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राजस्थान / मेड इन इंडिया हार्ट वॉल्व को सरकार की मंजूरी, पैर की नस के रास्ते दिल में लगाए जाएंगे

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2019, 10:19 AM IST


First Heart Valve Surgery on January 22 in Jaipur
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First Heart Valve Surgery on January 22 in Jaipur

  • केंद्र की मंजूरी से पहले 65 मरीजों पर किया गया इस हार्ट वॉल्व का ट्रायल
  • पहली सर्जरी 22 जनवरी को जयपुर में, 10 लाख रुपए तक कम आएगा खर्च

जयपुर (संदीप शर्मा).  दिल के मरीजों (हार्ट वाॅल्व की समस्या वालों) के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार ने मेड इन इंडिया हार्ट वाॅल्व लगाने की मंजूरी दे दी है। इसका फायदा यह होगा कि हार्ट वाॅल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी अब 10 लाख रुपए तक सस्ती हो जाएगी। बिना ओपन हार्ट सर्जरी के पैर की नस से वाॅल्व लगाया जाएगा। निजी अस्पतालों में विदेशी हार्ट वाॅल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी करीब 25 लाख रु में होती थी। मगर अब यह सर्जरी 12 से 15 लाख में हो सकेगी।

सस्ते होने के साथ बेहतर क्वालिटी

  1. विशेषज्ञों का कहना है कि जब लगातार यह वाॅल्व इस्तेमाल किए जाएंगे तो इनकी कीमत और कम होगी। वाॅल्व सस्ते होने के साथ-साथ बेहतर क्वालिटी के भी हैं। इंवेस्टीगेटर टीम, एथिक्स कमेटी और डीजीसीआई (ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया) की रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार ने पिछले साल अक्टूबर के अंतिम हफ्ते में इसे मंजूरी दी।

  2. इनका कहना है कि विदेशी कंपनियाें का हर साल का 100 करोड़ रुपए से भी अधिक का काराेबार हार्ट वाॅल्व का है। ऐसे में जब मेड इन इंडिया वाॅल्व लगने शुरू होंगे तो वे कड़ी टक्कर देने की कोशिश करेंगे। जानकारों की मानें तो सिर्फ अगले दो साल के अंदर विदेशी वाॅल्व की खपत आधी रह जाएगी।

  3. ओपन हार्ट सर्जरी में सीना खोलकर और हार्ट को बाइपास मशीन पर रखकर वाॅल्व बदला जाता है। टीवीएआई (ट्रांस कैथ्रेटर एरोटिक वाल्व इंप्लांटेशन) तकनीक में बिना चीर-फाड़ के पैर की नस के जरिए वाॅल्व डाला जाता है।

  4. चार हार्ट वाॅल्व होते हैं। इनका काम एक दिशा में रक्त का प्रवाह बनाए रखना होता है। जब 1 या ज्यादा वाॅल्व लीक करने लगते हैं तो खून वापस आने लगता है।

  5. सबसे ज्यादा 11 ट्रायल राजस्थान में हुए

    • इंवेस्टीगेटर टीम के 4 सदस्यों में 2 जयपुर के, यहां सर्वाधिक 11 ट्रायल : वाॅल्व लगाने के लिए देशभर से 65 मरीज चुने गए। इंवेस्टीगेटर टीम बनी। इस चार सदस्यीय टीम में जयपुर के दो डॉक्टर थे। सबसे ज्यादा 11 ट्रायल राजस्थान में हुए।
    • 30 जून 2017 को लगाया गया था पहला वाॅल्व, डेढ़ साल मॉनीटरिंग हुई : राजस्थान में 30 जून 2017 को ट्रायल के लिए पहला ऐसा वाल्व लगाया गया। 11 मरीजों की डेढ़ साल मॉनीटरिंग की गई। फिर एथिक्स कमेटी को रिपोर्ट सौंपी गई।
    • डॉक्टर रविन्द्र सिंह करेंगे ईएचसीसी में ऐसी पहली सर्जरी : अप्रूवल के बाद पहला इंडियन हार्ट वाल्व ईएचसीसी हॉस्पिटल में 22 जनवरी को लगाया जाएगा। गोवा के मरीज की यह रिप्लेसमेंट सर्जरी डॉ. रविन्द्र सिंह राव करेंगे।

  6. इंटरनेशनल कार्डियोलॉजिस्ट, डॉ. समीन शर्मा और डॉ. रविन्द्र सिंह राव ने बताया कि 65-70 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए बेहतर तकनीक है। इसके तीन फायदे हैं। पहला- हार्ट ओपन नहीं करना पड़ता तो खतरा 80% कम होता है। एक सप्ताह के बाद व्यक्ति सभी काम कर सकता है। इंफेक्शन का खतरा भी कम हो जाता है।

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