसानों को अब लोगों का विरोध भी झेलना पड़ रहा है। गुरुवार दोपहर कुछ लोगों ने सिंघु बॉर्डर पहुंचकर नारेबाजी की। लोगों के हाथ में तख्तियां थीं, जिन पर लिखा था कि तिरंगे का अपमान नहीं सहेंगे।