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कोरोना पर सरकार का फैसला:केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- चीन समेत बाकी देशों से मिलीं खराब एंटीबॉडी टेस्टिंग किट लौटाई जाएंगी, भारत ने इनका पैसा भी रोक रखा है

नई दिल्ली2 वर्ष पहले
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रैपिड एंटीबॉडी टेस्टिंग किट से कोरोना संदिग्धों की जांच का नतीजा तो 15 मिनट में मिल जाता है, लेकिन यह सटीक नहीं होता है। (फाइल)
  • भारत ने पिछले दिनों कोरोना संक्रमितों के रैपिड टेस्ट के लिए चीन से 5 लाख एंटीबॉडी किट मंगवाई थीं
  • राजस्थान और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों ने एंटीबॉडी टेस्ट किट के नतीजों पर सवाल उठाए थे
  • इसके बाद आईसीएमआर ने राज्यों में रैपिड एंडीबॉडी टेस्ट किट के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी

कोरोना संकट के बीच संक्रमित मरीजों की टेस्टिंग के लिए भारत ने चीन समेत बाकी देशों से रैपिड एंडीबॉडी टेस्टिंग किट मंगवाई थीं। अकेले चीन से ही 5 लाख किट लाई गई थीं। राज्य सरकारों की ओर से इनके खराब रिजल्ट के शिकायत के बाद भारत सरकार ने किट लौटाने का फैसला लिया है। यह बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने शुक्रवार को राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कही। उन्होंने कहा कि हम उन देशों को किट के एवज में कोइ रकम नहीं देंगे।

इन किट पर सवाल क्यों उठे?

पिछले दिनों पश्चिम बंगाल और राजस्थान समेत कई राज्यों ने केंद्र सरकार के द्वारा राज्यों की दी गईं टेस्टिंग किट के नतीजों पर सवाल उठाए थे। राजस्थान ने इस किट को कोरोना जांच में फेल पाया और इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इस किट से 1232 लोगों के टेस्ट किए गए थे। सिर्फ दो लोगों के पॉजिटिव होने के संकेत मिले। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया था कि रैपिड टेस्टिंग किट की एक्यूरेसी 90% होनी चाहिए थी, लेकिन यह महज 5.4% ही आ रही है। टेस्टिंग के वक्त तापमान को लेकर जो गाइडलाइन थी, उसका भी पालन किया गया था। इसके बावजूद नतीजे सटीक नहीं हैं।

आईसीएमआर ने क्या कहा था?

राज्यों ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से किट के नतीजों को लेकर शिकायत की थी। तब आईसीएमआर के साइंटिस्ट डॉ. रमन गंगाखेड़कर ने मंगलवार को कहा था, ‘‘तीन राज्यों में किट की एक्यूरेसी में फर्क सामने आया है। कुछ जगहों पर इसकी एक्यूरेसी 6% और कुछ पर 71% है। कोरोना महज साढ़े तीन महीने पुरानी बीमारी है। इसकी जांच की तकनीक में सुधार आता रहेगा लेकिन हम इन नतीजों को नजरअंदाज नहीं कर सकते। इसलिए सभी राज्यों से गुजारिश है कि टेस्टिंग किट के इस्तेमाल को अगले दो दिन के लिए रोक दें।’’

चीन की कंपनियों ने कहा रैपिड किट से सही तरह से नहीं हुए टेस्ट
रैपिड एंडीबॉडी टेस्टिंग किट बनाने वाली चीनी कंपनियों वांडफो और लिवजोन डायग्नोस्टिक लिमिटेड ने कहा है कि इन टेस्टिंग किट को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी ने ही एप्रूव किया था। कंपनियों ने टेस्टिंग किट के खराब होने पर हैरानी जताई है। कहा गया है कि इन रैपिड किट से तय प्रक्रिया से ही टेस्ट करना चाहिए। टेस्ट करने में कोई गलती हुई होगी, जिससे परिणाम सही नहीं आए। दोनों कंपनियों ने भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर जांच का भरोसा दिया है।  

रैपिड किट क्या होती है, इसके नतीजे कैसे हैं?

  • इस टेस्ट से कोरोना के संदिग्ध मरीजों के खून के नमूनों की जांच की जाती है। ये संदिग्ध मामलों की तेजी से स्क्रीनिंग और उनका पता लगाने के लिए जरूरी है। मरीज के स्वाब की पैथोलॉजी लैब में होने वाली टेस्ट से मिलने वाले नतीजों की तुलना में रैपिड टेस्ट किट से नतीजे कम समय में मिल जाते हैं।
  • रैपिड टेस्ट में एक कमी है। दरअसल, शरीर में अगर कोरोनावायरस है, लेकिन उस पर एंडीबॉडीज ने असर नहीं डाला तो रैपिड टेस्ट नेगेटिव आएगा। यानी वायरस की मौजूदगी है, लेकिन पता नहीं चलेगा। ऐसे में उस व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण बाद में उभर सकते हैं और तब तक वह दूसरों को संक्रमित कर सकता है। जबकि आरटी-पीसीआर टेस्ट में नतीजे सटीक आते हैं।

कोरोना की 2 टेस्टिंग तकनीक

आरटी-पीसीआररैपिड
जांचस्वाब सेखून से
जांच कहांलैब मेंमौके पर
नतीजे5 से 10 घंटे15 मिनट में
खर्च1000 से 4500 रु.400 से 500 रु.
सटीकज्यादाकम
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