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धर्म संसद में भड़काऊ बयान का मामला:जितेंद्र त्यागी उर्फ वसीम रिजवी की जमानत याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- स्पीच का मकसद दंगे भड़काना था

5 महीने पहले
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार धर्म संसद मामले में जितेन्द्र त्यागी उर्फ वसीम रिजवी की जमानत खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि त्यागी के भाषण की भाषा अभद्र थी जिसका उद्देश्य दंगे भड़काना, दुश्मनी को बढ़ावा देना और पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने जैसी चीजें शामिल थीं। मामला 17-19 दिसंबर, 2021 के बीच हुई धर्म संसद का है।

स्वतंत्रता के अधिकार की अपनी सीमाएं
जस्टिस रवींद्र मैथानी की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि अभद्र भाषा के दूरगामी परिणाम होते हैं। कोर्ट ने त्यागी का भाषण दोबारा तो नहीं पढ़ा लेकिन इसके बारे में कहा कि यह अपमानजनक टिप्पणी एक विशेष धर्म और पैगंबर के खिलाफ थी। कोर्ट ने ये भी कहा कि संविधान में दिए गए स्वतंत्रता के अधिकार की अपनी सीमाएं हैं। अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत दिए गए प्रतिबंधों के अधीन हैं।

जितेंद्र त्यागी ने कथित तौर पर जिस तरह के बयान दिए और वीडियो मैसेज साझा किए वे समाज पर गलत प्रभाव डालते हैं। इसे देखते हुए कोर्ट ने मामले को जमानत के लिए सही नहीं माना।

त्यागी पर 153A, 298 धाराओं के तहत मामला दर्ज
त्यागी के अभद्र भाषण के लिए उत्तराखंड पुलिस ने IPC के 1860 की धारा 153A (धर्म, नस्ल, जन्म स्थान, निवास, भाषा के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना और सद्भाव बनाए रखने के विरुद्ध काम करना) और 298(किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाएं आहत करने के इरादे से बोलना) के तहत मामला दर्ज किया था।

इससे पहले जनवरी में हरिद्वार की एक लोकल कोर्ट ने अभद्र भाषण के आरोपी जितेंद्र त्यागी को पैगंबर मोहम्मद पर उनकी टिप्पणी के लिए जमानत देने से इनकार कर दिया था।

गाजियाबाद के मंदिर में हुआ था वसीम रिजवी का धर्मांतरण
नरसिंहानंद गिरि ने गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में 6 दिसंबर को वसीम रिजवी का धर्मांतरण कराया था। उन्हें नया नाम जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी दिया गया था। धर्मांतरण के बाद से वसीम रिजवी मुस्लिम धर्म को लेकर लगातार विवादित बयानबाजी कर रहे हैं। इसे लेकर उन पर हरिद्वार में पिछले दिनों तीन मुकदमे भी दर्ज हुए हैं।

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