• Hindi News
  • National
  • Hijab Controversy : Religious Leader Said Women Should Be In The Veil Of Mention In Islam, Muslim Leader Said Let The Girls Breathe

हिजाब और तालीम के बीच 'फंसीं' मुस्लिम छात्राएं:AMU प्रोफेसर बोले-इस्लाम में ड्रेस कोड नहीं, मौलाना ने कहा-परदे को लेकर लड़कियों से न हो जोर-जबरदस्ती

नई दिल्ली10 महीने पहलेलेखक: दीप्ति मिश्रा
  • कॉपी लिंक
  • यूनिवर्सिटी के अंदर नियमों का पालन हो, इस पर सबकी एक राय
  • लड़कियों पर किसी किस्म की ड्रेस थोपी न जाए: सामाजिक कार्यकर्ता
  • इस्लाम में ड्रेस कोड नहीं, बस नुमाइश न करने की बात: AMU प्रोफेसर
  • इस्लाम में परदे का हुक्म, लेकिन जबरदस्ती न हो: मौलाना अंसार रजा
  • लड़कियां पढ़ रही हैं, खुलकर सांस लेने दीजिए: कांग्रेस लीडर महरून निशा

कर्नाटक के स्कूल में मुस्लिम लड़कियों के हिजाब पहनने पर हंगामा जारी है। इस मुद्दे पर देश के अन्य हिस्सों में भी राजनीतिक घमासान मच गया है। नोबेल अवॉर्ड विजेता मलाला यूसुफजई ने जहां इस मामले पर चिंता जताई है। वहीं, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इसे लड़कियों की पसंद का मामला बताया है। इधर, सोशल मीडिया पर हिजाब बहस का मुद्दा बन चुका है। एक धड़े का कहना है कि लड़कियों के लिए शिक्षा जरूर है हिजाब नहीं, जबकि दूसरे समूह का मानना है कि हिजाब पहनना लड़कियों की मर्जी होनी चाहिए। पढ़ाई-लिखाई के सवाल से आगे बढ़कर इस मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है।

लड़कियों के लिए हिजाब जरूरी है या शिक्षा? क्या मुस्लिम धर्म में हिजाब पहनना अनिवार्य है? यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में मजहबी कपड़े पहनना सही या गलत? पढ़िए, ऐसे कुछ सवालों को टटोलती भास्कर वुमन की रिपोर्ट...

लड़कियां पढ़ रहीं है तो उन्हें खुलकर सांस भी लेने दीजिए

उत्तर प्रदेश की कांग्रेस नेता महरून निशा कहती है कि लड़कियां कैसे रहती हैं, क्या पहनती हैं ये उनका फैसला होना चाहिए, किसी और का नहीं। मजहब में है कि सिर ढंक कर रहना है रहिए। जब शिक्षा की बात है और अगर यूनिवर्सिटी में हिजाब पहनने की इजाजत नहीं है तो बाहर पहनिए, अंदर पहनकर मत जाइए। लड़कियां पढ़ रहीं है तो उन्हें खुलकर सांस भी लेने दीजिए। उन पर फैसले थोपे नहीं जाने चाहिए।

इस्लाम में परदे का हुक्म है...
हिजाब पर मचे हंगामे पर दिल्ली के गरीब नवाज फाउंडेशन के चेयरपर्सन मौलाना अंसार रजा का कहना है कि शिक्षा भी जरूरी है और हिजाब भी। अगर यूनिवर्सिटी के अंदर कानून है कि हिजाब पहनकर नहीं जाना है तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए। इस्लाम में महिलाओं से अदब करने के लिए कहा गया है, परदे में रहने के लिए कहा गया है, लेकिन यह चयन लड़कियों का होना चाहिए। उनसे किसी तरह की जोर-जबरदस्ती नहीं कराई जानी चाहिए।

इस्लाम में ड्रेस कोड का नहीं है जिक्र..
इस पर मुस्लिम अलीगढ़ यूनिवर्सिटी (एएमयू)के प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद वसीम अली कहते हैं कि इस्लाम में कहीं भी ड्रेस कोड का जिक्र नहीं है। सिर्फ यह कहा गया है कि महिलाएं ऐसे कपड़े पहने जिससे शरीर की नुमाइश ना हो। उन्होंने बताया कि एएमयू कैंपस की बात करें तो लॉ और मेडिकल को छोड़कर बाकी छात्र-छात्राएं अपनी मर्जी से अपनी पसंद के कपड़े पहनकर आते हैं। लॉ और मेडिकल कॉलेज के लिए ड्रेस कोड निर्धारित है।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. इंदु कहती हैं कि यहां स्टूडेंट और टीचर दोनों ही अपनी पसंद के कपड़े पहनकर आ सकते हैं। सिर्फ अरबी और उर्दू विभाग की महिलाएं हिजाब पहनकर आती हैं। बाकी टीचर और स्टूडेंट सलवार-सूट, साड़ी, जींस, लॉन्ग स्कर्ट सब पहनते हैं।

औरतों के कपड़ों पर मर्दों का नियंत्रण क्यों?
महिला अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली रंजना कुमारी कहती हैं कि कर्नाटक में जो हुआ है वह बेहद गलत है। हिजाब हो या घूंघट दोनों ही गलत हैं। औरतों के कपड़ों पर मर्दों का नियंत्रण रहा है जो कि सरासर गलत है। हिंदू हो या मुस्लिम दोनों में ही धर्म के नाम पर औरतों को निरादर होता आया है। आखिर यह कब तक चलेगा? कॉलेज का ड्रेस कोड है तो उसे मानना चाहिए।

कैसे शुरू हुआ हिजाब का विवाद?
कर्नाटक के उडुपी में 1 जनवरी को हिजाब पर विवाद शुरू हुआ था, जिसके बाद शिमोगा सहित कई जिलों में इस पर प्रोटेस्ट होने लगा। कर्नाटक के कुंडापुरा कॉलेज की 28 मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनकर क्लास अटैंड करने से रोका गया था। मामले को लेकर छात्राओं ने हाईकोर्ट में याचिका लगाते हुए कहा था कि इस्लाम में हिजाब अनिवार्य है, इसलिए उन्हें इसकी अनुमति दी जाए। इन छात्राओं ने कॉलेज गेट के सामने बैठकर धरना देना भी शुरू कर दिया था।
लड़कियों के हिजाब पहनने के जवाब में कुछ हिंदू संगठनों ने लड़कों को कॉलेज कैंपस में भगवा शॉल पहनने को कहा था। वहीं, हुबली में श्रीराम सेना ने कहा था कि जो लोग बुर्का या हिजाब की मांग कर रहे हैं, वे पाकिस्तान जा सकते हैं। उनका ये भी कहना था कि हिजाब पहनकर क्या भारत को पाकिस्तान या अफगानिस्तान बनाने की कोशिश की जा रही है?

खबरें और भी हैं...