उत्तरप्रदेश से ग्राउंड रिपोर्ट / यहां वोट का रंग सांप्रदायिक, जितने कद्दावर नेता, उतनी ही हल्की भाषा

Dainik Bhaskar

Apr 18, 2019, 08:36 AM IST

उत्तरप्रदेश में तीसरे चरण की छह सीटों- रामपुर, संभल, आंवला, बरेली, मुरादाबाद, पीलीभीत का चुनावी गणित।

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  • मुद्दे जो यहां असर दिखाएंगे : बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं पर भारी पड़ रहा एयरस्ट्राइक का मुद्दा
  • छह सीटों पर 23 को मतदान : वरुण गांधी, आजम खान और जयाप्रदा जैसे बड़े चेहरों की परीक्षा होनी है

धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया, रामपुर/मुरादाबाद से. रामपुर में प्रवेश करते ही बड़े-बड़े ऊंचे गेट, भव्य चौराहे आपका स्वागत करते हैं। पिछले कुछ सालों से गेट/दरवाजे रामपुर की सियासत का अहम हिस्सा रहे हैं। कद्दावर और विवादित सपा नेता आजम खान ने मंत्री रहते अपनी जिद में नवाब के समय के सात गेट तुड़वाए थे। आजम की सत्ता जाने और योगी सरकार आने के बाद आजम के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर विश्वविद्यालय के सामने बना उर्दू गेट मार्च महीने में अतिक्रमण के कारण तोड़ दिया गया। रामपुर के गेट जितने बुलंद और भारी हैं, यहां नेताओं की भाषा उतनी ही हल्की हो चली है।


तेजी से बनते हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के बीच यहां 23 अप्रैल को मतदान है। रामपुर में करीब 52% मुस्लिम वोट हैं। वहीं मुरादाबाद में 8.8 लाख और संभल में 7.5 लाख मुस्लिम वोट हैं। शेष तीन सीटों पर भी चार से पांच लाख मुस्लिम वोटर्स हैं। भाजपा की कोशिश हिंदू वोटों को एक साथ लाने की है। मुरादाबाद में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी की अमरोहा, रामपुर में रैली हो चुकी हैं। आजम खान के लगातार बयानों के बाद यहां हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण बढ़ गया है।

 

सर्वाधिक दिलचस्प, चर्चित और नजदीकी मुकाबला रामपुर में हो रहा है। यहां कभी एक-दूसरे के साथी रहे और अब घनघोर विरोधी अभिनेत्री जयाप्रदा और आजम खान आमने-सामने हैं। 2004 में आजम खान ने सपा प्रत्याशी के रूप में जयाप्रदा के लिए वोट मांगे थे। बाद में वे अपमानजनक शब्दों पर उतर आए, जो अब तक जारी हैं। आजम खान सपा का सबसे बड़ा मुस्लिम चेहरा अवश्य हैं, लेकिन विरोध भी है।

 

रामपुर में 11 प्रत्याशी चुनाव में हैं जिनमें आजम समेत 8 मुस्लिम हैं। नौ बार विधायक और पांच बार मंत्री रहे आजम पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। आजम के अपमान से आहत जयाप्रदा नामांकन भरने के बाद रामलीला मैदान में रैली में फफक कर रो पड़ीं थीं। भाजपा ने यहां मौजूदा सांसद नेपाल सिंह की जगह जया को उम्मीदवार बनाया है। जयाप्रदा के बेटे सम्राट और आजम के पुत्र विधायक अब्दुल्ला अपने-अपने माता-पिता को जिताने में जुटे हैं। कांग्रेस ने पहली बार गैर-मुस्लिम प्रत्याशी के रूप में राष्ट्रीय सचिव संजय कपूर को उतारा है। 

 

मुरादाबाद में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। कांग्रेस और सपा ने शुरुआत में घोषित उम्मीदवारों को बदला है। कांग्रेस ने राजबब्बर को प्रत्याशी बनाया था, बाद में उन्हें फतेहपुर-सीकरी भेज मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी को प्रत्याशी बनाया। सपा ने पहले नासिर कुरैशी को उम्मीदवार बनाया था लेकिन आजम के विरोध के बाद उनके समर्थक एस.टी. हसन को उम्मीदवार घोषित किया। भाजपा ने सांसद सर्वेश सिंह को दूसरी बार मैदान में उतारा है।  स्थानीय मुद्दे जैसे अधूरे लोको ब्रिज, पीतल उद्योग की बदहाली के मुद्दे कहीं छिप गए हैं। प्रतापगढ़ी अपनी शायरी से लगातार मोदी पर हमलावर रहते हैं। भास्कर से बात करने पर उन्होंने कहा कि -


खुद को सच्चाई का ठेकेदार लिखने लग गए, बौखलाहट में सरे बाजार लिखने लग गए। 
एक नारे से हुकूमत इस कदर घबरा गई, चोर साहब खुद को चौकीदार लिखने लग गए।

 

संभल में ध्रुवीकरण साफ दिखाई देता है। सपा ने डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क को टिकट दिया है। बर्क वही हैं, जिन्होंने वंदे मातरम न गाने और अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण से मना कर दिया था। उनकी कट्टर छवि भाजपा उम्मीदवार परमेश्वर सैनी को गठबंधन के गैर-मुस्लिम वोट पाने में मदद कर सकते हैं। भाजपा ने मौजूदा सांसद सत्यपाल सैनी का टिकट काटकर बसपा से एमएलसी रहे दूसरे सैनी को टिकट दिया है। 90 हजार सैनी वोट इस क्षेत्र में हैं। वहीं कांग्रेस ने पूर्व विधायक और सौम्य छवि के मेजर जेपी सिंह को टिकट दिया है। 

 

मेनका गांधी का मजबूत चुनाव क्षेत्र रहे पीलीभीत में इस बार उनके पुत्र और सुल्तानपुर के सांसद वरुण गांधी भाजपा उम्मीदवार के रूप में उतरे हैं। मेनका गांधी पीलीभीत से सुल्तानपुर आ गई हैं। वरुण का मुकाबला सपा के पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा से हैं। कांग्रेस ने अपना दल-कृष्णा पटेल गुट के उम्मीदवार सुरेंद्र कुमार वर्मा को समर्थन है। यहां जनता दल यूनाईटेड के डॉ. भरत पटेल भी कुर्मी वोट के दम पर हलचल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। पीलीभीत पिछले छह चुनाव से भाजपा का गढ़ रही है लेकिन इस बार वरुण गांधी कड़े मुकाबले में हेमराज वर्मा से टक्कर ले रहे हैं।  

 

बरेली में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार को गठबंधन उम्मीदवार भगवत सरन गंगवार और कांग्रेस के प्रवीण सिंह ऐरन से त्रिकोणीय संघर्ष करना पड़ रहा है। सात बार इस क्षेत्र से सांसद रह चुके और एक बार चुनाव हार चुके संतोष गठबंधन के कठिन जातीय समीकरण से उलझ रहे हैं। 


आंवला में त्रिकोणीय संघर्ष है। यहां भाजपा ने धर्मेंद्र कश्यप को दोबारा टिकट दिया है। कश्यप को मौर्य, लोध, वाल्मीकि-शाक्य, कश्यप, ब्राह्मण और वैश्य वोटों के भाजपा के मजबूत आधार का भरोसा है। तो करीब चार लाख मुस्लिम वोटों को कांग्रेस के सर्वराज सिंह और बसपा की रुचि वीरा बांट रहे हैं। सपा से कांग्रेस में आए और कांग्रेस उम्मीदवार व पुराने नेता सर्वराज सिंह को राजपूत और मुस्लिम वोट का सहारा है। रुचि वीरा का बाहरी होना उन्हें भारी पड़ सकता है।


सबसे हॉट सीट: रामपुर...आजम-जयाप्रदा

 

मुसलमानों से वोट का हक छीन लो तो फसाद ही खत्म : आजम खान

 

  • भास्कर: आपके लिए कितना अलग है यह चुनाव? 
  • आजम : हम (मुसलमान) तो गरीब-कमजोर लोग हैं। बिल्ली, कुत्ते...मोदी-योगी बोलकर बता देते हैं कि हम क्या हैं। ये कम है जो देश में रहने देते हैं, क्या पता वोट का हक ही छीन लें। हम भी कहते हैं कि वोट का हक ही छीन लो तो फसाद खत्म। 
  • भास्कर: आपने दो बार जयाप्रदा को लड़ाया, अब वे आपके सामने हैं?
  • आजम:  कुछ और पूछिए। 
  • भास्कर: आप सिर्फ मुस्लिमों की बात कर रहे हैं? 
  • आजम: मैं तो सिर्फ मोदी जी को और आरएसएस को जवाब दे रहा हूं। मेरे साथ ब्राह्मण, ठाकुर, बनिया, यादव, दलित सभी हैं। रामपुर की जनता के आशीर्वाद से मैं चुनाव जीतूंगा।


52% मुस्लिम गुलदस्ते की तरह आजम के साथ नहीं जाएंगे: जया

  • भास्कर: यह चुनाव किस तरह से अलग है? 
  • जयाप्रदा: 2004 में आजम खान हमको लाए। 2009 में उन्होंने कांग्रेस को समर्थन दिया। फिर भी मैं जीती। इस बार लड़ाई सीधे उनसे है।   
  • भास्कर: 52% मुस्लिम वोट हैं रामपुर में, सपा-बसपा गठबंधन भी है।
  • जयाप्रदा: 52% मुस्लिम गुलदस्ते की तरह आजम के साथ नहीं जाएंगे। 
  • भास्कर: आपको बाहरी बताया जा रहा है? 
  • जयाप्रदा: बाहरी उम्मीदवार कैसे, 10 साल सांसद रही, मेरा घर यहां है, हमारा कॉलेज है। नीलवेडी कृष्णा स्कूल ऑफ नर्सिंग है, बच्चे पढ़कर रोजगार कर रहे हैं। 

 

दोनों नेताओं से 6 अप्रैल को बातचीत की गई थी।

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