रिपोर्ट / ओरल पोलियो वैक्सीन मिलावटी के साथ-साथ घटिया भी, कंपनी पर कार्रवाई की तैयारी

Dainik Bhaskar

Mar 14, 2019, 09:05 AM IST


प्रतीकात्मक चित्र। प्रतीकात्मक चित्र।
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  • वैक्सीन में वायरस न होने का बायोमैड कंपनी का दावा खारिज
  • कंपनी की अपील पर नमूना दोबारा जांच के लिए हिमाचल प्रदेश की लैबोरेटरी में भेजा गया था 
  • उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में 15 लाख बच्चों को पिलाई गई थी टाइप टू स्ट्रेन वैक्सीन

नई दिल्ली (पवन कुमार). ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) में पोलियो टाइप टू का स्ट्रेन था, इस बात को हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित केन्द्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) ने भी स्पष्ट कर दिया है। इस जांच रिपोर्ट के बाद वैक्सीन बनाने वाली कंपनी पर कार्रवाई की तैयारी है।

 

वैक्सीन बनाने वाली कंपनी बायोमेड की अपील पर वैक्सीन के नमूने को दुबारा जांच के लिए भेजा गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच में पाया गया है कि ओरल पोलियो वैक्सीन का यह नमूना मिलावटी और स्टैंडर्ड क्वालिटी का नहीं है। इसमें पोलियो टाइप टू का स्ट्रेन है, जो देश में अप्रैल-2016 के बाद पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया था।

 

दरअसल, टाइप टू स्ट्रेन को इसलिए देना बंद कर दिया गया था कि क्योंकि पोलियो में टाइप टू का स्ट्रेन विश्व के किसी भी देश में नहीं है, ऐसे में यह गैर जरूरी वैक्सीन देने से वैक्सीन एक्वॉयर पोलियो वायरस होने का खतरा रहता है। इसके बाद भी यह टाइप टू वायरस का स्ट्रेन बायोमेड प्रा.लिमिटेड कंपनी की ओर से तैयार की गई ओरल पोलियो वैक्सीन में मिला था। इस कंपनी की ओर से तैयार ओपीवी वैक्सीन राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के तहत बच्चों को दी जा रही थी। 

 

जिन बच्चाें काे मिलावटी वैक्सीन लगी उनपर नजर: टाइप टू स्ट्रेन का पता लगने के बाद सरकार ने इस बैच में बनी सभी वैक्सीन को देश भर से वापस कर लिया था, लेकिन इससे पहले उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ ब्लॉक में करीब 15 लाख बच्चाें को यह मिलावटी "पीवी वैक्सीन दी जा चुकी थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य सरकारों की "र से उन सभी बच्चों की पहचान कर सब को इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन (आईपीवी) दी जा रही है। इसमें पोलियो के टाइप टू के स्ट्रेन से बचाव के लिए दवा होती है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है।

 

निदेशक के दोषी पाए जाने पर तीन से पांच साल की कैद और 1 लाख रुपए जुर्माना : मिलावटी वैक्सीन बनाने वाली कंपनी बायोमेड पर सरकार कार्रवाई करेगी। हालांकि कंपनी का निदेशक अभी जमानत पर है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत दोषी पाए जाने पर कंपनी के निदेशक को तीन से पांच साल कैद और कम से कम एक लाख रुपए का जुर्माना होगा। 

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