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छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाकों से ग्राउंड रिपोर्ट:कोरोना के बिगड़ते हालात के बीच पॉजिटिव खबर, नक्सल प्रभावित 13 गांवों में 45+ के सभी 775 लोग वैक्सीन लगवा चुके

सुकमाएक महीने पहलेलेखक: सुकमा से मोहम्मद इमरान नेवी और सूरज यदु

आंध्रप्रदेश और तेलंगाना से सटे छत्तीसगढ़ के घोर नक्सल प्रभावित 13 गांव। यहां बिजली, मोबाइल नेटवर्क तो दूर की बात, आने-जाने के लिए सड़क तक नहीं है। एक सड़क जरूर कोंटा से होते हुए इन सबमें (13 गांव) सबसे बड़े गांव गोलापल्ली तक जाती है, जिसे जगह-जगह नक्सलियों ने काट दिया है।

बड़े-बड़े पत्थरों के बीच से गुजरे इस रास्ते पर करीब 25 बरसाती नाले हैं, जिन पर पुल नहीं है। इस पूरे इलाके में नक्सली स्मारक बने हैं, जिनकी तस्वीर लेने की मनाही है। इतने विपरीत हालात के बावजूद इन 13 गांवों में कोरोना को लेकर गजब की जागरूकता दिखी। इन गांवों में 45 से अधिक उम्र के हर व्यक्ति ने वैक्सीनेशन करवा लिया है। इस आयु वर्ग के सभी 775 लोगों का वैक्सीनेशन पूरा हो चुका है। इन गांवों में सड़क भले न हो, लेकिन कोरोना की टेस्टिंग की सुविधा भी है। पढ़े छत्तीसगढ़ के सुकमा से ग्राउंड रिपोर्ट..

फोटो खींचना लेकिन दादा (नक्सली) लोगों की जानकारी मत रखना
भास्कर की टीम जब इन गांवों में पहुंची तो नक्सलियों के कई फरमान सुनने को मिले। गांववालों ने पहले ही बता दिया कि कोरोना से संबंधित जो भी खबर चाहिए, फोटो लेनी है वो खींच लो लेकिन दादा (नक्सली) लोगों से जुड़ी कोई जानकारी फोटो या वीडियो में नहीं दिखनी चाहिए। चेताया भी गया कि ऐसा हुआ तो कैमरा और मोबाइल जब्त कर लिए जायेंगे।

टीम ने भी नक्सली फरमान माना और रिपोर्टिंग की शुरुआत की। कोंटा से होते हुए गोलापल्ली पहुंचने में छह घंटे का समय लगा, इस दौरान कुछ सफर बाइक तो कुछ पैदल तय करना पड़ा। यहां लोगों की जागरूकता इससे ही समझी जा सकती है कि लगभग हर गांव के बाहर बाहरी लोगों के गांव में प्रवेश पर प्रतिबंध के बैनर लगे हुए हैं।

​​​​​​आंध्र के नए वेरियंट के डर से गांव के लोग टेस्ट करवा रहे हैं
करीब-करीब सभी गांवों में बाहर से आये लोगों के लिए आइसोलेशन सेंटर बनाये गए हैं। यह सेंटर पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्रों में बने हैं। इनकी देखरेख का जिम्मा पंचायत सचिव, रोजगार सहायकों और गांव-गांव में तैनात RMA व ANM पर है।

मेहता गांव के सचिव मोहम्मद जावेद बताते हैं कि कोरोना के पहले दौर में गांवों में ऐसी सजगता नहीं थी, लेकिन दूसरी लहर आने के बाद हालात बदले हैं। गांव के ज्यादातर लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं लेकिन वे आंध्र में फैले कोरोना के नए वेरियंट के बारे में जानकर सहमे हुए हैं। यही कारण है कि अब लोग गांवों में कोरोना टेस्ट करवाने के लिये तैयार हो रहे हैं।

गांव के ज्यादातर लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं लेकिन वे आंध्र में फैले कोरोना के नए वेरियंट के बारे में जानकर सहमे हुए हैं। यही कारण है कि लोग टेस्ट करवाने के लिये तैयार हो रहे हैं।
गांव के ज्यादातर लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं लेकिन वे आंध्र में फैले कोरोना के नए वेरियंट के बारे में जानकर सहमे हुए हैं। यही कारण है कि लोग टेस्ट करवाने के लिये तैयार हो रहे हैं।

सब डर रहे थे तब रिटायर्ड पोस्टमास्टर दंपती ने वैक्सीन लगवाई
गोलापल्ली और इससे सटे गांवों के लोग वैक्सीनेशन को लेकर घबरा रहे थे। तब गोलापल्ली में रहने वाले रिटायर्ड पोस्टमास्टर सुमन कुमार वर्मा और उनकी पत्नी ने मरईगुड़ा जाकर वैक्सीन लगवाई। सुमन कुमार बताते हैं कि एक वायल में 10 डोज होते हैं। जिस दिन मरईगुड़ा में वैक्सीनेशन हो रहा था उसी दिन खबर आई कि दो डोज बची है, यदि इसे किसी को नहीं लगाया गया तो डोज खराब होगी। इसके बाद मैंने और मेरी पत्नी ने वैक्सीनेशन करवा लिया। हमें दूसरी डोज भी लग चुकी है। गोलापल्ली में सबसे पहले इसी दंपती ने डोज लगावाई थी, इसके बाद गांव के 25 दंपतियों ने अगले सात दिनों के अंदर वैक्सीनेशन करवा लिया।

बुखार आने पर कहते थे खराब इंजेक्शन लगा दिया, अब समझ रहे
ऐसा नहीं है कि इन गांवों के लोग शुरू से वैक्सीनेशन के लिए जागरूक थे। गोलापल्ली के स्वास्थ्य केंद्र में तैनात ANM बीवी रमन्ना और प्रतिभा नेताम बताती हैं कि जब वैक्सीनेशन की शुरुआत हुई थी तब लोग कहते थे कि खराब हो चुके इंजेक्शन हमें लगा रहे हो।

दरअसल वैक्सीन लगवाने के बाद कुछ लोगों को सिरदर्द, बुखार जैसी शिकायतें आती हैं। ऐसे में गांव के लोग समझते थे कि खराब हो चुकी वैक्सीन लगाने से ऐसा हो रहा है। प्रतिभा बताती हैं कि अब भी कई गांव वाले ऐसा ही समझते हैं। हम लोगों को बता रहे हैं कि वैक्सीन खराब नहीं है बल्कि यह लक्षण है, और ऐसा होना सामान्य है।

मेहता गांव का आंगनबाड़ी केंद्र, जिसे क्वारेंटाइन सेंटर के लिए आरक्षित किया गया है। हालांकि यहां अभी कोई संदिग्ध मरीज नहीं है।
मेहता गांव का आंगनबाड़ी केंद्र, जिसे क्वारेंटाइन सेंटर के लिए आरक्षित किया गया है। हालांकि यहां अभी कोई संदिग्ध मरीज नहीं है।

सभी गांवों में एंटीजन और RT-PCR टेस्ट की सुविधा
जिन गांवों में टीम पहुंची उन गांवों के सब-सेंटरों में कोरोना की जांच के लिए RT-PCR, एंटीजन टेस्ट की व्यवस्था थी। गोलापल्ली सब-सेंटर में तैनात RHO गोविंद दिरधो बताते हैं कि हमारे सेंटर में कोरोना की जांच के लिए एंटीजन किट है। हम RT-PCR सैंपल भी लेते हैं। सैंपल गांव में ही कलेक्ट होते हैं फिर उसे कोंटा भेजा जाता है। लॉकडाउन से पहले तक हम हाट बाजार क्लिनिक में लोगों की कोरोना जांच कर रहे थे। सब सेंटरों में भी जांच कर रहे थे। अब लॉकडाउन लगने के बाद सिर्फ सब-सेंटर में ही कोरोना की जांच हो रही है।

ये हैं वो 13 गांव
राजगुड़ा, तारलागुड़ा, जिनालंका, भाकतीगुड़ा, गोलापल्ली, मनादीगुड़ा, रामपुरा, वंजागुड़ा, सिंगारम, मासौल, रसतंग, गोंदीगुड़ा, जबेली।

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