निवेश / सरकार का रिटेल निवेशकों को ईटीएफ निवेश में टैक्स छूट देने पर विचार

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  • डीआईपीएएम ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज से सुझाव मांगे 
  • 80 सी के तहत इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम का लाभ ईटीएफ के निवेशकों को भी देने की तैयारी
  • सरकारी बैंकों, इंश्योरेंस और वित्तीय संस्थाओं के स्टॉक वाले ईटीएफ शुरू करने पर विचार

Jul 04, 2019, 04:29 PM IST

नई दिल्ली. सरकार दो एक्सचेंज ट्रेडेड फंड सीपीएसई और भारत-22 ईटीएफ में रिटेल निवेशकों को टैक्स छूट देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक असेट मैनेजमेंट (दीपम) ने इस मुद्दे पर सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) से सुझाव मांगा है। एक आधिकारिक सूत्र के मुताबिक दीपम ने सीबीडीटी से सुझाव मांगा है कि क्या आयकर के सेक्शन 80 सी के तहत इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) के लाभ को इन ईटीएफ के रिटेल निवेशकों को भी दिया जा सकता है?

निवेश पर तीन साल का लॉक-इन पीरियड रहेगा

दीपम की योजना के मुताबिक सीपीएसई और भारत-22 ईटीएफ के रिटेल निवेशकों को ईएलएसएस म्यूचुअल फंड के निवेशकों की तरह टैक्स छूट का विकल्प दिया जाएगा। हालांकि, इसमें किए गए निवेश पर तीन साल का लॉक-इन रहेगा। इन निवेशकों के पास विकल्प होगा कि वे ईएलएसएस श्रेणी को न चुनकर इनमें ट्रेड कर सकते हैं। सूत्र ने बताया कि दीपम ने इस मामले पर कर विभाग की राय मांगी है। अगर सीबीडीटी इस पर अपनी सहमति देता है तो दीपम 2019-20 के बजट में इसे पेश करने के लिए रूपरेखा तैयार करेगा। डायरेक्ट टैक्स के लिए सीबीडीटी सर्वोच्च संस्था है। इस कदम से ईटीएफ में रिटेल निवेश बढ़ेगा साथ ही परिवारों का निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

मौजूदा समय में आईटी एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत ईएलएसएस म्यूचुअल फंड 1.50 लाख रुपए तक की छूट प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन इसमें तीन साल का लॉक-इन पीरियड रहेगा। मौजूदा दोनों ईटीएफ में निवेशकों की भारी रुचि को देखते हुए सरकार ने पीएसयू बैंक, इंश्योरेंस और फाइनेंस सेक्टर से भी ईटीएफ लॉन्च करने की योजना बनाई है। घरेलू बाजार में सरकार इन दो ईटीएफ से अब तक 32,900 करोड़ रुपए जुटा चुकी है।

सीपीएसई ईटीएफ से पांच चरणों में 38,000 करोड़ रुपए जुटा चुकी है। सीपीएसई विनिवेश से पिछले वित्त वर्ष में 85,000 करोड़ रुपए जुटाए थे। इस वित्त वर्ष में 90,000 करोड़ रुपए जुटाने की योजना है।

सरकार के पास अभी सीपीएसई और भारत-22 नाम से दो एक्सचेंज ट्रेडेड फंड हैं, जो घरेलू शेयर बाजार में लिस्टेड हैं। ईटीएफ म्यूचुअल फंड की तरह काम करते हैं और ये सरकारी कंपनियों के अंडरलाइन एसेट होते हैं। डेरीवेटिव्स का मूल्यांकन करने में अंडरलाइन एसेट काम आते हैं। इसके अलावा सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, इंश्योरेंस और फाइनेंस सेक्टर के शेयरवाले ईटीएफ को शुरू करने की योजना पर काम कर रही है। इसकी व्यावहारिकता को जानने के लिए सरकार ने सलाहकारों से बोली आमंत्रित की है।

केपीएमजी के एक सर्वे के अनुसार आने वाले बजट में टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाया जा सकता है और 10 करोड़ रुपए से ऊपर की आय पर 40 फीसदी का टैक्स लग सकता है। सर्वे में शामिल 74 फीसदी लोगों का कहना है कि सरकार आयकर सीमा की छूट में बढ़ोतरी करेगी, 58 फीसदी लोगों का कहना है कि सुपर रिच लोगों पर सरकार 40 फीसदी का टैक्स लगा सकती है। 65 फीसदी लोगों का मानना है कि घरों की मांग को बढ़ाने के लिए सरकार होम लोन पर टैक्स छूट की सीमा को बढ़ा सकती है।

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