सरकार का दावा / दिवाली पर ग्रीन पटाखे मिलेंगे; सच: 80 फीसदी कारीगर शिवाकाशी में, किसी के पास लाइसेंस तक नहीं



Government claims: Green crackers will be available on Diwali
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Government claims: Green crackers will be available on Diwali

  • सरकार ने सहमति पत्र गिनाए, पर निर्माण को पीईएसओ लाइसेंस जरूरी
  • ग्रीन पटाखों के फॉर्मूले को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी का इंतजार, 22 को सुनवाई होनी है

Dainik Bhaskar

Oct 06, 2019, 03:37 AM IST

नई दिल्ली/रोहतक (रत्न पंवार). विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने शनिवार को कहा है कि इस बार दिवाली पर देश भर में प्रदूषण कम करने वाले ग्रीन पटाखे बाजार में मिलेंगे। इनमें अनार, पेंसिल, चकरी, फुलझड़ी और सुतली बम शामिल हैं। इनसे प्रदूषण 30% कम होगा।

 

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि सुप्रीम काेर्ट ने 2018 में पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद ग्रीन पटाखों पर विचार किया गया। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने ग्रीन पटाखों काे बनाने में अहम काम किया। पटाखा कंपनियाें से करीब 230 सहमति-पत्रों और 165 नाॅन डिसक्लोजर एग्रीमेंट्स (एनडीए) पर हस्ताक्षर किए हैं। 


दूसरी ओर इंडियन फायरवर्क्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जयराम तमिल सेल्वन ने शनिवार रात भास्कर से कहा कि मंत्री के दावे का मतलब यह नहीं है कि सभी लोग ग्रीन पटाखे बनाएंगे ही। ये सिर्फ जनता को गुमराह करने का प्रयास है। पटाखे बनाने के लिए सहमति पत्र और एनडीए के बजाए पीईएसओ से लाइसेंस लेना जरूरी है। शिवाकाशी में किसी भी निर्माता ने यह लाइसेंस नहीं लिया है। ऐसा कोई फॉर्मूला नहीं है कि पटाखों से प्रदूषण जीरो हो जाए। देश के 80% पटाखों का निर्माण तमिलनाडु के शिवाकाशी में ही होता है। 

 

समस्या के 4 अहम पहलू

ग्रीन पटाखों के फॉर्मूले पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है। इस पर 22 अक्टूबर को सुनवाई है और 5 दिन बाद 27 को दिवाली है। इंडस्ट्री असमंजस में है।

 

  • 1. अप्रैल से सुनवाई के बिना तारीख खिसक रही: पटाखा निर्माताओं का कहना है कि पोटेशियम नाइट्रेट पहले भी पटाखों में डाला जाता था। इसके विकल्प के तौर पर ही बेरियम नाइट्रेट को लाया गया। पर इस पर अभी सुप्रीम काेर्ट के आदेश नहीं आए हैं। दिवाली से महज 5 दिन पहले 22 अक्टूबर को सुनवाई होगी। ग्रीन पटाखों के फॉर्मूले को अंतिम मंजूरी सुप्रीम कोर्ट को ही देनी है।
  • 2. ट्रेडर बोले: सिर्फ 28 के पास ग्रीन पटाखों का लाइसेंस: दिल्ली-एनसीआर फायरवर्क्स ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रधान सुभाष कालरा का कहना है कि देशभर के 1 हजार बड़े पटाखा निर्माताओं में से सिर्फ 28 ने ग्रीन पटाखे का लाइसेंस लिया है। ये इंडस्ट्री तीन साल से मंदी से जूझ रही है। इन्हें स्टाफ भी कम करना पड़ा है। ज्यादा माल बनाने के लिए अभी इंडस्ट्री में पर्याप्त कामगार भी नहीं बचे हैं। 
  • 3. लोगो और क्यूआर कोड लगाने का समय बेहद कम: सुप्रीम कोर्ट और सरकार की व्यवस्था के अनुसार ग्रीन पटाखों के डिब्बों पर भी इसका लोगो और क्यूआर कोड होना चाहिए। इस वजह से अब नए प्रिंट वाले बॉक्स तैयार करवाने होंगे। अब नए डिब्बे बनवाने का समय बेहद कम है। निर्माता तरुण कालरा ने कहा कि डिब्बों की कमी की वजह से भी हम कम माल बनवा रहे हैं।
  • 4. नए फॉर्मूले पर पटाखे बनाने में भी दिक्कत:  निर्माताओं के मुताबिक एनईईआरआई ने बैरियम नाइट्रेट और पोटेशियम नाइट्रेट के साथ 19 तरह के केमिकल का विकल्प दिया है। विकल्प के तौर पर पोटेशियम नाइट्रेट को इस्तेमाल सीधे नहीं किया जा सकता। जियोलाइट पैलेट्स का एडिटिव केमिकल भी विकल्प में है। पर इन केमिकल की कमियों के चलते पटाखा बनाने में दिक्कतें आ रही हैं।

 

ग्रीन पटाखों से 30% प्रदूषण कम होगा, शोर भी कम होगा

  • एनईईआरआई और सीएसआईआर ने पटाखों में इस्तेमाल होने वाले बेरियम नाइट्रेट के स्तर की जांच कर ग्रीन पटाखों का नया मानक बनाया।
  • ग्रीन पटाखों में 30 से लेकर 90% तक बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल कम किया गया। कुछ पटाखों में इसका बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया।
  • ग्रीन पटाखाें की पहचान के लिए एनईईआरआई का ग्रीन लोगो और क्यूआर कोड दिया है। इस कोड की जांच से असलियत का पता लगा सकते हैं।
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