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एंटी हेट स्पीच कानून बनाने की तैयारी में सरकार:हेट स्पीच की परिभाषा तय होगी, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां होंगी कानून का आधार

नई दिल्ली5 महीने पहलेलेखक: मुकेश कौशिक
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केंद्र सरकार ने 5 साल के लंबे परामर्श के बाद सोशल मीडिया पर नफरती कंटेंट रोकने के लिए एंटी हेटस्पीच कानून बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। हेटस्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों, अन्य देशों के कानूनों और अभिव्यक्ति की आजादी के तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कानून का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। इसे जल्द ही सार्वजनिक राय के लिए पेश किया जाएगा। इसमें हेटस्पीच की परिभाषा स्पष्ट होगी, ताकि लोगों को भी यह पता रहे कि जो बात वे बोल या लिख रहे हैं, वह कानून के दायरे में आती है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां होंगी कानून का आधार
सरकार ने प्रवासी भलाई संगठन बनाम भारतीय संघ जैसे कुछ अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को इस ड्राफ्ट का आधार बनाया है। विधि आयोग ने हेटस्पीच पर अपने परामर्श पत्र में साफ किया है कि यह जरूरी नहीं कि सिर्फ हिंसा फैलाने वाली स्पीच को हेटस्पीच माना जाए। इंटरनेट पर पहचान छिपाकर झूठ और आक्रामक विचार आसानी से फैलाए जा रहे हैं। ऐसे में भेदभाव बढ़ाने वाली भाषा को भी हेटस्पीच के दायरे में रखा जाना चाहिए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुलेगा
हेट स्पीच की परिभाषा साफ होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूजर्स द्वारा फैलाई गईं फेक न्यूज या नफरत भरी बातों से पल्ला नहीं झाड़ सकेंगे। देश में सबसे ज्यादा भ्रामक जानकारियां फेसबुक, ट्विटर, वॉट्सएप, कू जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए फैलाई जाती हैं। अब इनके खिलाफ सख्त कानून बनने से कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल जाएगा। दूसरी ओर, देश में फ्री स्पीच के पैरोकार वर्ग को यह भी लगता है कि एंटी हेटस्पीच कानून को इस्तेमाल लोगों या समूहों की आवाज दबाने के लिए भी हो सकता है।

अभी 7 अलग-अलग कानूनों से कार्रवाई हो रही
देश में हेटस्पीच से निपटने के लिए 7 तरह के कानून इस्तेमाल किया जाते हैं, लेकिन इनमें से किसी में भी हेटस्पीच को परिभाषित नहीं किया गया है। इसीलिए, सोशल मीडिया प्लेटफार्म अपने यूजर्स को मनमानी भाषा बोलने से नहीं रोक रहे हैं।

ये हैं मौजूदा प्रावधान

1. भारतीय दंड संहिता

  • धारा 124ए (राजद्रोह): इस पर रोक लगाई जा चुकी है।
  • धारा 153ए: धर्म, नस्ल आदि के आधार पर वैमनस्य।
  • धारा 153बी: राष्ट्रीय एकता के खिलाफ बयान।
  • 295ए और 298: धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना।
  • धारा 505 (1) और (2) अफवाह या नफरत भड़काना।

2. जन प्रतिनिधि कानून

  • धार्मिक, जातीय या भाषायी आधार पर चुनावी दुराचरण।

3. नागरिक अधिकार अधिनियम, 1955
4. धार्मिक संस्था कानून
5. केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमन कानून
6. सिनेमैटोग्राफी कानून
7. आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973

यूरोपीय संघ और अमेरिका में हेटस्पीच की परिभाषा तय है
यूरोपीय देश: असहिष्णुता के आधार पर नस्लीय घृणा के खिलाफ गलत बयानबाजी या भड़काऊ बयान को जायज ठहराना हेटस्पीच माना जाता है।

अमेरिका: अमेरिकी संविधान का पहला संशोधन ही संसद को मुक्त अभिव्यक्ति पर अंकुश लगाने का कानून बनाने से रोकता है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी कि ‘घटिया अभिव्यक्ति’ पर अंकुश लगाने वाले कानून संवैधानिक माने जाएंगे।