एक मुस्लिम देश में हिंदी को लेकर हुआ ऐतिहासिक फैसला, वहां की अदालतों में इसे अब माना जाएगा तीसरी ऑफिशियल भाषा

4 वर्ष पहले
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दुबई. ऐतिहासिक फैसले में यूएई के शहर अबुधाबी में हिंदी को कोर्ट के अंदर तीसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया है। यहां की अदालत में अरबी और अंग्रेजी भाषा को भी आधिकारिक भाषा का दर्जा मिला हुआ है। न्यायपालिका ने यह फैसला न्याय का दायरा बढ़ाने के लिए किया है।

हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा

- अबुधाबी के जस्टिस डिपार्टमेंट ने शनिवार को कहा कि कामगारों से जुड़े मामलों में हमने अरबी और अंग्रेजी के अलावा हिंदी में भी बयान, दावे और अपील दायर करने की शुरुआत की है।
- डिपार्टमेंट ने कहा- हमारा लक्ष्य हिंदी भाषियों को मुकदमों की प्रक्रिया सीखने में मदद करना है। इसके अलावा उनके अधिकारों और कर्तव्यों को भाषाई अड़चनों के बिना समझाना चाहते हैं।
- हिंदी भाषियों को अबुधाबी जस्टिस डिपार्टमेंट की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
- ऑफिशियल आंकड़े के मुताबिक, भारतीय यूएई की जनसंख्या का 30% हैं। भारतीय समुदाय की आबादी 26 लाख है।

फैसले के पीछे ये है मकसद
- अबुधाबी न्यायिक विभाग के अंडर सेक्रेटरी यूसुफ सईद अल आबरी कई भाषाओं में याचिकाओं, आरोपों और अपीलों को स्वीकार करने के पीछे हमारा मकसद 2021 की भविष्य की योजना को देखते हुए सभी के लिए न्याय व्यवस्था को प्रसारित करना है। हम न्यायिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाना चाहते हैं।
- आबरी ने बताया कि शेख मंसूर बिन जायद अल नाह्यान, उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के मामलों के मंत्री और अबुधाबी न्यायिक विभाग के अध्यक्ष के निर्देशों पर न्यायिक व्यवस्था में कई भाषाओं को शामिल किया गया।
- द्विभाषी कानूनी व्यवस्था का पहला चरण नवंबर 2018 में लॉन्च किया गया था, इसके तहत सिविल और वाणिज्यिक मामलों में अगर वादी विदेशी हो तो अभियोगी केस के दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद करना होता है।