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उत्तर प्रदेश / हाईकोर्ट का सुझाव- सरकार शिया और सुन्नी की जगह मुस्लिम वक्फ बोर्ड बनाने पर विचार करे



प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार को दिया निर्देश
  • वक्फ अधिनियम की धारा 13 (2) के अनुसार, प्रदेश में शिया और सुन्नी अलग-अलग बोर्ड की स्थापना विधि सम्मत नहीं

Dainik Bhaskar

Nov 16, 2019, 03:24 PM IST

लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शुक्रवार को राज्य सरकार को मुस्लिम वक्फ बोर्ड बनाने का सुझाव दिया है। अभी शिया और सुन्नियों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड हैं। यह आदेश जस्टिस पंकज जायसवाल और जस्टिस आलोक माथुर की बेंच ने मसर्रत हुसैन की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है।

 

हुसैन ने याचिका में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों को खत्म कर मुलिस्म वक्फ बोर्ड बनाने की मांग की थी। उनकी दलील थी कि वक्फ अधिनियम की धारा 13 (2) के मुताबिक, राज्य सरकार चाहे तो शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों की अलग-अलग स्थापना कर सकती है। ऐसा तभी संभव है, जब प्रदेश में शिया वक्फ की संख्या कुल वक्फों से कम से कम 15% हो अथवा वक्फों की संपत्तियों से शिया वक्फों की कुल आय 15% हो।

 

याचिका के मुताबिक, प्रदेश में न तो शिया वक्फ की संपत्तियां 15 फीसदी हैं और न ही इन संपत्तियों से इतनी आय है, लिहाजा अधिनियम की धारा 13 (2) के अनुसार प्रदेश में शिया और सुन्नी अलग-अलग वक्फ बोर्ड की स्थापना विधि सम्मत नहीं है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, 24 सितंबर 2019 को सरकार को भी प्रार्थनापत्र देकर यह मांग की गई थी, जिस पर कोई विचार नहीं किया गया।

 

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