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कोरोना के किफायती इलाज की कोशिश:गृह मंत्रालय की कमेटी ने दिल्ली के अस्पतालों में बेड का रेट तय करने की सिफारिश सौंपी, मरीजों का खर्च 50% तक घटेगा

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
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दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल में गुरुवार को एक महिला का स्वैब सैंपल लेते स्वास्थ्यकर्मी। गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद दिल्ली में सैंपल टेस्टिंग में तेजी आई है। - Dainik Bhaskar
दिल्ली के एक सरकारी अस्पताल में गुरुवार को एक महिला का स्वैब सैंपल लेते स्वास्थ्यकर्मी। गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद दिल्ली में सैंपल टेस्टिंग में तेजी आई है।
  • गृह मंत्रालय ने कहा कि कमेटी की सिफारिश के आधार पर ही दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों की सुविधाओं का रेट तय होगा
  • कमेटी ने सरकार से कहा है कि आइसोलेशन बेड के लिए हर दिन 8 हजार से 10 हजार का रेट तय किया जाए

प्राइवेट अस्पतालों में बेड का रेट तय करने के लिए बनी कमेटी ने शुक्रवार को गृह मंत्रालय को सिफारिश सौंप दी। गृह मंत्री अमित शाह ने 13 जून को यह कमेटी गठित की थी। गृह मंत्रालय ने कहा कि कमेटी की सिफारिश के आधार पर ही दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों की सुविधाओं का रेट तय होगा। प्राइवेट अस्पताल बेड के लिए 25 हजार से लेकर 54 हजार रु. तक वसूल रहे हैं। नई सिफारिशें लागू होने पर इससे आधी कीमत लगेगी।

नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल की अगुआई वाली इस कमेटी को सुनिश्चित करना है कि प्राइवेट अस्पतालों में 60% बेड कम कीमत पर उपलब्ध हो। इसे कोरोना जांच और इलाज के लिए भी कीमत तय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

कमेटी की सिफारिश:

  • आइसोलेशन बेड के लिए हर दिन 8 हजार से 10 हजार रु. लिए जाएं।
  • बिना वेंटिलेटर के आईसीयू बेड के लिए हर दिन 13 से 15 हजार रु. कीमत हो।
  • वेंटिलेटर के साथ आईसीयू बेड लेने पर हर दिन 15 से 18 हजार रु. लिए जाएं।

दिल्ली के 242 कंटेनमेंट जोन में सर्वे पूरा
गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश के बाद दिल्ली में सर्वे का काम तेजी से किया जा रहा है। गुरुवार तक 242 कंटेनमेंट जोन सर्वे पूरा कर लिया गया। 15 जून से 17 जून के बीच दिल्ली में 27 हजार 263 सैंपल की जांच की गई। हर दिन 4 हजार से 5 हजार ज्यादा सैंपल की जांच हुई। अभी तक दिल्ली में 2.3 लाख लोगों की जांच की गई है। 

मजदूरों को घर भेजे केंद्र और राज्य सरकार: सुप्रीम कोर्ट

सु्प्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को प्रवासी मजदूरों से जुड़े मामले को खुद नोटिस में लिया। कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकारों को निर्देश दिया कि वह कोर्ट के 9 जून के आदेश का पालन करें। कोर्ट की ओर से तय समय के मुताबिक सभी मजदूरों को घर भेजने का इंतजाम किया जाए। जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि कोर्ट का पिछला आदेश काफी स्पष्ट था। इसमें कहा गया था कि मजदूरों को 15 दिन के अंदर उनके घर पहुंचाया जाए। 

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