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UP की सियासत के केंद्र में आए ब्राह्मण:30 साल में पहली बार सपा करेगी ब्राह्मणों का सम्मेलन, अपने परंपरागत वोट यादव-मुस्लिम के साथ ब्राह्मणों को जोड़ने की तैयारी

लखनऊ2 महीने पहले
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रविवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ पार्टी के पांच ब्राह्मण नेताओं ने करीब ढाई घंटे लंबी बैठक कर चिंतन-मंथन किया। - Dainik Bhaskar
रविवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ पार्टी के पांच ब्राह्मण नेताओं ने करीब ढाई घंटे लंबी बैठक कर चिंतन-मंथन किया।

उत्तरप्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण वर्ग अब केंद्र में आ गया है। बहुजन समाज पार्टी के बाद अब समाजवादी पार्टी भी अपने परंपरागत वोट यादव-मुस्लिम के साथ ब्राह्मणों को जोड़ने के लिए अगस्त से सम्मेलन आयोजित करेगी। सपा के 30 साल के इतिहास में यह पहला मौका है, जब पार्टी ब्राह्मणों को जोड़ने का अभियान शुरू करने जा रही है।

रविवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ पार्टी के पांच ब्राह्मण नेताओं ने करीब ढाई घंटे लंबी बैठक कर चिंतन-मंथन किया। इस बैठक में विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय, पूर्व मंत्री मनोज पांडेय, प्रो. अभिषेक मिश्रा, पूर्व विधायक संतोष पांडेय और बलिया से पूर्व विधायक सनातन पांडेय व पवन पांडेय शामिल थे।

बैठक में तय हुआ कि पार्टी 15 अगस्त को पहला ब्राह्मण सम्मेलन मंगल पांडेय की धरती बलिया में आयोजित करेगी। सपा विधायक मनोज पांडेय ने कहा है कि भाजपा में ब्राह्मणों का सजावटी इस्तेमाल है। जबकि गरीबी, बदहाली और उत्पीड़न के शिकार ब्राह्मणों के गरीब बच्चों को नौकरियां चाहिए।

बसपा भी प्रदेश के 18 मंडलों में करेगी ब्राह्मण संगोष्ठी, अयोध्या में हो चुकी है
सपा से पहले बसपा सुप्रीमो मायावती भी बड़ा सियासी दांव चल चुकी हैं। मायावती ने राज्य के सभी 18 जिला मंडल में बसपा का सम्मेलन कराने की घोषणा की थी। इसकी शुरुआत अयोध्या से हो भी चुकी है। तीन दिन पहले बसपा नेता सतीश मिश्रा ने अयोध्या में ब्राह्मण संगोष्ठी की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि जितने ब्राह्मणों की हत्या हुई है, ब्राह्मण उससे सबक लें। 13% ब्राह्मण व 23% दलित एकजुट होंगे तो सरकार बनने से कोई नही रोक पाएगा।

मिश्र ने यह भी कहा था कि- वे कहते हैं कि ब्राह्मण को क्यों जोड़ रहे हैं। हम पूछते हैं कि उन्होंने ब्राह्मणों के लिए क्या किया? हम तो ब्राह्मण समाज के पास इसलिए आए हैं कि 10 सालों से ब्राह्मण समाज उपेक्षित है। उसे सम्मान दिलाना है। बसपा सरकार में 62 सीट ब्राम्हण जीते थे। ब्राह्मण समाज के कारण ही बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार आई थी।

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