• Hindi News
  • National
  • Gujarat Morbi Bridge Accident; Morbi Nagar Palika Officer | Ajanta Oreva Group MD Jaysukhbhai Patel

मोरबी के गुनहगारों को बचाया:सिर्फ क्लर्क, गार्ड-मजदूर गिरफ्तार... FIR में ओरेवा, उसके MD और अफसरों का नाम नहीं, ना उनसे पूछताछ

3 महीने पहले

गुजरात के मोरबी में मच्छू नदी का केबल ब्रिज गिरने से मरने वालों की संख्या 135 हो चुकी है। इनमें 50 से ज्यादा बच्चे हैं। मौत के इन डराने वाले आंकड़ों के बीच इस घटना के जिम्मेदारों को बचाने का खेल भी शुरू हो गया है। सोमवार को पुलिस ने इस केस में जिन 9 लोगों को गिरफ्तार किया, उनमें ओरेवा के दो मैनेजर, दो मजदूर, तीन सिक्योरिटी गार्ड और दो टिकट क्लर्क शामिल हैं।

पुलिस की FIR में न तो पुल को ऑपरेट करके पैसे कमाने वाली ओरेवा कंपनी का जिक्र है, न रेनोवेशन का काम करने वाली देवप्रकाश सॉल्युशन का। पुल की निगरानी के लिए जिम्मेदार मोरबी नगर पालिका के इंजीनियरों का भी नाम इसमें नहीं है। यानी केवल छोटे कर्मचारियों को हादसे का जिम्मेदार ठहराकर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है।

पुल हादसे में दीपक पारेख, दिनेश दवे, मनसुख टोपिया, मादेव सोलंकी, प्रकाश परमार, देवांग, अल्पेश गोहिल, दिलीप गोहिल, मुकेश चौहान को अरेस्ट किया गया है।
पुल हादसे में दीपक पारेख, दिनेश दवे, मनसुख टोपिया, मादेव सोलंकी, प्रकाश परमार, देवांग, अल्पेश गोहिल, दिलीप गोहिल, मुकेश चौहान को अरेस्ट किया गया है।

एक झटके में 135 जानें लेने वाले इस हादसे को लेकर अफसर कितने गंभीर हैं, इसकी बानगी यह है कि राज्य सरकार ने जांच के लिए जिन 5 अधिकारियों की कमेटी बनाई थी, उसने भी महज 25 मिनट में अपनी जांच पूरी कर ली। आइए आपको सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं कि मोरबी हादसे के ये गुनहगार कौन हैं...

एग्रीमेंट में मुनाफे पर फोकस, जिम्मेदारियों से किनारा
सस्पेंशन पुल को ऑपरेट करने के लिए ओरेवा कंपनी और मोरबी नगर पालिका के बीच 6 मार्च 2022 को जो एग्रीमेंट हुआ था, उसकी कॉपी दैनिक भास्कर के पास है। 300 रुपए के स्टांप पेपर पर हुए एग्रीमेंट में लिखा है कि कंपनी टिकट की दर बढ़ा सकेगी, पुल का कॉमर्शियल इस्तेमाल कर सकेगी और इसमें सरकारी एजेंसियों का दखल नहीं होगा। तीन पेज के एग्रीमेंट में इस बात का जिक्र कहीं नहीं है कि हादसा होने की स्थिति में कौन जिम्मेदार होगा।

एग्रीमेंट की शर्तें तोड़कर महंगे टिकट बेचे
मोरबी नगरपालिका के साथ ओरेवा के समझौते के मुताबिक मरम्मत पूरी होने के बाद पुल को खोला जाना था। इस ब्रिज पर मार्च 2023 तक वयस्कों से 15 रुपए और बच्चों से 10 रुपए टिकट लेने का प्रावधान था। साल 2023-24 से हर साल टिकट में 2 रुपए बढ़ाए जाने थे, लेकिन ओरेवा ने पुल खुलते ही ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए बड़ों के लिए 17 रुपए और बच्चों के लिए 12 रुपए का टिकट बेचना शुरू कर दिया।

ओरेवा ने पुल पर जाने के लिए ये टिकट हादसे वाले दिन यानी 30 अक्टूबर को बेचे थे।
ओरेवा ने पुल पर जाने के लिए ये टिकट हादसे वाले दिन यानी 30 अक्टूबर को बेचे थे।

टिकट में नगर पालिका के नाम का जिक्र तक नहीं
नियम के मुताबिक, जब कोई सरकारी संपत्ति किसी निजी कंपनी को संचालन के लिए दी जाती है, तो उस पर मालिकाना हक सरकारी संस्था के पास ही रहता है। जैसे, हाईवे पर टोल वसूली निजीं कंपनियां करती हैं, लेकिन रसीद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के नाम से ही जारी की जाती है। मोरबी के सस्पेंशन ब्रिज के मामले में ऐसा नहीं था। पुल और टिकट दोनों पर मोरबी नगर पालिका का जिक्र तक नहीं था।

यह खबर पढ़ी आपने, अब इस पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दीजिए....

हादसे के तीसरे दिन मोदी मोरबी पहुंचे, घायलों और परिजन से मुलाकात की

मोरबी के सिविल अस्पताल में घायल का हालचाल जानते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
मोरबी के सिविल अस्पताल में घायल का हालचाल जानते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

गुजरात में ब्रिज हादसे के दो दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोरबी पहुंचे। वे सिविल अस्पताल में घायलों से मिले। इसके बाद हादसे में जान गंवाने वालों के परिजन से मुलाकात की। अस्पताल परिसर में ‌उन्होंने राहत और बचाव कार्य में लगी सेना, NDRF, SDRF की टीमों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर हालात का जायजा लिया। पहले उन्होंने घटना वाली जगह पर मच्छू नदी पर टूटे ब्रिज का मुआयना किया। मंगलवार को दिनभर चले घटनाक्रम विस्तर से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

चलते-चलते मोरबी पुल हादसे से जुड़ी भास्कर की ये खास खबरें भी पढ़ें...

गुजरात ब्रिज हादसे के दर्दनाक VIDEO: कोई तैरकर बचा, तो कोई कंधे पर लाश लेकर भागाम

गुजरात के मोरबी में रविवार को सस्पेंशन ब्रिज हादसे में कई परिवार बर्बाद हो गए। शाम करीब साढ़े छह बजे मच्छू नदी पर बना 143 साल पुराना ब्रिज अचानक टूट गया। करीब 500 लोग नदी में जा गिरे। बचाओ-बचाओ की पुकार और चारों तरफ अफरा-तफरी। कुछ लोग तैरकर बाहर आ गए। कुछ ने दूसरों को निकाला भी। कई लोग टूटे ब्रिज पर जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे। कुछ लाशें लेकर अस्पताल की ओर दौड़ रहे थे। पढ़ें पूरी खबर...

मोरबी हादसे की 11 कहानियां: परिवार में बचा 4 साल का जियांश; रूपेश के घर से एकसाथ उठीं चार अर्थियां

​​​​​​किसी ने औलाद खो दी, किसी ने जीवन साथी। किसी की कोख में ही उसकी औलाद की कब्र बन गई। किसी के अपने उसकी आंखों के आगे डूब गए। कहीं मासूम परिवार में अकेला बचा, तो किसी के घर से एक साथ कई अर्थियां उठीं... एक शख्स ने 8 महीने की गर्भवती की लाश देखी और फिर उसकी आंखें ये दहलाने वाला दृश्य भूल नहीं पाईं। पढ़ें पूरी खबर...

43 साल बाद... वही कहर, वैसा ही मौत का तांडव:तब गुजरात के मोरबी शहर में खंभों पर लटकती मिली थीं लाशें

​​​​​​इस भयानक हादसे ने मोरबी के लोगों की फिर से एक दर्दनाक घटना की याद दिला दी थी। यह हादसा मच्छू नदी के डैम टूटने से हुआ था। आइए जानते हैं कि किस तरह 11 अगस्त 1979 को यह पूरा शहर किस तरह श्मशान में तब्दील हो गया था। पढ़ें पूरी खबर...