रुचि सोया को खरीदने के लिए पतंजलि की 4350 करोड़ रुपए की बोली मंजूर

2 वर्ष पहले
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  • इस रेजोल्यूशन से रुचि सोया के कर्जदाताओं को 60% नुकसान होगा, कंपनी पर बैंकों के 9345 करोड़ बकाया
  • ट्रिब्यूनल ने पतंजलि से शुरुआती 600 करोड़ रु के भुगतान का स्त्रोत पूछा, अगली सुनवाई 1 अगस्त को होगी

मुंबई. खाद्य तेल कंपनी रुचि सोया को खरीदने के लिए पतंजलि आयुर्वेद की 4,350 करोड़ रुपए की बोली को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने गुरुवार को आखिरी मंजूरी दे दी। इस रेजोल्यूशन से रुचि सोया के कर्जदाताओं को 60% नुकसान उठाना पड़ेगा। कंपनी पर बैंकों के 9,345 करोड़ रुपए और अन्य कर्जदाताओं के 2,800 करोड़ रुपए बकाया हैं।

1) दो बैंकों ने पतंजलि की बोली को चुनौती दी थी लेकिन याचिका खारिज हो गई

ट्रिब्यूनल ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड और डीबीएस बैंक की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इन्होंने पतंजलि की बोली को चुनौती दी थी। इनका कहना था कि पतंजलि ने कम बोली लगाई है। इसलिए रेजोल्यूशन के तहत उन्हें कम रकम मिलेगी।

रुचि सोया के रेजोल्यूशन प्रोफेशनल ने ऑपरेशनल क्रेडिटर्स के 2,716.61 के दावे शामिल किए थे। हालांकि, एनसीएलटी के आदेश से यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि ऑपरेशनल क्रेडिटर्स को कितनी रकम मिलेगी।

ट्रिब्यूनल ने रेजोल्यूशन प्रोफेशनल से कहा है कि 1 अगस्त को अगली सुनवाई से पहले पतंजलि द्वारा 600 करोड़ रुपए की फंडिंग के स्त्रोत की जानकारी देने को कहा है। यह राशि बिडिंग का ही हिस्सा है। ट्रिब्यूनल ने पूरे रेजोल्यूशन प्रोसेस के वास्तविक खर्च की डिटेल भी मांगी है।

पतंजलि के वकील ने कहा था कि 600 करोड़ की राशि आंतरित स्त्रोतों से जुटाई जाएगी लेकिन अभी तक विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया है। जबकि ट्रिब्यूनल 2 बार निर्देश दे चुका है।

पतंजलि के एमडी आचार्य बालकृष्ण ने रुचि सोया को खरीदने की मंजूरी मिलने पर कहा है कि इससे स्वदेशी अभियान को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। रुचि सोया के इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किसानों की बेहतरी के लिए किया जाएगा।

एनसीएलटी ने दिसंबर 2017 में स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और डीबीएस बैंक की अर्जी पर रुचि सोया के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने को मंजूरी दी थी। कंपनी के कामकाज को मैनेज करने के लिए और दिवालिया प्रक्रिया को पूरी करने के लिए शैलेंद्र अजमेरा को रेजोल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त किया था। बोली प्रक्रिया से अदाणी विल्मर के हाथ खींच लेने के बाद पतंजलि आयुर्वेद एकमात्र बोलीदाता कंपनी रह गई थी।

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