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महाराष्ट्र मे डेल्टा प्लस का खतरा:राज्य में एंट्री के लिए वैक्सीन की दोनों डोज या 72 घंटे की RT-PCR निगेटिव रिपोर्ट जरूरी, दोनों नहीं तो 14 दिन क्वारैंटाइन

मुंबई10 महीने पहले
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महाराष्ट्र में एंट्री के लिए अब आपको कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज या 72 घंटे के भीतर की RT-PCR रिपोर्ट दिखाना होगा। अगर दोनों नहीं हैं तो 14 दिन क्वरैंटाइन में रहना होगा। महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को नई गाइडलाइन जारी करते हुए इसकी जानकारी दी।

गाइडलाइन के मुताबिक, महाराष्ट्र में एंट्री के लिए लोगों को दो शर्तों में से एक का पालन करना होगा। पहली शर्त है कि जो लोग महाराष्ट्र जाना चाहते हैं उन्हें वैक्सीन की दोनों डोज का सर्टिफिकेट साथ रखना होगा। इसमें वैक्सीन की डोज लगे भी 14 दिन होना जरूरी है। यानी आज या कल आपने वैक्सीन की दोनों डोज पूरी की है तो एंट्री नहीं मिलेगी।

दूसरी शर्त के मुताबिक, 72 घंटे के भीतर की कोरोना निगेटिव RT-PCR रिपोर्ट रखना होगा। इसके अलावा दोनों में से किसी एक भी शर्त को पूरा नहीं करने पर 14 दिन क्वारैंटाइन में रहना होगा।

राज्य में डेल्टा प्लस वैरिएंट से 5 लोगों की मौत
महाराष्ट्र में डेल्टा प्लस वैरिएंट से अब तक पांच मरीजों की मौत हो चुकी है। रायगढ़ की जिलाधिकारी निधि चौधरी के मुताबिक, यहां एक 69 वर्षीय महिला ने संक्रमण के बाद दम तोड़ा है। इससे पहले गुरुवार को मुंबई के घाटकोपर इलाके में 63 वर्षीय महिला की 'डेल्टा प्लस' वैरिएंट से मौत की पुष्टि हुई है। डेल्‍टा प्‍लस वैरिएंट से महाराष्‍ट्र में पहली मौत 13 जून को रत्‍नागिरी में 80 वर्षीय महिला की हुई थी। दो मौतें रत्नागिरी जिले में हुई हैं।

राज्य में 65 मरीज डेल्टा प्लस वैरिएंट से संक्रमित
महाराष्ट्र में डेल्टा प्लस वैरिएंट के मरीजों की संख्या 65 हो गई है। जलगांव जिले में सबसे अधिक 13 मरीज हैं। शहरों की बात करें तो सबसे ज्यादा 7 मरीज मुंबई में हैं। इसके बाद पुणे में 3, नांदेड़ में 2, गोंदिया में 2, रायगढ़ में 2 और पालघर में 2 मरीज मिले हैं। इसी प्रकार चंद्रपुर और अकोला जिले में एक-एक मरीज पाए गए हैं। महाराष्ट्र में मिले 65 मरीजों में से 32 पुरुष और 33 महिलाएं हैं।

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए अब तक जितने सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग हुई है। उसमें से 80% में डेल्टा प्लस वैरिएंट पाए जाने की पुष्टि हुई है।

हर महीने 100 सैंपल की होती है जांच
महाराष्ट्र सरकार ने जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) संस्था के अंतर्गत काम करने वाली इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटिग्रेटेड बायोलॉजी लैब के साथ समझौता किया है। इस नेटवर्क से हर महीने राज्य के प्रत्येक जिले से 100 सैंपल की जांच की जाती है।

महाराष्ट्र में 5 लैब और 5 हॉस्पिटल को सेंटीनल सर्वे के लिए चुना गया है। प्रत्येक सेंटीनल सेंटर से 15 दिनों में 15 लैब के सैंपल को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी और राष्ट्रीय पेशी विज्ञान संस्था (पुणे) के पास भेजा जाता है।

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