अवसान / पूर्व चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का निधन, चुनावों में पहचान पत्र की शुरुआत करवाई थी; तीन किस्से



टीएन शेषन। फाइल फोटो टीएन शेषन। फाइल फोटो
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टीएन शेषन। फाइल फोटोटीएन शेषन। फाइल फोटो

  • चेन्नई में रविवार को घर में कार्डियक अरेस्ट के बाद टीएन शेषन का निधन हुआ
  • टीएन शेषन यानी तिरुनेल्लई नारायण अय्यर शेषन का जन्म 15 दिसंबर 1932 को केरल के पलक्कड़ जिले में हुआ था
  • टी एन शेषन ने 1990 से लेकर 1996 तक मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला था।

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2019, 11:38 PM IST

चेन्नई. पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त टीएन शेषन का रविवार को निधन हो गया। 87 वर्ष के शेषन ने कार्डियक अरेस्ट के बाद चेन्नई में अंतिम सांस ली। भारत के 10वें मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का पूरा नाम तिरुनेलै नारायण अय्यर शेषन था। वह 12 दिसंबर 1990 से 11 दिसंबर, 1996 तक इस पद पर रहे।

 

शेषन के बारे में कहा जाता था- राजनेता भगवान से डरते हैं, या शेषन से
टीएन शेषन यानी तिरुनेलै नारायण अय्यर शेषन का जन्म 15 दिसंबर 1932 को केरल के पलक्कड़ जिले में हुआ था। टीएन शेषन ने 1990 से लेकर 1996 तक मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला था। इस दौरान उन्होंने भारतीय चुनाव प्रणाली में कई बदलाव किए। मतदाता पहचान पत्र की शुरुआत भी भारत में उन्हीं के द्वारा शुरू की गई थी। 1996 में उन्हें रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। उनके विषय में प्रसिद्ध था, 'राजनेता सिर्फ दो लोगों से डरते हैं, एक भगवान और दूसरे शेषन'।

 

टीएन शेषन

 

पहला किस्सा- अपराधियों से कहा था- अग्रिम जमानत करा लें
1992 के उत्तर प्रदेश चुनाव में शेषन ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों, पुलिस अफसरों और 280 पर्यवेक्षकों से कह दिया था कि एक भी गलती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अखबारों में छपी कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, तब एक रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा था- ‘हम एक दयाविहीन इंसान की दया पर निर्भर हैं।’ सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही शेषन ने करीब 50,000 अपराधियों को ये विकल्प दिया था कि या तो वो अग्रिम जमानत ले लें या खुद को पुलिस के हवाले कर दें।

 

दूसरा किस्सा- पहचान पत्र का इस्तेमाल शेषन की वजह से शुरू हुआ
चुनाव में पहचान पत्र का इस्तेमाल शेषन की वजह से ही शुरू हुआ। शुरुआत में जब नेताओं ने यह कहकर विरोध किया कि भारत में इतनी खर्चीली व्यवस्था संभव नहीं है तो शेषन ने कहा था- अगर मतदाता पहचान पत्र नहीं बनाए, तो 1995 के बाद देश में कोई चुनाव नहीं होगा। कई राज्यों में तो उन्होंने चुनाव इसलिए स्थगित करवा दिए, क्योंकि पहचान पत्र तैयार नहीं हुए थे।

 

तीसरा किस्सा- हिमाचल के राज्यपाल को शेषन की वजह से पद छोड़ना पड़ा
1993 में हिमाचल के तत्कालीन राज्यपाल गुलशेर अहमद बेटे का प्रचार करने सतना पहुंच गए। अखबारों में तस्वीर छपी। गुलशेर को पद छोड़ना पड़ा। लालू प्रसाद यादव को सबसे ज्यादा जीवन में किसी ने परेशान किया, तो वे शेषन ही थे। 1995 का चुनाव बिहार में ऐतिहासिक रहा। लालू, शेषन को जमकर लानतें भेजते। कहते- शेषनवा को भैंसिया पे चढ़ाकर के गंगाजी में हेला देंगे। बिहार में चार चरणों में चुनाव का ऐलान हुआ और चारों बार तारीखें बदली गईं। यहां सबसे लंबे चुनाव हुए।

 

शेषन ने ‘द डीजेनरेशन ऑफ इंडिया’, ‘ए हर्ट फुल ऑफ बर्डन’ नाम की पुस्तकें लिखीं

  • टीएन शेषन का जन्म केरल के पलक्कड़ जिले के तिरुनेलै गांव में 15 दिसम्बर 1932 को हुआ था।
  • उनका पूरा नाम तिरुनेलै नारायण अय्यर शेषन था। उनकी पत्नी का नाम जयलक्ष्मी शेषन था।
  • उन्होंने मद्रास के क्रिश्चियन कॉलेज से स्नातक परीक्षा पास की। कुछ समय वहां व्याख्याता भी रहे।
  • शेषन देश के 10वें मुख्य चुनाव आयुक्त बने और उनका कार्यकाल 1990 से 1996 तक रहा।
  • उन्हें 1996 में रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
  • उन्होंने हर मतदाता को पहचान पत्र दिलाने की शुरुआत की।
  • सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने देशभक्त ट्रस्ट बनाया।
  • वर्ष 1997 में उन्होंने राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा, लेकिन केआर नारायणन से हार गए।
  • दो वर्ष बाद कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके।
  • उन्होंने ‘द डीजेनरेशन ऑफ इंडिया’ और ‘ए हर्ट फुल ऑफ बर्डन’ पुस्तकें भी लिखीं।

 

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