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शेषन मजाक में कहते थे- मैं राजनीतिज्ञों को नाश्ते में खाता हूं; राजीव गांधी के मुंह से बिस्किट खींच लिया था

9 महीने पहले
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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ टीएन शेषन। (फाइल फोटो)
  • पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का रविवार रात चेन्नई में निधन हो गया, वे 87 साल के थे
  • उन्होंने 1990 से 1996 तक चुनाव आयोग की जिम्मेदारी संभाली
  • अर्जुन सिंह से लेकर लालू प्रसाद यादव को सिखाई हदें, लालू उन्हें जमकर लानतें भेजते थे
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नई दिल्ली. चुनाव आयोग को अलग पहचान देने वाले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का रविवार रात चेन्नई में निधन हो गया था। वे 87 साल के थे।  शेषन 1990 से 1996 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे। शेषन पर कांग्रेसी होने का ठप्पा लगा था। पर कांग्रेस खुद उनके फैसलों से परेशान थी। शेषन अक्सर मजाक में कहते थे कि मैं नाश्ते में राजनीतिज्ञों को खाता हूं।
 
मध्यप्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश में भाजपा सरकारों को भंग करने के बाद पूर्व मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा था कि इन राज्यों में चुनाव सालभर बाद होंगे। शेषन ने तुरंत प्रेस विज्ञप्ति जारी की, याद दिलाया कि चुनाव की तारीख मंत्रिगण नहीं, चुनाव आयोग तय करता है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव पर भी शेषन सख्त रहे। लालू, शेषन को जमकर लानतें भेजते। कहते कि शेषनवा को भैंसिया पे चढ़ाकर गंगाजी में हेला देंगे। बिहार में 1995 में 4 चरणों में चुनाव हुए थे।
 

सुरक्षा को लेकर सख्त
कैबिनेट सचिव रहे शेषन ने एक बार राजीव गांधी के मुंह से यह कहते हुए बिस्किट खींच लिया कि प्रधानमंत्री को वो चीज नहीं खानी चाहिए, जिसका पहले परीक्षण न किया गया हो।
 

स्वामी मनाते रहे, पर राजीव से मिलने के बाद ही आयुक्त बनने पर राजी हुए
शेषन के आयुक्त बनने की कहानी बेहद रोचक है। दिसंबर 1990 की रात करीब 1 बजे तत्कालीन केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी शेषन के घर पहुंचे। उन्होंने पूछा था, क्या आप अगला मुख्य चुनाव आयुक्त बनना पसंद करेंगे? करीब 2 घंटे तक स्वामी उन्हें मनाते रहे। पर राजीव गांधी से मिलने के बाद ही शेषन ने सहमति दी।
 

शेषन के चुनाव सुधार मिशन से ही प्रचार के गलत तरीके रुके
उम्मीदवारों के खर्च पर लगाम हो या फिर सरकारी हेलिकॉप्टर से चुनाव प्रचार के लिए जाने पर रोक शेषन ने ही लगाई। दीवारों पर नारे, पोस्टर चिपकाना, लाउडस्पीकरों से शोर, प्रचार के नाम पर सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाले भाषण देना, उन्होंने सब पर सख्ती की।
 

चुनौती मिली तो यात्रियों से भरी बस 80 किमी तक चलाकर दिखा दी
जब शेषन चेन्नई में ट्रांसपोर्ट कमिश्नर थे, तो सवाल उठा कि उन्हें ड्राइविंग और बस इंजन की जानकारी नहीं है, तो ड्राइवरों की समस्या कैसे हल करेंगे? इस पर शेषन ने ड्राइविंग के साथ बस का इंजन खोलकर दोबारा फिट करना सीखा। चेन्नई में बस हड़ताल के वक्त यात्रियों से भरी बस 80 किमी तक चलाकर ले गए।
 

उनके नाम से बाहुबली और उद्दंड राजनेताओं के दिल में भगवान का भय पैदा हो जाता था 

  • पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने बताया कि टीएन शेषन के निधन से तीन दशक पहले लोकतंत्र को मजबूत बनाने के शानदार युग का अंत हो गया। 1990 के दशक के आरंभिक सालों में उनका नाम भर लेने से बाहुबली और उद्दंड राजनेताओं के दिल में भगवान का भय पैदा हो जाता था। वहीं, हरेक भारतवासी का दिल सम्मान से भर उठता था। उनके बाद के मुख्य चुनाव आयुक्तों को उस पहचान का लाभ मिला जो उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के पद को दिलाई। हालांकि, हम हमेशा इस बोझ में भी दबे रहे कि हमारी तुलना शेषन के साथ हो रही है। मैंने कई बार पर्यवेक्षक के रूप में उनके अधीन काम किया। एक बार उन्होंने मुझे बिहार के दानापुर भेजा, जो लालू प्रसाद यादव का निर्वाचन क्षेत्र था।
  • उन्होंने बताया, \"एक अन्य अवसर पर मुझे मेयलापुर में ठहराया गया, जहां जयललिता रहती थीं और जहां शेषन का घर भी था। उनका इन दोनों ही राजनीतिक महाबलियों के साथ टकराव चल रहा था जिससे मेरे कठिन काम की चुनौती और बढ़ गई। मुझे 1996 का बिहार चुनाव याद है जब मैं एक पर्यवेक्षक के रूप में तैनात था। शेषन ने मुझसे कहा कि चिंता मत करो कुछ नहीं होगा - सिवाय आपके आसपास बम फटने और गोली चलने के। वास्तव में यही हुआ। मुझसे कुछ ही दूरी पर दो बम धमाके हुए।
  • \"कुछ महीने पहले मेरी एक किताब प्रकाशित हुई, \"द ग्रेट मार्च ऑफ डेमोक्रेसी - सेवेन डिकेड्स ऑफ इंडियाज इलेक्शंस\" इसमें शेषन जी का लिखा एक चैप्टर भी था। इसमें उन्होंने बताया था कि चुनावी व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए उनको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। किताब में उन पर फ्रेंच प्रोफेसर क्रिस्टोफर जैफ्रीलॉट का लिखा अध्याय भी था। मुझे खुशी है कि मैंने वह किताब दो महान लोगों को समर्पित की - पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन और टीएन शेषन - जो चुनाव आयोग को उसके अधिकार, विश्वसनीयता और पहचान के मामले में नई ऊंचाइयों तक ले गए।\"

 

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