दिल्ली / हिंदुत्व प्रेरित दस्तावेज के संविधान की जगह लेेने का खतरा- किताब की प्रस्तावना में अंसारी

Dainik Bhaskar

Feb 10, 2019, 03:37 AM IST


पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी। पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी।
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पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी।पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी।
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  • पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने चिदंबरम की किताब की प्रस्तावना के जरिए सरकार पर बोला हमला
  • लिखा- हमने अमानवीयता का विकल्प चुन लिया, इंसानियत का दायरा छोड़ने का फैसला सही नहीं

नई दिल्ली (मुकेश कौशिक). पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने आगाह किया है कि देश में हिंदुत्व से प्रेरित दस्तावेज के संविधान की जगह लेने का खतरा साफ दिख रहा है। साथ ही कहा कि शासन तंत्र से जुड़ी अनेक संस्थाएं चरमरा गई हैं। कुछ काम नहीं कर पा रहीं और कुछ बैकरूम कंट्रोल के आगे घुटने टेक चुकी हैं। सीधे-सीधे केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बाेलने के लिए अंसारी ने कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की किताब को जरिया बनाया है।

 

चिदंबरम की किताब की प्रस्तावना लिखी

पूर्व उप राष्ट्रपति ने चिदंबरम की किताब “अनडोंटेड: सेविंग द आइडिया ऑफ इंडिया’ की प्रस्तावना लिखी है। किताब के एक अंश के हवाले से अंसारी ने कहा कि स्वतंत्रता, समानता, उदारता, धर्मनिरपेक्षता, निजता, वैज्ञानिक सोच सहित संविधान के हर मूल्य पर हमले हो रहे हैं। यह खतरा साफ दिख रहा है कि संविधान के बजाय एक ऐसा दस्तावेज आएगा, जो हिंदुत्व से प्रेरित होगा। संविधान के महत्वपूर्ण मूल्यों को ध्वस्त करने वाला यह वैचारिक भटकाव सुनियोजित और निर्लज्जापूर्वक सार्वजनिक है। यह आस्था के आधार पर नागरिकों में भेदभाव करता है। विविधता वाले समाज को एक संस्कृति के दबदबे से खत्म करता है और धर्मनिरपेक्ष एवं भाईचारे पर आंच लाता है। कश्मीर के मुद्दे पर अंसारी ने कहा कि पूर्व पीएम वाजपेयी ने इसका समाधान “इंसानियत के दायरे’ में करने की हिमायत की थी। पर लगता है कि हमने अमानवीयता का विकल्प चुन लिया है। इंसानियत का दायरा छोड़ने का फैसला सही नहीं लगता।

 

संसद फर्ज नहीं निभा रही, सरकार भी ड्यूटी में फेल 
अंसारी ने लिखा कि संस्थाओं में गिरावट तो आ रही थी पर हाल के वर्षों में स्थिति गड़बड़ा गई है। सांसदों की समीक्षा के बिना अगर बजट पास हो जाए, स्थायी समिति की स्क्रूटनी के बिना महत्वपूर्ण बिल पारित होते हैं तो मान लेना चाहिए कि संसद अपना वैधानिक कर्तव्य नहीं निभा रही और सरकार भी अपने कर्तव्य में फेल हो गई है।

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