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  • First astronaut training center to be built in 2700 crores, capacity of 3 people

उपलब्धि / देश में बन रहा है पहला अंतरिक्ष यात्री ट्रेनिंग सेंटर, नासा की तुलना में एक चौथाई होगा

यह ट्रेनिंग सेंटर 473 एकड़ में बनाया जाएगा। यह ट्रेनिंग सेंटर 473 एकड़ में बनाया जाएगा।
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यह ट्रेनिंग सेंटर 473 एकड़ में बनाया जाएगा।यह ट्रेनिंग सेंटर 473 एकड़ में बनाया जाएगा।

  • बेंगलुरु के चल्लकेरे में 2700 करोड़ की लागत से बन रहा है ट्रेनिंग सेंटर 
  • इसके बनने से हमें अपने अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजने की जरूरत नहीं होगी 
  • एक साथ 3 एस्ट्रोनॉट को ट्रेनिंग दी जा सकेगी, हर यात्री पर 30 करोड़ रुपए बचाएगा

दैनिक भास्कर

Jan 12, 2020, 09:13 AM IST

नई दिल्ली/बेंगलुरु (अनिरुद्ध शर्मा). कर्नाटक में बेंगलुरु-पुणे नेशनल हाइवे पर चल्लकेरे कस्बे से सटे उल्लारथी गांव में भारत का अपना ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर अगले तीन वर्ष में तैयार होगा। इसमें व्योमनॉट (अंतरिक्ष यात्री) के लिए प्रशिक्षण सुविधा मिलेगी। इस केंद्र में वह सभी सुविधाएं उपलब्ध होगी।

स्पेसक्राफ्ट के क्रू और सर्विस मॉड्यूल से लेकर अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग और मिशन कंट्रोल सेंटर भी यहीं होगा। ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम से जुड़े इसरो के अलग-अलग केंद्रों में चल रही गतिविधियों और सुविधाओं को चल्लकेरे में एक जगह पहुंचा दिया जाएगा। इस ट्रेनिंग सेंटर में एक साथ तीन अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग दी जा सकेगी। जबकि नासा में एक साथ 13 अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग देने की सुविधा है। 

गगनयान पर काम तिरुवनंतपुरम में हो रहा   

इसरो के चेयरमैन के.सिवन ने बताया कि गगनयान हमारा एकमात्र ह्यूमन स्पेसफ्लाइट प्रोग्राम नहीं होगा, बल्कि भविष्य में व्योमनॉट को अंतरिक्ष में भेजने के प्रोग्राम जारी रहेंगे। फिलहाल गगनयान को अंतरिक्ष में ले जाने वाले रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 पर तिरुवनंतपुरम के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में काम हो रहा है। साथ ही इसके क्रू और सर्विस मॉड्यूल पर बेंगलुरु के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर में काम हो रहा है। उधर अंतरिक्ष यात्रियों के चयन और शुरुआती प्रशिक्षण का काम एयरफोर्स के इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन में हो रहा है। सिवन बताते हैं कि आज प्रशिक्षण के लिए हमें गगनयान के लिए चुने गए उम्मीदवारों को रूस भेजना पड़ रहा है और उसमें करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं, उसके लिए भविष्य में हमारे पास अपनी सुविधाएं होंगी।

कितना बड़ा होगा सेंटर

  • 473 एकड़ जमीन पर बनेगा ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर। इसके बनने से हमें अपने अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग पर विदेश भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 
  • स्पेसक्राफ्ट के क्रू, सर्विस मॉड्यूल से लेकर अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग और मिशन कंट्रोल इसी सेंटर में किया जाएगा।
  • यहां क्रू मॉड्यूल सिमुलेटर और माइक्रोग्रेविटी वातावरण देने के लिए वैक्यूम चैंबर, पैराबोलिक फ्लाइट, न्यूट्रल बायेंसी की सुविधा स्थापित होगी।
  • इन सुविधाओं के जरिए अंतरिक्ष यात्री को जीरो ग्रेविटी में हवा में तैरते हुए (वेटलेसनेस महसूस करते हुए) काम करने की ट्रेनिंग दी जाती है।
  • एक्स्ट्रा वेहीकुलर एक्टिविटी ट्रेनिंग और ऑनबोर्ड सर्वाइवल, लाइफ सपोर्ट सिस्टम और पुनर्वास प्रशिक्षण (अंतरिक्ष से लौटने पर दोबारा पृथ्वी के वातावरण के अनुकूल होने) की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

एक अंतरिक्ष यात्री पर बचेंगे 30 करोड़
अभी गगनयान के लिए चुने गए यात्रियों को रूस के रॉसकॉसमोस में ट्रेनिंग के लिए भेजा जा रहा है। इसरो ने इसके खर्च को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार एक अंतरिक्ष यात्री की ट्रेनिंग विदेश में करवाने पर 25-30 करोड़ रुपए का खर्च आता है। सेंटर बनने के बाद ये काम देश में ही हो सकेगा।

ऐसा करने वाला भारत छठा देश बनेगा
अभी तक नासा (अमेरिका), ईएयू,  रॉसकॉसमोस (रूस), जर्मनी (यूरोप),सुकुबा स्पेस सेंटर (जापान) और चाइनीज नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (चीन) में अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित करने और अंतरिक्ष में भेजने की सुविधा उपलब्ध है। हर स्थान पर प्रशिक्षण अवधि तीन से साढ़े तीन साल है।

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