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  • Former TERI chief and environmentalist RK Pachauri died; During his tenure, the IPCC won the Nobel

अवसान / पर्यावरणविद आरके पचौरी का निधन, उनके कार्यकाल में आईपीसीसी ने नोबेल जीता था

आरके पचौरी इंटरगर्वमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) के 2002 से 2015 तक चेयरमैन भी रहे हैं। आरके पचौरी इंटरगर्वमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) के 2002 से 2015 तक चेयरमैन भी रहे हैं।
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आरके पचौरी इंटरगर्वमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) के 2002 से 2015 तक चेयरमैन भी रहे हैं।आरके पचौरी इंटरगर्वमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) के 2002 से 2015 तक चेयरमैन भी रहे हैं।

  • आरके पचौरी को पिछले साल मैक्सिको में स्ट्रोक आया था, इसके बाद उनकी ओपन हार्ट सर्जरी की गई थी
  • 2015 में एक महिला सहयोगी द्वारा यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद उन्होंने आईपीसीसी से इस्तीफा दे दिया था

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2020, 08:43 AM IST

नई दिल्ली. द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) के संस्थापक डॉ. आरके पचौरी का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार को निधन हो गया। वे 79 साल के थे। वे हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें बुधवार को लाइफ सपोर्ट पर रखा गया था। वे दिल्ली के एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट में भर्ती थे। पिछले साल मैक्सिको में स्ट्रोक आने के बाद पचौरी की ओपन हार्ट सर्जरी की गई थी। पचौरी 15 साल आईपीसीसी के चेयरमैन रहे। उन्हीं के कार्यकाल में संस्थान को नोबेल शांति पुरस्कार मिला।

टेरी ने डॉ. पचौरी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। एक बयान में कहा, “पूरा टेरी परिवार दुख की इस घड़ी में डॉ. पचौरी के परिवार के साथ खड़ा है।” 2015 में पचौरी के बाद टेरी प्रमुख बने डॉ. अजय माथुर ने कहा, “टेरी आज जो कुछ भी है, वह डॉ. पचौरी की अथक परिश्रम के बलबूते ही है। उन्होंने इस संस्थान को आगे बढ़ाने में बहुत ही महती भूमिका निभाई। इसके चलते यह दुनिया का सबसे प्रमुख संस्थान बनकर उभरा।” टेरी के चेयरमैन नितिन देसाई ने डॉ. पचौरी के योगदान को वैश्विक विकास के लिए अद्वितीय बताया। उन्होंने कहा, “जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल को दिए नेतृत्व के कारण ही आज जलवायु परिवर्तन को लेकर बातचीत हो रही है।”

2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किए गए थे

2015 में उनकी एक महिला सहयोगी ने उनपर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इसके बाद उन्होंने 2015 में संस्थान से इस्तीफा दे दिया था। 2018 में दिल्ली की एक अदालत ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप तय किए थे। हालांकि डॉ. पचौरी लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे। पचौरी 2002 से 2015 तक इंटरगर्वमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) के चेयरमैन भी रहे हैं। उनके कार्यकाल में आईपीसीसी को नोबेल शांति पुरस्कार मिला। पर्यावरण के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2001 में पद्म भूषण और 2008 में पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा।

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