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बिना बिजली फव्वारे चलने के सवाल पर ओवैसी का जवाब:बोले- पहले ग्रेविटी का यूज होता था; समझाने के लिए लिंक शेयर किया

नई दिल्लीएक महीने पहले
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ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिलने का दावा किया जा रहा है। मुस्लिम पक्ष ने इसे वजूखाने का फव्वारा बताया था। इसे लेकर संघ के सदस्यों ने सवाल किया था कि बिना बिजली के फव्वारा कैसे चलता था। अब ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसका जवाब दिया है। उन्होंने शनिवार को कहा कि फव्वारा कम से कम 7वीं शताब्दी से इस्लामिक आर्किटेक्चर का हिस्सा रहा है और तब उन्हें ग्रेविटी से चलाया जाता था।

न्यूयॉर्क टाइम्स के एक आर्टिकल का लिंक शेयर करते हुए ओवैसी ने ट्वीट किया। इसमें बिजली के बिना चलने वाले फव्वारों का जिक्र किया गया है। ओवैसी ने कहा, 'संघी जीनियस पूछ रहे हैं कि बिजली के बिना फव्वारा कैसे चलता है? इसे ग्रेविटी कहा जाता है। दुनिया का सबसे पुराना फव्वारा 2700 साल पहले बनाया गया। प्राचीन रोमन और यूनानियों के पास पहली और छठी शताब्दी के फव्वारे थे।'

ओवैसी ने लिखा, 'शाहजहां के शालीमार गार्डन में 410 फव्वारे हैं। संघियों को विकिपीडिया का लिंक दे रहा हूं, क्योंकि इससे ज्यादा वे नहीं समझ सकते हैं।

हिंदू पक्ष ने दावा किया है कि वजू खाने के पास एक शिवलिंग पाया गया था, जिसका इस्तेमाल मुस्लिम अपनी नमाज से पहले हाथ पैर धोने के लिए करते हैं। मस्जिद प्रबंधन समिति ने दावा किया कि जिस वस्तु के शिवलिंग होने का दावा किया जा रहा है, वह फव्वारा है।

उधर, विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख आलोक कुमार ने शुक्रवार को दावा किया कि हिंदू पक्ष यह साबित करने में सक्षम होगा कि पाया गया शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। उन्होंने कहा, 'हम मानते हैं कि यह शिवलिंग है क्योंकि नंदी इसे देख रहे हैं। इससे पता चलता है कि यह मूल ज्योतिर्लिंगों में से एक है और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का वजू खाना मंदिर तोड़कर बनाया गया है।

ज्ञानवापी की दोनों सर्वे रिपोर्ट में कमल के फूल, स्वास्तिक, घंटियों, त्रिशूल इत्यादि के चिह्न मस्जिद में मिलने की बात कही गई।
ज्ञानवापी की दोनों सर्वे रिपोर्ट में कमल के फूल, स्वास्तिक, घंटियों, त्रिशूल इत्यादि के चिह्न मस्जिद में मिलने की बात कही गई।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने यह मामला जिला जज को ट्रांसफर कर दिया। साथ ही, यह भी आदेश दिया कि जिला जज 8 हफ्ते में सुनवाई को पूरा करेंगे। 17 मई को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में तीन बड़ी बातें कही थीं।

  • पहला- शिवलिंग के दावे वाली जगह को सुरक्षित किया जाए।
  • दूसरा- मुस्लिमों को नमाज पढ़ने से न रोका जाए।
  • तीसरा- सिर्फ 20 लोगों के नमाज पढ़ने वाला ऑर्डर अब लागू नहीं। यानी ये तीनों निर्देश अगले 8 हफ्तों तक लागू रहेंगे।