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मशहूर हिंदी लेखिका कृष्णा सोबती नहीं रहीं, 93 साल की उम्र में निधन

2 वर्ष पहले
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  • सोबती का जन्म 18 फरवरी 1925 में गुजरात-पंजाब प्रांत में हुआ जो अब पाकिस्तान में है
  • कविताओं से की थी लेखन की शुरुआत, बाद में फिक्शन राइटर बन गईं

नई दिल्ली. हिंदी की मशहूर लेखिका कृष्णा सोबती का शुक्रवार को यहां 93 साल की उम्र में निधन हाे गया। उनका जन्म 18 फरवरी 1925 को गुजरात-पंजाब प्रांत में हुआ था। यह क्षेत्र अब पाकिस्तान में है। बंटवारे के वक्त उनका परिवार दिल्ली आकर बस गया था। उनकी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली और शिमला में हुई।

1) 2017 में मिला ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’

सोबती को 1980 में ‘जिंदगीनामा' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। 1996 में उन्हें साहित्य अकादमी का फैलो बनाया गया जो अकादमी का सर्वोच्च सम्मान है। 2017 में इन्हें भारतीय साहित्य के सर्वोच्च सम्मान "ज्ञानपीठ पुरस्कार" से सम्मानित किया गया।

सोबती को 1981 में शिरोमणि पुरस्कार और 1982 में हिंदी अकादमी पुरस्कार मिला। उन्होंने यूपीए सरकार के दौरान पद्मभूषण लेने से इनकार कर दिया था। 2015 में असहिष्णुता के मुद्दे पर साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिया था। 

सोबती ने लेखन की शुरुआत कविताओं से की थी, लेकिन बाद में उनका रुख फिक्शन की ओर हो गया। बादलों के घेरे उनका कहानी संग्रह है। डार से बिछुड़ी, मित्रो मरजानी, यारों के यार, तिन पहाड़, सूरजमुखी अंधेरे के, सोबती एक सोहबत, जिंदगीनामा, ऐ लड़की, समय सरगम, जैनी मेहरबान सिंह उनके उपन्यास हैं।

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