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सरकार-किसानों में नहीं बनी बात:किसान बोले- कानून वापसी नहीं, तो घर वापसी भी नहीं; कृषि मंत्री बोले- ताली तो दोनों हाथों से बजती है

नई दिल्ली4 महीने पहले
सोमवार की मीटिंग के दौरान सरकार ने किसानों को लंच की पेशकश की थी। लेकिन, किसानों ने पिछली बार की तरह अपने लंगर से मंगवाया हुआ खाना ही खाया।

सरकार और किसानों के बीच 8वें दौर की बातचीत में भी कोई नतीजा नहीं निकल पाया। किसान कानून वापसी की मांग पर अड़े रहे और MSP को कानूनी रूप देने के मुद्दे पर भी सहमति नहीं बनी। विज्ञान भवन में करीब 4 घंटे चली बैठक के बाद किसान बोले कि कानून वापसी नहीं तो घर वापसी भी नहीं। इन बैठकों में कोई नतीजा न निकलने के सवाल पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि ताली तो दोनों हाथ से बजती है। अब सरकार और किसानों के बीच अगली बातचीत 8 जनवरी को होगी।

बैठक के बाद किसानों का स्टैंड
किसान नेता सरवन सिंह ने बताया, 'कृषि मंत्री ने साफ कहा है कि सरकार कानून वापस नहीं लेगी और किसान सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। हम अब लंबी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं और 26 जनवरी के दिन बड़ी रैली निकालेंगे।' किसान नेता राकेश टिकैत बोले कि कानून वापसी नहीं तो घर वापसी भी नहीं होगी। अगली बैठक में भी हमारा मुद्दा कानूनों की वापसी का ही रहेगा।

बैठक के बाद सरकार का स्टैंड
तोमर ने कहा, 'ऐसे मामलों में चर्चा आगे बढ़ती है और फिर पीछे जाती है। चर्चा ठीक वातावरण में हुई है और दोनों पक्ष ही जल्द समाधान चाहते हैं। 8 तारीख को 2 बजे बैठक होगी और उसमें चर्चा आगे बढ़ेगी। जब हम तारीख तय करते हैं तो किसान संगठनों की मंजूरी से ही तय करते हैं। स्वाभाविक है कि रास्ता निकालने के लिए दोनों हाथों से ही तालियां बजती हैं। सरकार देश के करोड़ों किसानों का हित ध्यान में रखते हुए ही फैसला लेगी।'

किसान कानून वापसी पर अड़े, इसलिए हल नहीं निकल पा रहा : तोमर
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसान कानून वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं, इसलिए केंद्र किसी हल तक नहीं पहुंच सका। हम चाहते हैं कि किसान कानूनों पर क्लॉज वाइस बात करें। जब तक किसान कानून वापसी पर अड़े रहेंगे, तब तक हम किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकते।

किसानों ने फिर ठुकराया सरकारी खाना
सोमवार की मीटिंग के दौरान लंच में सरकार ने किसानों के लिए खाने की व्यवस्था की थी। लेकिन, किसानों ने सरकार का खाना खाने से इनकार कर दिया। उन्होंने अपने लंगर का खाना ही खाया। किसानों की बैठक के दौरान करीब 200 लोगों का खाना लंगर से विज्ञान भवन पहुंचाया गया था। पिछली मीटिंग में भी किसानों ने लंगर का खाना ही खाया था। उस समय केंद्रीय मंत्रियों ने भी किसानों के साथ ही लंच किया था।

किसानों ने पिछली बैठक में सरकार का खाना नहीं खाया था। तब केंद्रीय मंत्रियों ने उनके साथ लंच किया था। इस बार भी किसानों के लिए लंगर से ही खाना लाया गया।
किसानों ने पिछली बैठक में सरकार का खाना नहीं खाया था। तब केंद्रीय मंत्रियों ने उनके साथ लंच किया था। इस बार भी किसानों के लिए लंगर से ही खाना लाया गया।

किसान आंदोलन के 40वें दिन से जुड़ी 2 और बातें

1. किसान आंदोलन का आज 40वां दिन है। केंद्र और किसानों के बीच बातचीत बेनतीजा रही है। इस बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह राज्य में कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पास करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएंगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को तुरंत इन तीनों कानूनों को वापस ले लेना चाहिए।

2. किसान आंदोलन के समर्थन में पंजाब-हरियाणा में रिलायंस जियो के टावर और ऑफिसों में तोड़फोड़ हुई थी। रिलायंस ने सोमवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी लगाई। कंपनी ने कहा कि सरकार को तुरंत दखल देकर गुंडागर्दी रोकनी चाहिए।

30 दिसंबर की मीटिंग में 2 मुद्दों पर सहमति बनी थी
1. पराली जलाने पर केस दर्ज नहीं होंगे: अभी 1 करोड़ रुपए जुर्माना और 5 साल की कैद का प्रोविजन है। सरकार इसे हटाने को राजी हुई।
2. बिजली अधिनियम में बदलाव नहीं: किसानों को आशंका है कि इस कानून से बिजली सब्सिडी बंद होगी। अब यह कानून नहीं बनेगा।

सरकार के साथ दो मुद्दों पर सहमति बनने के बाद किसानों के रुख में नरमी दिखी थी और उन्होंने 31 दिसंबर को होने वाली ट्रैक्टर रैली को टाल दिया था।

पिछली 7 में से सिर्फ 1 बैठक का नतीजा निकला

पहला दौरः 14 अक्टूबर
क्या हुआः
मीटिंग में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की जगह कृषि सचिव आए। किसान संगठनों ने मीटिंग का बायकॉट कर दिया। वो कृषि मंत्री से ही बात करना चाहते थे।

दूसरा दौरः 13 नवंबर
क्या हुआः
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किसान संगठनों के साथ मीटिंग की। 7 घंटे तक बातचीत चली, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला।

तीसरा दौरः 1 दिसंबर
क्या हुआः
तीन घंटे बात हुई। सरकार ने एक्सपर्ट कमेटी बनाने का सुझाव दिया, लेकिन किसान संगठन तीनों कानून रद्द करने की मांग पर ही अड़े रहे।

चौथा दौरः 3 दिसंबर
क्या हुआः साढ़े 7 घंटे तक बातचीत चली। सरकार ने वादा किया कि MSP से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। किसानों का कहना था सरकार MSP पर गारंटी देने के साथ-साथ तीनों कानून भी रद्द करे।

5वां दौरः 5 दिसंबर
क्या हुआः
सरकार MSP पर लिखित गारंटी देने को तैयार हुई, लेकिन किसानों ने साफ कहा कि कानून रद्द करने पर सरकार हां या न में जवाब दे।

6वां दौरः 8 दिसंबर
क्या हुआः
भारत बंद के दिन ही गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक की। अगले दिन सरकार ने 22 पेज का प्रस्ताव दिया, लेकिन किसान संगठनों ने इसे ठुकरा दिया।

7वां दौर: 30 दिसंबर
क्या हुआ:
नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल ने किसान संगठनों के 40 प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। दो मुद्दों पर मतभेद कायम, लेकिन दो पर रजामंदी बनी।

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