बिना पायलट पहले कॉम्बैट एयरक्राफ्ट ने उड़ान भरी:टेकऑफ से लैंडिग तक सब प्लान के मुताबिक, DRDO के साथ देश को भी बड़ी कामयाबी

नई दिल्ली3 महीने पहले

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी। इस अनमैन्ड यानी बिना पायलट वाले एयरक्राफ्ट ने शुक्रवार को कर्नाटक के चित्रदुर्ग में एरोनॉटिकल टेस्ट रेंज से उड़ान भरी। एयरक्राफ्ट की खास बात है कि ये फुली ऑटोमैटिक है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO को सफल उड़ान की बधाई दी।

ऑटोमैटिक मोड पर ऑपरेशनल
DRDO ने कहा- ये पूरी तरह से ऑटोमैटिक मोड पर काम करेगा। विमान की टेस्ट फ्लाइट पूरी तरह कामयाब रही। इसमें टेक-ऑफ, वे पॉइंट नेविगेशन और टचडाउन शामिल हैं। यह उड़ान भविष्य के अनमैन्ड एयरक्राफ्ट के लिए अहम टेक्नोलॉजी साबित होगी। इससे स्ट्रैटेजिक डिफेंस टेक्नोलॉजी में देश को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद मिलेगी।

टर्बोफैन इंजन से किया जाएगा ऑपरेट
इस टेक्नोलॉजी को बेंगलुरु के वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (AED) ने डिजाइन किया है। ये विमान एक छोटे टर्बोफैन इंजन के जरिए ऑपरेट किया जाता है। इसमें एयरफ्रेम के साथ अंडर कैरिज, फ्लाइट कंट्रोल और एवियोनिक्स सिस्टम को पूरी तरह देश में तैयार किया गया है।

हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट
29 जून को हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (HEAT) का भी सक्सेसफुल टेस्ट किया गया था। इसकी टेस्टिंग DRDO ने ओडिशा के चांदीपुर में एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से की गई। ये मिसाइलों को सीधे टारगेट बनाएगा। इस कॉम्बैट ड्रोन का इस्तेमाल मिसाइलों की निगरानी और उन्हें गिराने के लिए भी किया जाएगा।

कम ऊंचाई पर किया गया परीक्षण
टेस्ट फ्लाइट के दौरान इस फ्लाइंग कॉम्बैट सिस्टम ने बेहतर और सटीक प्रदर्शन किया। इसे कम ऊंचाई पर उड़ाया गया ताकि भविष्य में सी-स्कीमिंग मिसाइलों जैसे ब्रह्मोस का परीक्षण किया जा सके। परीक्षण के दौरान ट्विन अंडर-स्लंग बूस्टर का इस्तेमाल करके हवाई वाहन को लॉन्च किया गया था। यह छोटी गैस टर्बाइन इंजन के जरिए ऑपरेट किया गया है, जो सब-सोनिक स्पीड से उड़ान को बनाए रखता है।

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