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जवाब / पाकिस्तानी एफ-16 लड़ाकू विमान के जवाब में भारत ने फ्रांस से खरीदे थे मिराज-2000, जैश के ठिकाने उड़ाने वाले मिराज की कहानी

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  • भारतीय वायुसेना के पास है सबसे अपग्रेडेड मिराज-2000 लड़ाकू विमान
  • कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सप्लाय लाइन को ध्वस्त करने के लिए मिराज 2000 का हुआ था इस्तेमाल
     

Feb 26, 2019, 12:54 PM IST

नई दिल्ली. पुलवामा हमले के 12 दिन बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। मंगलवार तड़के 3.30 बजे मिराज-2000 लड़ाकू विमानों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार पाक के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में घुसकर हमला किया जैश के ठिकाने ध्वस्त किए। 12 मिराज विमानों ने 1000 किलो बम बरसाए। पाक में आतंकी ठिकानों को तबाह करने वाले मिराज 2000 फाइटर को फ्रांस से खरीदने की वजह भी पाकिस्तान था। जिसे पाकिस्तान एफ-16 लड़ाकू विमान के जवाब में खरीदा गया था। जानिए कब-कब यह मिराज 2000 ने रचा इतिहास…

5 बातें मिराज 2000 क्यों हैं खास

भारत में मिराज-2000 का पहली बार इस्तेमाल 1999 के कारगिल युद्ध में किया गया था। कारगिल युद्ध के समय जब मिग-21 और मिग-27 नाकाम हो रहे थे, तब भारत ने पाकिस्तान की सप्लाय लाइन ध्वस्त करने के लिए मिराज-2000 का इस्तेमाल किया। 

पाकिस्तान ने अमेरिका से एफ-16 लड़ाकू विमान खरीदे थे, जिसके जवाब में भारत ने फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन को अक्टूबर 1982 में 36 सिंगल-सीटर मिराज-2000 एचएस और 4 ट्विन-सीटर मिराज-2000 टीएचएस खरीदे। मिराज-2000 को जून 1985 में भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। डसॉल्ट ने 2015 में वायुसेना को अपग्रेडेड मिराज-2000 लड़ाकू विमान भी सौंपे थे।

मिराज-2000 की लंबाई 47 फीट है जबकि खाली विमान का वजन 7500 किलो है। ये विमान 13,800 किलो गोला बारुद के साथ भी 2,336 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। मिराज-2000 किसी भी मौसम में उड़ान भर सकता है। इसे इस तरह से तैयार किया गया है कि आपातकाल स्थिति में इसे राष्ट्रीय राजमार्गों पर उतारा जा सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये कम ऊंचाई पर भी काफी तेज गति से उड़ान भरने में सक्षम है।

मिराज में आधुनिक वॉइस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर है, जिसकी मदद से इसके कई फंक्शन को आवाज के जरिए ही कंट्रोल किया जा सकता है। यह एक बार में कई बड़े रॉकेट और मिसाइल को ले जाने में सक्षम है। 30 एम एम के रॉकेट, कई तरह की मिसाइल और लेजर गाइडेड बमों को एक साथ ढो सकता है। मिराज-2000 में हथियारों को ले जाने के लिए 9 हाईप्वॉइंट दिए गए हैं। इनमें से 5 विमान के नीचे और दो-दो दोनों पंखों की तरफ दिए गए हैं। 
 

अब तक 6000 से ज्यादा मिराज-2000 विमान बनाए जा चुके हैं, जिसका इस्तेमाल 9 देशों की वायुसेनाएं करती हैं। मिराज-2000 का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना के अलावा यूएई, मिस्र, यूनान, पेरू, कतर और ताईवान की वायुसेना भी करती हैं। भारत के पास वर्तमान में 51 मिराज 2000 हैं।
 

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